कौन हैं भारतमाता? किसने बनाई इनकी पहली तस्वीर और क्या है "भारतमाता की जय" का मतलब?

कौन हैं भारतमाता? किसने बनाई इनकी पहली तस्वीर और क्या है "भारतमाता की जय" का मतलब?भारत माता की जय के बिना राष्ट्रीय पर्व का कोई भी उद्घोष

Update: 2021-02-16 06:32 GMT
कौन हैं भारतमाता? किसने बनाई इनकी पहली तस्वीर और क्या है "भारतमाता की जय" का मतलब? भारतमाता की जय के बिना राष्ट्रीय पर्व का कोई भी उद्घोष पूरा नहीं होता लेकिन क्या आप इस बात को जानते हैं कि भारतमाता की जय का उद्घोष कहाँ से आया ? कौन हैं भारतमाता और माता की पहली तस्वीर किसने बनाई थी ?

आइये जानते हैं भारतमाता के बारे में विस्तार से....

  • भारत माता को मातृदेवी के रूप में चित्रित करके उन्हें "भारतम्बा' या  "भारत माता' कहा जाता है।
  • भारत माता कप प्रायः नारंगी या केसरिया रंग की साड़ी पहने , हाथ में भगवा ध्वज लिए हुए चित्रित किया है और भारतमाता की सवारी शेर है.

कौन हैं भारतमाता

किरण चंद्र बनर्जी ने एक नाटक लिखा था जिसका टाइटल था "भारतमाता". इस नाटक का प्रदर्शन सन 1873 में किया गया था इसी नाटक के माध्यम से भारतमाता पहली बार नजर आई थी. यहीं से "भारतमाता की जय" के नारे शुरू होने की बातें कही गई थी.
इसके पश्चात् बिपिन चंद्र पाल ने इसे विस्तृत रूप दे दिया। उन्होंने भारत माता को हिन्दू दर्शन और आध्यात्मिक कार्यों से जोड़ा। उन्होंने भारतमाता को एक देश एवं एक विश्व   कर दिया।

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इसके बाद 1936 में महात्मा गांधी ने भारतमाता का पहला मंदिर वाराणसी स्थित  यूनिवर्सिटी में इसका उद्घाटन किया था. भारत में भारतमाता के बहुत से मंदिर हैं.

भारतमाता की पहली तस्वीर

वर्ष 1905 अवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारतमाता का चित्र बनाया था. इसे भारत माता की पहली तस्वीर माना जाता है. चित्र में भारत  नक्शा नहीं था. भारतमाता भगवा रंग के बंगाल के परम्परागत परिधान में दिखाई गईं. शुरू में इन्हे बंग माता भी कहा जाता था. चार हाथों वाली देवी के हाथों में किताब , धान की पुली, माला और सफ़ेद वस्त्र था.

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भारतमाता की जय

पिछले कुछ वक्त से लेकर "भारतमाता की जय" को लेकर काफी विवाद हुआ है. कुछ लोगों  ने इस पर भगवाकरण का आरोप लगाया तो कुछ लोगों ने इसे राजनैतिक क्षेत्र में रख दिया लेकिन अगर इतिहास के क्षेत्रः में देखा जाए तो सच्चाई इससे बहुत अलग है. "भारतमाता की जय" भारतीय स्वाधीनता संग्राम के समय सर्वाधिक परौक्त होने वाला नारा था. इसलिए आज भी इस नारे का प्रयोग राष्ट्रप्रेम या राष्ट्रनिर्माण से जुड़े अवसरों, कार्यक्रमों एवं आंदोलनों में किया जाता है.

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