दिल्ली के पुराना किला में महाभारत काल के साक्ष्य खोजने के लिए खुदाई शुरू!

Evidence of Mahabharata period in Delhi: इससे पहले भी इसी क्षेत्र में पुरातत्व टीम ने खुदाई का काम किया था

Update: 2023-01-18 08:16 GMT

Excavation begins to find evidence of Mahabharata period in Delhi: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने देश की राजधानी दिल्ली के बीचोबीच खुदाई शुरू की है. इस खुदाई का मकसद महाभारत काल के साक्ष्य खोजना है. महाभारत काल की गहराई से जांच करने के लिए दिल्ली के पुराने किले में फिर से खुदाई का काम शुरू हुआ है. यह एक्सकवेशन 600-1000 BC के वक़्त की जानकारी जुटाने के लिए की जा रही है. इस समय को महाभारत काल के नाम से जाना जाता है. 

दिल्ली में  महाभारत काल के प्रमाण पाने के लिए खुदाई शुरू 

मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के पुराने किले की खुदाई करवाने वाले ASI निर्देशक वसंत स्वर्णकार हैं. देश की स्वतंत्रता के बाद इस इलाके में ASI द्वारा यहां पांचवी बार खुदाई की जा रही है. इससे पहले 2013-14, 2017-18 और उससे पहले 1969-73 में यहां पद्म विभूषण बीबी लाल की अगुवाई में पुराने किले में खुदाई की गई थी. इस बार होने वाली खुदाई का मुख्य उद्देश्य पिछली बार मिले अवशेषों को बचाने का होगा.

दिल्ली पहले इंद्रप्रस्थ कहलाता था. इंद्रप्रस्थ यानी पांडवों की नगरी या राजधानी। गीता और महाभारत में भी इंद्रप्रस्थ का जिक्र मिलता है. यहां खुदाई करने के लिए ASI पुराने किले में मिलने वाले अवशेषों की स्ट्रेटीग्राफी को समझेगी. स्ट्रेटीग्राफी से पुरातात्विक परतों के क्रम और उनकी स्थिति का विश्लेषण करेगी ताकि महाभारत के समय के प्रमाण और पुख्ता हो सकें 

पहले हुई खुदाई में क्या मिला था 

जब इससे पहले यहां खुदाई की गई थी तो ASI को मौर्यकाल के समय के सबूत मिले थे. मौर्य काल से पहले भारत 16 महाजनपदों में विभाजित था. इन महाजनपदों में कुरु, पंचाल और अंग जैसे साम्राज्य शामिल थे. ये तीनों साम्राज्य पांडव, द्रौपदी और कर्ण से क्रमश: जुड़े हुए हैं.लेकिन खुदाई के बाद मिली वस्तुओं को देखने के बाद ये बात कही जाने लगी थी कि यहां हजारों साल पहले भी लोग आधुनिक सुविधाओं के साथ रहते थे. 

ASI का कहना है कि दिल्ली का पुराना किला पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ के प्राचीन काल  से जुड़ा हुआ है. इसका जिक्र प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. पुराना किला 16 वीं शताब्दी में शेर शाह सूरी और मुगल शासक हुमायूं द्वारा बनवाया गया था. इस किले का इतिहास हजारों साल पुराना है.

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