विश्व

पुतिन का 'ऑयल गेम': 4 महीने तक दुनिया को पेट्रोल नहीं बेचेगा रूस, भारत पर क्या होगा सीधा असर?

Rewa Riyasat News
28 March 2026 4:10 PM IST
पुतिन का ऑयल गेम: 4 महीने तक दुनिया को पेट्रोल नहीं बेचेगा रूस, भारत पर क्या होगा सीधा असर?
x
रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई। घरेलू कीमतों को थामने और इजराइल-ईरान जंग के बीच पुतिन सरकार का बड़ा फैसला। भारत पर असर और नई तेल डील।
​दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक, रूस ने वैश्विक बाजार में हलचल मचाने वाला एक बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश जारी किया है। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।

क्यों लिया रूस ने यह कड़ा फैसला?

रूस के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य अपने देश के भीतर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना और घरेलू सप्लाई सुनिश्चित करना है। रूस में वसंत और गर्मियों के दौरान ईंधन की मांग बढ़ जाती है, और सरकार नहीं चाहती कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का असर रूसी नागरिकों की जेब पर पड़े।

उप-प्रधानमंत्री नोवाक के अनुसार, मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध की स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं, इसलिए रूसी कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में तेल बेचना ज्यादा फायदेमंद समझ रही थीं। इसी को रोकने के लिए सरकार ने निर्यात पर ही ताला लगा दिया है।

भारत पर असर: डरने की बात नहीं, लेकिन चुनौती बढ़ी

राहत की बात यह है कि रूस के इस पेट्रोल बैन का भारत पर सीधा असर बहुत कम पड़ेगा। इसका कारण यह है कि भारत रूस से पेट्रोल (तैयार ईंधन) नहीं, बल्कि कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदता है। भारत के पास दुनिया का बेहतरीन रिफाइनरी नेटवर्क है, जहां हम कच्चे तेल को प्रोसेस कर खुद पेट्रोल और डीजल बनाते हैं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 20-25% हिस्सा अब रूस से आता है। चूंकि रूस ने केवल 'तैयार पेट्रोल' के निर्यात पर रोक लगाई है, इसलिए भारत को कच्चे तेल की सप्लाई मिलती रहेगी। हालांकि, अगर इस फैसले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है।

सस्ते तेल का दौर खत्म? प्रीमियम चुका रहा है भारत

एक समय था जब यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दिनों में रूस भारत को भारी डिस्काउंट पर तेल दे रहा था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 की डिलीवरी के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से लगभग 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है।

हैरानी की बात यह है कि अब यह तेल डिस्काउंट के बजाय $5 से $15 प्रति बैरल के प्रीमियम (अतिरिक्त कीमत) पर खरीदा जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और स्वेज नहर व होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने के कारण तेल की कीमतें $100 के पार बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर भारत की इन डील्स पर पड़ा है।

चीन, तुर्किये और ब्राजील पर गिरेगी गाज

रूस के इस बैन का सबसे बुरा असर उन देशों पर पड़ेगा जो सीधे तौर पर रूसी पेट्रोल और रिफाइंड उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। इसमें चीन, तुर्किये (तुर्की), ब्राजील, सिंगापुर और कई अफ्रीकी देश शामिल हैं। रूस रोजाना लगभग 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता है। अब इन देशों को अचानक अन्य महंगे विकल्पों की तलाश करनी होगी, जिससे वहां पेट्रोल की कीमतों में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

पुतिन की 'एनर्जी सिक्योरिटी' प्राथमिकता

रूस का यह कदम स्पष्ट करता है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने के लिए 'रूस फर्स्ट' की नीति पर चल रहा है। पिछले साल भी रूस ने रिफाइनरियों पर हुए हमलों के बाद इसी तरह का बैन लगाया था। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह कच्चे तेल के लिए प्रीमियम चुका रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली ढील (12 मार्च तक लोड हुए कार्गो के लिए) ने भारत को एक सुरक्षा कवच जरूर दिया है।

Rewa Riyasat News

Rewa Riyasat News

2013 में स्थापित, RewaRiyasat.Com एक विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है जो पाठकों को तेज़, सटीक और निष्पक्ष खबरें प्रदान करता है। हमारा उद्देश्य स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाओं तक की भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

Next Story