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तालिबान के समर्थन में दुनियाभर के देशों को पाकिस्तान की धमकी, मान्यता नहीं मिली तो 9/11 जैसे हमले बढ़ेंगे

तालिबान के समर्थन में दुनियाभर के देशों को पाकिस्तान की धमकी, मान्यता नहीं मिली तो 9/11 जैसे हमले बढ़ेंगे
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तालिबान (फाइल फोटो)

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को मान्यता दिलाने का बीड़ा पाकिस्तान ने उठाया है.

खुद भुखमरी और अपने ही पाले आतंकवाद (Terrorism) से जूझ रहा पाकिस्तान (Pakistan) अब दुनिया भर के देशों को धमकाने लगा है. वह अफगानिस्तान (Afghanistan) में ताकत के दम पर बनी तालिबान (Taliban) की सत्ता को मान्यता दिलाने के लिए खुले समर्थन में उतर आया है. पाक ने दुनियाभर के देशों को धमकी देते हुए कहा है कि अगर तालिबान की सत्ता को मान्यता नहीं मिली तो 9/11 जैसे हमले हो सकते हैं.

हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) मोइद यूसुफ (Moeed Yusuf) ने मीडिया को बयान दिया है. यूसुफ़ ने एक तरह से दुनिया भर के उन देशों को धमकी दी है, जो तालिबान का समर्थन नहीं करते या उसे अफगानिस्तान में मान्यता दिलाने के खिलाफ हैं. यूसुफ़ ने धमकी भरे लहजे में कहा है कि अगर तालिबान को मान्यता नहीं मिलती है तो दुनिया भर में 9/11 जैसे हमले बढ़ सकते हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) मोइद यूसुफ (Moeed Yusuf)



यूसुफ़ ने कहा कि पाकिस्‍तान ने अभी तक तालिबान को मान्‍यता नहीं दी है लेकिन विश्‍व समुदाय से अनुरोध करते हैं कि वे तालिबान के साथ बातचीत करें ताकि वहां खालीपन न पैदा हो जाए.

मोईद ने इंटरनेशनल मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अफगानिस्तान को दूसरी बार अलग थलग छोड़ देने से पश्चिमी देशों में शरणार्थियों की संख्या व्यापक तौर पर बढ़ जाएगी और यह बहुत बड़ा संकट होगा. मोईद ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब वर्ष 1989 में सोवियत संघ की सेना इस इलाके से वापस गई थी, तब पश्चिमी देशों ने अफगानिस्‍तान से किनारा कर लिया. इसकी वजह से अफगानिस्‍तान आतंकियों की शरणस्‍थली बन गया.

तालिबान की बात सुने दुनिया

डॉ मोईद ने कहा कि अफगानिस्तान को अलग थलग करने से वहां व्यापक आर्थिक संकट आ जाएगा. दुनिया भर के आतंकवादियों की शरणस्थली बन जाएगा. पैसे न होने से न सरकार चलेगी न प्रशासन और कानून व्यवस्था चरमरा जाएगी. इसके बाद ISIS और अलकायदा जैसे संगठन अफगानिस्तान में अपनी जड़े जमाने लगेंगे. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में 9/11 जैसे भीषण हमले होंगे. इसलिए अब वक़्त आ गया है कि तालिबान के साथ दुनिया बैठे, उनसे बात करे, उनकी बात सुनें और इस बड़ी समस्या का हल निकाले.

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