
बांग्लादेश में हिंदुओं पर खूनी हमला जारी: 28 साल के ऑटो ड्राइवर की हत्या, 23 दिन में 7 हिंदू मारे गए | Bangladesh Hindu Killing

📰 Top News Highlights
- बांग्लादेश में 28 साल के हिंदू ऑटो ड्राइवर समीर कुमार दास की चाकू मारकर हत्या।
- 23 दिनों में यह हिंदुओं की 7वीं हत्या, अल्पसंख्यकों में बढ़ा डर।
- वारदात फेनी जिले के दागनभुइयां इलाके में, ऑटोरिक्शा भी लूटा गया।
- भारत ने जताई चिंता, बार-बार हो रहे हमलों को बताया गंभीर पैटर्न।
Bangladesh Hindu Killing | बांग्लादेश में फिर हिंदू की हत्या
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश के दक्षिणी हिस्से चटगांव डिवीजन के फेनी जिले के दागनभुइयां इलाके में रविवार रात 28 साल के हिंदू युवक समीर कुमार दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हमलावरों ने पहले उसकी पिटाई की और फिर चाकू से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद उसका ऑटोरिक्शा भी लूट लिया गया।
समीर पेशे से ऑटो ड्राइवर था और अपने परिवार का एकमात्र सहारा माना जाता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह रविवार शाम करीब 7 बजे घर से ऑटोरिक्शा लेकर निकला था। देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 2 बजे जगतपुर गांव के पास एक खेत में स्थानीय लोगों को उसका शव मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
Planned Murder? | साजिशन हत्या के संकेत
दागनभुइयां थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि समीर की हत्या में देसी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि यह वारदात अचानक नहीं, बल्कि पहले से प्लानिंग के तहत की गई हो सकती है। पुलिस ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के महीनों में इलाके में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। खासकर हिंदू समुदाय के लोग खुद को निशाने पर महसूस कर रहे हैं। समीर की हत्या ने इस डर को और गहरा कर दिया है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
7 Murders in 23 Days | 23 दिन में 7 हिंदुओं की मौत
समीर की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। बांग्लादेश में बीते 23 दिनों के भीतर यह हिंदू समुदाय की सातवीं मौत है। इससे पहले 5 जनवरी को नरसिंदी जिले में 40 साल के हिंदू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी। इन लगातार घटनाओं ने पूरे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हर नई घटना के साथ यह आशंका मजबूत होती जा रही है कि बांग्लादेश में धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा बढ़ रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि अपराधों को अक्सर सामान्य आपराधिक घटनाओं के रूप में दिखाया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है।
Jail Death of Hindu Singer | जेल में हिंदू गायक की मौत
इसी बीच एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। बांग्लादेश की एक जेल में बंद हिंदू गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता प्रोलॉय चाकी की इलाज के अभाव में मौत हो गई। 11 जनवरी की रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रोलॉय, प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजक और अभिनेता दिवंगत लक्ष्मी दास चाकी के बेटे थे। वे प्रतिबंधित आवामी लीग के जिला सांस्कृतिक सचिव भी रह चुके थे। परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि समय पर बेहतर इलाज मिलता, तो उनकी जान बच सकती थी।
Naogaon Incident | नहर में कूदने से युवक की मौत
समीर दास की हत्या से पहले भी एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आ चुकी थी। 6 जनवरी को बांग्लादेश के नाओगांव जिले में 25 साल के हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई थी। कुछ लोगों ने उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए पीछा किया। घबराकर जान बचाने के लिए मिथुन पास की नहर में कूद गया और लापता हो गया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब चार घंटे बाद गोताखोरों की मदद से मिथुन का शव नहर से बरामद किया गया। परिजनों का कहना है कि अगर उसे इस तरह दौड़ाया न जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। यह घटना भी अल्पसंख्यकों के बीच फैले डर को और गहरा कर गई।
Post-Coup Tension | सत्तापलट के बाद बढ़ी हिंसा
करीब 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में 2024 के सत्तापलट के बाद से हालात अस्थिर बने हुए हैं। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस्लामी संगठनों की सक्रियता बढ़ी है, जिसका सीधा असर अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ा है। हिंदू और सूफी मुस्लिम सहित अल्पसंख्यकों की आबादी देश में 10% से भी कम है।
बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने देशभर में बढ़ते हमलों पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। कई इलाकों में अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
India Reacts | भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई है। पिछले सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह बांग्लादेश की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा—“हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सख्ती से और तुरंत निपटा जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में इन हमलों को व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक कारण बताकर कमतर आंका जाता है, जिससे कट्टरपंथी तत्वों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना गहरी होती है।
हालांकि, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने भारत के आरोपों को “बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया” बताया है। लेकिन जमीनी हकीकत और लगातार हो रही घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं।
What It Means | इसका मतलब क्या है?
लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। हर नई हत्या न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ती है, बल्कि पूरे समुदाय के भीतर डर और अनिश्चितता को बढ़ाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह हिंसा केवल आंतरिक समस्या नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर डाल सकती है।
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
समीर कुमार दास की हत्या कहां हुई?
समीर कुमार दास की हत्या बांग्लादेश के फेनी जिले के दागनभुइयां इलाके में हुई, जहां उनका शव एक खेत में मिला।
23 दिनों में कितने हिंदुओं की मौत हुई है?
बीते 23 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े 7 लोगों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं।
प्रोलॉय चाकी कौन थे?
प्रोलॉय चाकी एक हिंदू गायक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता थे। वे प्रसिद्ध कलाकार लक्ष्मी दास चाकी के बेटे थे और जेल में इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई।
भारत ने इस पर क्या कहा है?
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बार-बार हो रहे हमलों को चिंताजनक बताया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की आबादी कितनी है?
बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की कुल आबादी 10% से भी कम मानी जाती है।




