विंध्य

एक वक़्त फिल्म में भीड़ का हिस्सा थें, आज रीवा के इस बेटे ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार जीतकर विंध्य का नाम किया रोशन

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:43 AM IST
एक वक़्त फिल्म में भीड़ का हिस्सा थें, आज रीवा के इस बेटे ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार जीतकर विंध्य का नाम किया रोशन
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रीवा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ध्रुव सिंह बरहदी के सुपुत्र विधान प्रताप सिंह ने सिने जगत का सबसे प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। मुंबई में आयोजित 20-21 फरवरी को मेगा इवेंट में अभिताभ बच्चन व अन्य सिने हस्तियों के साथ विधान को भी यह एवार्ड दिया गया।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा रीवा में ही हुई। 10वीं की पढ़ाई इंदौर के दौरान ये वहां चल रही किसी फिल्मी शूटिंग में भीड़ का हिस्सा थे। तभी फिल्म वालों की नजर इन पर पड़ी कुछ ऐटिंग कराने के बाद इनकी प्रतिभा को देख इन्हें मुंबई बुलाया गया। मां बाप को बिना बताए वे चोरी-चोरी मुंबई आते जाते रहे। पढ़ाई के बजाय फिल्मों में इनकी दीवानगी को देखकर इनके माता पिता ने वहीं रहने का निर्णय लिया व एक्टिंग कोर्स में दाखिला कराया।

पहला काम इन्हें महाराणा प्रताप सीरियल में मिला व कई सीरियल में काम करने के बाद इन्हे संतुष्टि नहीं मिली। इनकी दीवानगी बड़े पर्दे पर एटर की थी। कठिन संघर्ष के दौर में ये विभिन्न कंपनियों के ऐड करते रहे। उस समय यूथ में रूडी क्रेज चरम पर था। ये देश के हर कोने में रूडी के कम्पटीशन में भाग लेते गये व जीतते गये। जीतते-जीतते पुणे में आयोजित फाइनल मुकाबले में नहीं जीत पाये दर्शको व मीडिया ने इनके परफार्मेंस को जीतने वाले से बेहतर व पारशियल डिसिजन करार दिया।

वे अंग्रेजी फिल्म द लास्ट एम्परर में चन्द्रचूर्ण सिंह के साथ मुय रोल में रहे। इसके अलावा दो अन्य हिन्दी फिल्मों में इन्हें काम मिला लेकिन दुर्भाग्यवश ये फिल्में रिलीज नहीं हुई।अंग्रेजी फिल्म लंदन में रिलीज हुई। ये फिल्म में भारत में रिलीज नहीं होने के कारण बहुत संघर्ष में रहे फिर भी हिमत नहीं हारे वहीं डटे रहे । खाली टाइम में मोबाइल से ही विडियो फिल्म बनाने लगे। जिसमें स्क्रिपट लिखना व एटिंग दोनों स्वयं करते थे। इनकी फिल्मों को अच्छे रिस्पांस मिलने लगे। उत्साहित होकर इन्होंने अपनी स्वयं की कंपनी फरनर इन बॉलीवुड के नाम से बनाकर युटूब व फेस बुक हर महीने एक फिल्म बनाकर अपलोड करने लगे। उनके दो अंग्रेज दोस्त वरतोली व जानसंस मिले और सबने मिलकर फिल्में बनाई जो इतनी हिट हुई कि इनके व्यूवर्स लाखों से करोड़ों में हो गये। व ये छोटी फिल्मों के देश के प्रमुख किरदार बन गये। यू टूब व फेसबुक में इनकी फिल्मों की धूम मच गई।

इनकी फिल्मों की विशेषता कॉमेडी के साथ समाज के मोटीवेशन के लिए जानी जानें लगीं। उनके इस पुरस्कार को जीतने पर विंध्य के लोगों में हर्ष व्याप्त है। रामवनगमन समिति के प्रदेश संयोजक,वरिष्ठ कांग्रेस प्रदेश प्रतिनिधि संजीव मोहन गुप्त ने विधान सिंह को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जीतने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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