अध्यात्म

Vaishakh Month 2021 : वैशाख मास के समान कोई मास नहीं, दान पुण्य का है विशेष महत्व

Suyash Dubey
30 April 2021 8:57 AM GMT
Vaishakh Month 2021 : वैशाख मास के समान कोई मास नहीं, दान पुण्य का है विशेष महत्व
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Vaishakh Month 2021 Started Importance Of Vaishakh Month : हिन्दी महीने के अनुसार वर्ष का दूसरा महीना है वैशाख मास (Vaishakh Month) । इस महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। वही सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि हमारे स्कंद पुराण में कहा गया है कि वैशाख मास की तरह कोई मास नहीं होता है। वही सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान को शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। इसलिए इस मास में पूजा, दान, धर्म, पवित्र नदियांे में स्नान आदि का बहुत महत्व है। 

Vaishakh Month 2021 Started / Importance Of Vaishakh Month : हिन्दी महीने के अनुसार वर्ष का दूसरा महीना है वैशाख मास (Vaishakh Month) । इस महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। वही सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि हमारे स्कंद पुराण में कहा गया है कि वैशाख मास की तरह कोई मास नहीं होता है। वही सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान को शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। इसलिए इस मास में पूजा, दान, धर्म, पवित्र नदियांे में स्नान आदि का बहुत महत्व है।

वेद तथा धर्माचार्यों की माने तो वैशाख मास में खान-पान तथा पूजा-पाठ का विशेष माहत्व है। एक तो गर्मी का समय होने से डाक्टरों द्वारा भी भोजन करने में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई जाती है। वहीं यह बात वेदों में भी कहा गया है।

ऐसे करें दिन की शुरूआत

हमारे वैदिक आचार्यों द्वारा बताया गया है कि वैशाख मास में हमें प्रतिदिन सूर्याेदय के पूर्व उठना चाहिए। दैनिक क्रिया से निवृत्त होने के बाद सूर्योदय के समय स्नान करना चाहिए और बाद में अपने देवी देवताओं की पूजा अर्चना करनी चाहिए। भगवान का भजन करना अति पुण्य दायक होता है। ऐसा करने से हमें पुण्य प्राप्ति के साथ ही निरोगी काया प्राप्त होती है। इस समय कोरेाना का संक्रमण बढ़ा हुआ है। ऐसे में हमें घर में रहते हुए वैदिक रीति रिवाज के अनुसार दिनचर्या अपनानी चाहिए।

तीर्थों की यात्रा शुभफल दायक

कहा गया है कि इस वैशाख मास में तीर्थोें में जाना और पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही पूण्य दायक माना जाता है। लेकिन इस वर्ष कोरेाना जैसी महामारी के होने से कहीं आना-जाना निषेध है। लोगों को घर पर ही रहकर भगवान का ध्यान और पूजा-पाठ करनी चाहिए चाहिए।

क्या है मान्यता

वेद पुराणों के अनुसार इस मास को भगवान ब्रह्माजी ने सबसे उत्तम मास बताया है। कहा गया है कि इस मास में पूजा पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यह महीना वृक्षों में कल्पवृक्ष के समान और शिवजी, विष्णु को प्रसन्न करने वाला है।

दान का है विशेष महत्व

कहा गया है कि वैशाख मास में भीषण गर्मी पड़ने लगती हैं। इस मास में जलदान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त हो जाता है। हमें मानव, पशु, पछी तथा हर प्यासे जीव कोे जलदान करना चाहिए।
इसीलिए इस मास में लोग जगह-जगह प्याउ संचालित करवाते हैं। कई लोग तो आदमी लगाकर रेलवे तथा बस स्टैण्डों में यात्रियों के पास जाकर उन्हे पानी देने का इंतजाम करते हैं। इससे बहुत ही पुण्य प्राप्त होता है।

राजसूय यज्ञ के बराबर पुण्य

वैशाख मास में पानी का दान, राहगीर को छाया या आसरा देना चाहिए। वहीं धूप में यात्रा करने वालों को छाता का दान करना चाहिए। इसी तरह पंखा, जूते-चप्पल आदि का दान हमारे वेदों पुराणों में बताया गया है। कहा जाता है कि ऐसा करने से दस हजार राजसूय यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।

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