अध्यात्म

11 वीं सदी में बना मां शारदा का मंदिर है बहुत चमत्कारिक, जहां 12 महीने लगा रहता है भक्तों का तांता

bairagarh sharda mata temple
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सम्राट पृथ्वीराज चौहान और आल्हा के युद्ध के प्रमाण मिलते हैं, जिसमे सम्राट पराजित हुए थे।

बैरागढ़ शारदा देवी मंदिर कहाँ स्थित हैं: उत्तर प्रदेश के जालौन शहर से लगे ग्राम बैरागढ़ में स्थित माता शारदा देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस मंदिर के संबंध में कई तरह के लोग चर्चाएं व्याप्त है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण 11 वीं सदी में करवाया गया था। तो वही किंबदंतियो के अनुसार यह मंदिर अनादिकाल का बना हुआ बताया जाता है। इस मंदिर के संबंध में कहा गया है कि जो भी भक्त अपनी मनोकामना के साथ यहां उपस्थित होता है उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है।

कुंड से निकली थी माता की प्रतिमा

मां शारदा की प्रतिमा के संबंध में बताया गया है कि इनका उद्गम एक कुंड से हुआ है। माता की प्रतिमा अष्टभुजी है। साथ ही माता की मूर्ति लाल पत्थर से निर्मित प्रतीत होती है। मान्यता है कि मां शारदा की मूर्ति मंदिर के पीछे बने एक कुंड से निकली थी।

बताया जाता है बताया जाता है कि जिस कुंड से माता शारदा का उद्गम हुआ है वह कुंड मंदिर के ठीक पीछे स्थित है। कहा गया है कि इस कुंड में नहाने से सभी प्रकार के चर्म रोग खत्म हो जाते हैं। ऐसे श्रद्धालु है जो निरंतर 15 से 20 वर्षों से दोनों नवरात्रि के समय माता का दर्शन करने आते हैं।

1 माह चलता है मेला

मंदिर के पुजारी श्याम जी महाराज की मानें तो उनके द्वारा बताया गया है कि हर शारदे और चैत्र नवरात्रि में 1 महीने का मेला लगता है। मेले में हजारों तो कई बार विशेष तिथियों में लाखों की तादाद में श्रद्धालु मंदिर मे माता का दर्शन करने पहुंचते हैं। 1 महीने के लिए यहां विशाल मेला लगता है। जिसमें प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। आने वाले दिनों में मंदिर प्रबंधन कुछ और नई व्यवस्थाएं जोड़कर श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम बनाता है।

मैहर और बैरागढ़ में स्थित है शारदा माता का मंदिर

देश के उत्तर प्रदेश के बैरागढ़ और मध्य प्रदेश में सतना जिले के मैहर में माता शारदा के सिर्फ दो मंदिर है। दोनों स्थानों पर मां शारदा की भव्य प्रतिमा है। यह प्राचीन मंदिरों में से एक बताए जाते हैं। इनके संबंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि यहां माता शारदा की मूर्ति और मंदिर निर्मित है। काफी प्राचीन मंदिर और सिद्ध पीठ होने के कारण मां शारदा के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आल्हा से है कनेक्शन

बताया जाता है कि बैरागढ़ और मैहर माता का कनेक्शन वीर योद्धा आल्हा उदल से है। महोबा चंदेल राज वंश की राजधानी थी वहां के परमाल राजा के मंत्री वीर योद्धा आल्हा और उदल थे। जो मां शारदा के अनन्य भक्तों में से एक थे। मां शारदा का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त था कि युद्ध में आल्हा उदल को कोई हरा नहीं सकता है।

कहा जाता है कि 11 वीं सदी में बुंदेलखंड के तत्कालीन चंदेल राजा परमर्दिदेव जिन्हें राजा परमाल के नाम से भी जाना जाता था उनके यहां पृथ्वीराज चौहान ने अपनी सीमा विस्तार करने हमला कर दिया था। जिस पर चंदेलो के वीर मंत्री आल्हा और उदल ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित कर दिया था।

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