अध्यात्म

Makar Sankranti 2022 Date, Puja Muhurat: जानें कब है मकर संक्रांति 2022 और पूजा मुहूर्त

Viresh Singh Baghel
12 Jan 2022 7:53 AM GMT
Makar Sankranti 2022
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Makar Sankranti 2022; इस साल मकर संक्रांति पर बन रहे हैं महासंयोग। आइये जानते हैं पूजा मुहूर्त।

Makar Sankranti 2022: सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश करने तथा उत्तरायर्ण होने पर मकर संक्राति का पर्व मनाया जाता हैं। यह ऐसा पर्व है जिसे पूरे भारत के लोग मनाते है। फर्क इतना है कि मकर संक्रांति को कई राज्यों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है।

उत्तर भारत में इसे खिचड़ी या मकर संक्रांति कहते है। वहीं तमिलनाडु में इसे पोंगल और गुजरात में उत्तरायण कहते हैं। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान दान कर सूर्यदेव की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है।

इस तरह की है किवदंती

मकर संक्राति पर्व को लेकर जो किवदंती है उसके तहत इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक से असुरों का संहार किया था। भगवान विष्णु की जीत को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि महाभारत काल से मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है।

सूर्य के तेज कंम होती है ठंडक

वैज्ञानिकीय दृष्टि से मकर संक्रांति अंहम है। इस दिन से मौसम में बदलाव शुरू होता है और ठंड का प्रभाव कंम होने लगता है। सूर्य के प्रकाश में गर्मी और तपन बढ़ने लगती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य के उत्तरी गोलार्ध में जाने से ग्रीष्म ऋतु की शुरूआत होती है।

Makar Sankranti 2022 Date: 14 जनवरी को है मकर संक्रांति

हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। (Makar Sankranti 2022 Date, Puja Muhurat) इस बार संक्रांति 14 जनवरी, शुक्रवार को है।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट पर मकर राशि में गोचर करेंगे, इस दिन पुण्यकाल रहेगा।

महापुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महापुण्य काल में किया गया दान अक्षय फलदायी होता है तथा इस दौरान जाप का विशेष महत्व होता है।

सूर्य भगवान को अर्घ्य देना होगा फलदायी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान दान कर भगवान सूर्य देव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है। इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि इस दिन तांबे के लोटे से सूर्य भगवान को अर्घ्य देने से पद और सम्मान में वृद्धि होती है तथा शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है।

इस दिन मिलता है मोक्ष

पौराणिक कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन प्राण निकलने से व्यक्ति का पुनर्जन्म होने के बजाए सीधे ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि भीष्म पितामह ने 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहने के बाद प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण का इंतजार किए थें।

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