अध्यात्म

विवाह के समय निभाई जाती हैं कई रस्म, जिसमें छिपा है वैदिक और वैज्ञानिक कारण, आइये जानें?

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विवाह को हमारे हिंदू धर्म में सात जन्मों का बंधन बताया गया है।

विवाह को हमारे हिंदू धर्म में सात जन्मों का बंधन बताया गया है। विवाह संस्कार को पूर्ण करने में कई छोटी-छोटी रस्में साथ में मनाई जाती हैं। आखिर इन रस्मो का क्या महत्व है आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे। विवाह के दौरान निभाई जाने वाली रस्म में कई वैज्ञानिक कारण छुपे हुए हैं। आइए जाने रस्मों के महत्त्व और वैज्ञानिक कारण।

हल्दी उबटन की रस्म

हिंदू धर्म में विवाह के शुरूआत में वर और कन्या दोनों को हल्दी लगाई जाती है। इस रस्म को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। कहीं-कहीं इस हल्दी उबटन के नाम से भी जाना जाता है। धर्म के अनुसार हल्दी बहुत ही पवित्र वस्तु है। हल्दी लगाकर हम वैवाहिक जोड़े में बधने वालों के लिए मंगल की कामना करते हैं। वही वैज्ञानिकों का कहना है कि हल्दी लगाने से संक्रमण दूर होता है।

मेहंदी की रस्म

मेहंदी दुल्हन का विशेष श्रृंगार माना गया है। हर खुशी के मौके पर महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि मेहंदी की तासीर ठंडी होती है। इसे लगाने से मन शांत होता है। मानता है कि मेहंदी लगाने से वैवाहिक जीवन में प्रेम भाव बढ़ाता है।

घोड़ी पर चढ़ने की रस्म

कहा गया है कि दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर लड़की के घर तक ले जाया जाता है। इसका मुख्य कारण शायद ही किसी को पता हो। लेकिन बताया गया है कि घोड़ी जानवरों में सबसे चंचल और कामुक होती है। लड़के को घोड़ी पर बिठाने का मतलब है वह इस संकेत को समझें और स्वयं की भावनाओं पर नियंत्रण रखें।

वरमाला पहनाने की रस्म

सागर मंथन के बाद जब माता लक्ष्मी प्रकट हुई तो भगवान श्री नारायण ने माता लक्ष्मी को वरमाला पहनाकर स्वीकार किया था। तब से यह रस्म निरंतर चली आ रही है। इस रस्म का मतलब यह भी है कि वर और कन्या स्वेच्छा से स्वीकार कर रहे है।

सात फेरों का भी अपना महत्व है। अग्नि को साक्षी मानकर वर कन्या सात फेरे लेते हैं और एक दूसरे का जीवन भर साथ देने का वादा वादा करते हैं।

इसी तरह विवाह के समय दुल्हन की मांग भरी जाती। इसलिए किया जाता है कि सुहाग की निशानी सिंदूर को माना गया है।

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