अध्यात्म

Holika Dahan 2022 Shubh Muhurat: राजयोग के तीन दुलर्भ संयोग में जलेगी होलिका, इस तरह से है शुभ-मुहूर्त

Holika Dahan 2022 Shubh Muhurat
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Holika Dahan 2022 Shubh Muhurat: गली-चौराहों में तैयार हो रही दहन के लिए होलिका

Holika Dahan 2022 Shubh Muhurat / होलिका दहन शुभ मुहूर्त बताओ: रंगो का पर्व होली, होलिका दहन के साथ ही शुरू हो जाएगा। बुराई की प्रतीक होलिका दहन करने के लिए गली-चौराहों में उसे तैयार किया जा रहा है। जहाँ शुभ-मुहर्त में होलिका जलाई जाएगी। पंडितो के अनुसार इस बार होलिका दहन पर कई शुभ योग और दुर्लभ ग्रह स्थिति रहेगी, जिससे अगली होली तक का समय देश के लिए बहुत शुभ रहने वाला है। इस बार भद्रा दोष की वजह से होलिका दहन शाम की बजाय रात में करना शुभ रहेगा।

बन रहे ये तीन दुलर्भ संयोग

पुरी के ज्योतिषाचार्यो का कहना है कि पहली बार ऐसा हो रहा है जब गजकेसरी, वरिष्ठ और केदार नाम के तीन राजयोग के साथ वसंत ऋतु में गुरुवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन होगा। साथ ही फाल्गुन महीने का स्वामी शनि और वसंत ऋतु का स्वामी शुक्र दोनों मित्र हैं और एक ही राशि में रहेंगे। ऐसी स्थिति आज तक कभी नहीं बनी। ये अपने आप में एक दुर्लभ संयोग है। जो 17 मार्च को बन रहा है।

बहुत ही शुभ है होलिका दहन

इस वर्ष की होली में जिस तरह से राजयोग बन रहे है। उससे देश के लिए यह होली शुभकारी है। बताते है कि इस वर्ष व्यवसाय अच्छा रहेगा तो टैक्स से सरकार को भी लाभ होगा। देश में बीमारियों का संक्रमण कम होगा। तो हर क्षेत्र में इस वर्ष बढ़ोत्तरी का योग बन रहा है।

इस तरह से होगा होलिका दहन

बताते है होली की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना अच्छा होगा, यानि की शाम 6 से 7.30 तक होली की पूजा की जा सकती है, लेकिन होलिका दहन भद्रा दोष खत्म होने के बाद करना चाहिए। इस बार भद्रा रात करीब 1.22 तक रहेगा। इसलिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 1.22 से सुबह 6.28 तक रहेगा।

इस तरह की है किवदंती

होलिका दहन को लेकर बताया जाता है कि राजा हिरणाकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवान भक्त थें और वे स्दैव भगवान भक्ति की बात करते थें, जबकि उनके पिता हिरणाकश्यप इसका विरोध कर रहा था। उसे लगा कि बेटे के इस भक्ति से क्षेत्र में लोग उसकी पूजा छोड़कर भगवान की करने लगेगे। जिसके चलते वह कई बार प्रहलाद को भगवान भक्ति के लिए यतना देता रहा। जब वे नही माने तो अपना प्रभुत्वं बनाने के लिए वह अपनी बहन होलिका का सहारा लिया।

बताते है कि होलिका को वरदान था कि आग उसे नही छू पाएगी, जिसके चलते होलिका भगवान भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर लकड़ियों के ढेर में बैढ गई। जिसके बाद उसमें आग लगा दिया गया। भक्त प्रहलाद भगवान का नाम जपते हुए अग्नि के बीच बैठे रहे और आग उन्हे छू नही पाई, जबकि वरदानी होलिका ने बुराई का साथ दिया तो वह आग में जलकर भस्म हो गई। बताते है कि तब से प्रति वर्ष बुराई रूपी होलिका दहन किया जा रहा है।

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