अध्यात्म

Hartalika Teej 2021: इस बार हरतालिका तीज पर 14 वर्ष बाद बन रहा रवियोग, जानिए शुभ मुहूर्त और कथा

Suyash Dubey
6 Sep 2021 8:32 AM GMT
Hartalika Teej 2021
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Hartalika Teej 2021:14 वर्ष बाद हरतालिका तीज (Hartalika Teej) पर रवियोग बनने जा रहा है। जानिए शुभ मुहूर्त और हरतालिका तीज की कथा।

हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) : भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज व्रत किया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार 9 सितंबर को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज पर 14 वर्ष बाद रवियोग बन रहा है। बताया जा रहा है की इस अद्भुत योग में व्रत और पूजन करने से सुहागिन महिलाओं की सभी मुरादें पूरी होगीं।

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) व्रत महत्व :


यह व्रत भाद्र शुक्ल तृतीया को किया जाता है। सुहाग चाहने वाली स्त्रियों को इस दिन शंकर-पार्वती मूर्ति बनाकर पूजन करना चाहिये। सुन्दर वस्त्रों कदली, स्तम्भों से गृह को सजाकर नाना प्रकार के मंगल गीतों से रात्रि जागरण करना चाहिये। इस व्रत को करने वाली स्त्रियाँ पार्वती के समान सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं

Hartalika Teej 2021 : इस बार बन रहा है रवियोग


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल हरतालिका तीज पर रवियोग 14 वर्ष बाद चित्रा नक्षत्र के कारण बन रहा है। यह 9 सितंबर दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। जानकारी के मुताबिक हरतालिका तीज का अति शुभ समय शाम 5 बजकर 16 मिनट से शाम को 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। बात करें वहीं शुभ समय की तो यह 6 बजकर 45 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक है।

हरतालिका तीज कथा (Hartalika Teej Katha)

भगवान शिव माता पार्वती से बतातें हुए। शिव जी पार्वति जी से कहते हैं- एक बार जब तुमने हिमालय पर्वत पर जाकर गंगा किनारे, मुझको पतिरूप में पाने के लिए कठिन तपस्या प्रारम्भ की थी उसी घोर तपस्या के समय नारद जी हिमालय के पास गये तथा कहा कि विष्णु भगवान आपकी कन्या के साथ विवाह करना चाहते हैं, इस कार्य के लिए मुझे भेजा है। यह नारद की बनावटी बात को तुम्हारे पिता ने स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात् नारद जी विष्णु के पास गये और कहा कि आपका विवाह हिमालय ने पार्वती के साथ करने का निश्चय कर लिया है। आप इसकी स्वीकृति दें । नारद जी के जाने के पश्चात् पिता हिमालय ने तुम्हें भगवान विष्णु के साथ निश्चित किया गया विवाह सम्बन्ध बतलाया।

यह अनहोनी बात सुनकर तुम्हें अत्यनत दुःख हुआ और तुम जोर-जोर से विलाप करने लगीं। एक सखी के द्वारा विलाप का कारण पूछे जाने पर तुमने सारा वृत्तान्त कह सुनाया कि मैं इधर भगवान शंकर के साथ विवाह करने के लिए कठिन तपस्या प्रारम्भ कर रही हूँ इधर हमारे पिता जी विष्णु के साथ सम्बन्ध करना चाहते हैं ? यदि तुम मेरी सहायता कर सको तो बोलो । अन्यथा मैं प्राण त्याग दूंगी।

सखी ने सत्त्वना देते हुए कहा- मैं तुम्हें ऐसे वन में ले चलूंगी कि तुम्हारे पिता को पता न चलेगा। इस प्रकार तुम सखी सम्मति से घने जंगल में गईं। इधर तुम्हारे पिता हिमालय इधर-उधर खोजने पर जब तुम्हें घर में न पाये तो बहुत चिंतित हुए क्योंकि नारद से विष्णु के साथ विवाह करने को मान लिए थे। वचन भंग की चिंता ने उन्हें मूर्छित कर दिया तब सभी पर्वत यह तथ्य जानकर तुम्हारी खोज में लग गये ।

उधर सखी सहित तुम सरिता किनारे की एक गुफा में मेरे 'नाम पर तपस्या करने लगीं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया को उपवास रहकर तुमने सिकता का शिव लिंग संस्थापित करके पूजन तथा रात्रि जागरण भी किया। तुम्हारे इस कठिन तप व्रत ने मेरा आसन आन्दोलित कर दिया इससे मुझे तुरन्त तुम्हारे पूजन स्थल पर आना पड़ा। तुम्हारी मांग तथा इच्छा के अनुसार तुमको मुझे अर्धांगिनी रूप में स्वीकार करना पड़ा । तत्पश्चात् मैं तुरन्त कैलाश पर्वत पर चला आया। प्रातः बेला में जब तुम पूजन सामग्री नदी में छोड़ रही थीं उसी समय हिमालय राज उस स्थान पर पहुँच गये। वे तुम दोनों को देखकर रोते हुए पूछने लगे-बेटी ! तुम यहाँ कैसे आ गईं।

तब तुमने विष्णु विवाह वाली कथा सुना दी । तुम्हारी टेक की पूर्ति कराते हुए वे तुम्हें घर बुला लाये तब शास्त्र विधि से तुम्हारा मेरे साथ विवाह हुआ। हरितालिका व्रत के नामकरण के सम्बन्ध में भी मैं बता रहा हूँ। सखी द्वारा हरी जाने पर इसका नाम (हरत+आलिका) पड़ गया। शंकर जी ने पार्वती से यह भी बताया कि जो स्त्री इस व्रत को परम श्रद्धा से करेगी उसे तुम्हारे समान ही अचल सुहाग मिलेगा ।

नोट- इस लेख में दी गई जानकारी की सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह विभिन्न माध्यम जैसे पौराणिक कथाओं, धार्मिक ग्रंथों से संग्रहित करके आप तक पहुंचाई गई हैं। इसलिए किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले स्वयं के विवेक से निर्णय लें अथवा जानकार की सलाह लें।

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