
Ekadashi Vrat 2026 — Shattila Ekadashi कब है? Puja Vidhi & Muhurat

Ekadashi Vrat 2026 में माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। सनातन धर्म में यह एकादशी अत्यंत शुभ, पवित्र और फलदायी मानी गई है।
शास्त्रों के अनुसार इस दिन —
- तिल का दान
- तिल से हवन
- तिल युक्त स्नान
- तिल से भोजन
- तिल का लेप
- तिल से तिलांजलि
इन छह कर्मों के कारण इसे “षट-तिला” कहा गया है।
ज्योतिषाचार्यों के मतानुसार, इस व्रत से —
- पापों का क्षय
- दरिद्रता का नाश
- आर्थिक समृद्धि
- मन की शांति
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा
प्राप्त होती है।
षटतिला एकादशी 2026 कब है — 13 या 14 जनवरी?
अक्सर लोगों में भ्रम रहता है कि व्रत किस दिन रखा जाए। पंचांग के अनुसार:
शास्त्रानुसार — जब एकादशी तिथि प्रातःकाल में मिलती है, व्रत उसी दिन रखा जाता है।
Ekadashi Vrat 2026 Shubh Muhurat
द्वादशी तिथि में, समय पर पारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
षटतिला एकादशी व्रत के नियम
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- स्नान कर साफ वस्त्र पहनें
- मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज त्यागें
- क्रोध, असत्य, अपशब्द और निंदा से बचें
- फलाहार या निर्जल व्रत करें (शक्ति अनुसार)
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जप करें
- अगले दिन द्वादशी में पारण करें
षटतिला एकादशी पूजा विधि – Step by Step
षटतिला एकादशी व्रत कथा (संक्षेप)
कथा में एक ब्राह्मणी तिल दान न करने के कारण दरिद्र हो गई। भगवान ने संकेत दिया — वह तिल दान करे। जैसे ही उसने तिल दान किया, उसके जीवन में सुख-समृद्धि लौट आई।
तिल दान का महत्व
शास्त्र कहते हैं:
जो व्यक्ति षटतिला एकादशी में तिल दान करता है — उसके पाप नष्ट होते हैं और घर में धन-धान्य बढ़ता है।
व्रत के प्रमुख लाभ
- पापों का क्षय
- आर्थिक परेशानी में कमी
- नकारात्मकता दूर
- स्वास्थ्य में सुधार
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त
FAQs
ध्यान दें: पंचांग और स्थानीय समयानुसार सूक्ष्म अंतर संभव — अंतिम निर्णय अपने पंडित/पंचांग से मिलाकर करें।




