अध्यात्म

चतुर्थी का व्रत मनोकामनाओं की करता है पूर्ति, जानिए ऐसा क्या है इस उपवास में

चतुर्थी का व्रत मनोकामनाओं की करता है पूर्ति, जानिए ऐसा क्या है इस उपवास में
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Vinayak Chaturthi 2022: माह की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि का व्रत मनोकामना को पूरा करने वाला होता है.

Vinayak Chaturthi 2022: विघ्न को दूर करने और मनवंछित फल पाने के लिए आज हर कोई उपवास एवं पूजा-अर्चना में लगा रहता है। उन्ही में से माह में दो बार पड़ने वाले चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। जानकार बताते है कि इस व्रत को करने से मनोकामना की पूर्ति होती है। जून माह में चतुर्थी तिथि 3 जून को पड़ रही है।

विंघ्रहर्ता है गणेश

भगवान गणेश विंघ्रहर्ता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित रहता है। यही वजह है कि गणेश भक्त इस व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ रखते है। बताते है कि जो भी इस व्रत को सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान के साथ रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

ऐसे हुआ मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती जी नर्मदा नदी के किनारे एक बार बैठे हुए थें। पार्वती ने चौसर खेलने की इच्छा जताई। अब हुआ ये इस खेल में विजय किस की होगी। इसका निर्णय करने के लिए भगवान शिव ने वहां मौजूद तिनके से एक बालक को तैयार कर दिया। उन्होने पूछा कि इस खेल में जीत किसकी होगी। बालक ने कहा की जीत भोले बाबा की होगी।

माता पार्वती ने दिया श्राप

खेल शुरू हुआ और तीनों बार माता पार्वती विजयी हुई। जिस पर बालक को उन्होने श्राप दे दिया। जिसके प्रभाव से वह चल फिर नही सकता था। बालक के बार-बार आग्रह करने पर माता पार्वती ने बताया कि नागकन्याएं जब यहा आएगी तो वे तुम्हे विनायक चतुर्थी के व्रत का विधान बताएंगी। एक वर्ष बाद नागकन्याएं वहां पहुंची और उन्होने बालक को इस व्रत के सबंध में बताया।

गणेश जी ने किया श्राप मुक्त

बालक ने विनायक चतुर्थी का व्रत विधि विधान के साथ किया। जिसके प्रभाव से गणेश जी प्रकट हुए और उन्होने वरदान मांगने को कहा। जिस पर बालक ने कहा कि वह पैदल अपने माता-पिता के दर्शन करने कैलाश पर्वत पर जाना चाहता है। उन्होने कहा तथास्तु और बालक श्राप से मुक्त हो गया।

पार्वती ने भी किया व्रत

श्राप से मुक्त होने के बाद बालक शिव-पार्वती का दर्शन करने के लिए पर्वत में पहुंचा। उन्होने श्राप मुक्ति का कारण पूछा। जिस पर विनायक चतुर्थी का व्रत बालक ने बताया। शिव के आदेश पर पार्वती ने इस व्रत को किया और कार्तिक को माता-पिता की याद आई। जिस पर वे मिलने के लिए कैलाश पर्वत पहुँच गए।

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