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SINGRAULI : कठिन परिस्थितियों में जूझने की दृढ़ इच्छा शक्ति से बेटी ने निभाई दोहरी जिम्मेदारी

RewaRiyasat.Com
Saroj Kumar Tiwari
30 Apr 2021

सिंगरौली। यदि कठिन परिस्थितियों में जूझने की हमारे अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो फिर हर संकट पीछे छूट जाता है। कुछ इसी तरह की परिस्थिति कोरोना महामारी की दूसरी लहर में निर्मित है जहां चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ सेवा भाव, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। संक्रमण से प्रभावित होने वाले लोगो में सेवा में लगे चिकित्सक और उनके परिजन भी शामिल हैं फिर भी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

आपको बता दें कि कुछ इसी तरह का वाकया सिंगरौली की एक बेटी का सामने आया है जहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर की द्वितीय वर्ष स्नातकोत्तर की छात्रा डाक्टर साधना वर्मा को कोविड वार्ड में सेवाएं देने के लिए नियुक्त किया गया है। उसी दौरान सिंगरौली में निवासरत उनके पिता राजकुमार वर्मा 55 वर्ष व माता शीला देवी वर्मा 53 वर्ष कोरोना से संक्रमित हो गये।

डॉक्टर साधना वर्मा के माता-पिता की देखभाल के लिए सिंगरौली में कोई नहीं था, ऐसे में उनके समक्ष दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गयी कि आखिर कोविड.19 से जूझ रहे माता-पिता की देखरेख कैसे की जाए। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य व संयम का परिचय देते हुए उन्होंने अपने माता-पिता को जबलपुर बुलाने का निर्णय लिया। यहां आने के बाद उन्होंने मेडिकल के कोविड वार्ड में एडमिट कर अन्य मरीजों की सेवा के साथ माता पिता के प्रति अपने दायित्व को भी निभाया।

मिशाल पेश कर रहे कोरोना योद्धा

अब साधना के माता-पिता स्वस्थ होकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं तथा अब घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। ऐसे कर्मवीरों की कर्तव्यनिष्ठा व समर्पण से ही जबलपुर कोरोना को परास्त करने की ओर बढ़ रहा है। मेडिकल काॅलेज की छात्रा ऐसा पहला उदाहरण नहीं है। इसके पूर्व भी और भी चिकित्सक और चिकित्सीय सेवा में जुटे अन्य कोरोना योद्वा इस तरह की मिसाल पेश कर चुके हैं।

 

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