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SATNA : राम और रामायण असाधारण श्रद्धा के केंद्र

RewaRiyasat.Com
Saroj Kumar Tiwari
22 Apr 2021

सतना। हिमालय से कन्याकुमारी तक ही नहीं अपितु सुदूर पूर्व के कई देशों में भी राम और रामायण असाधारण श्रद्धा के केंद्र हैं। राम प्रतिनिधित्व करतें हैं मानवीय मूल्यों की मर्यादा का। रामकथा के सैकड़ों संस्करण हैं जिनके लेखकों को श्रीराम के ईश्वरत्व पर पूर्ण विश्वास था लेकिन उन सब ने श्रीराम का चित्रण एक मनुष्य के रूप में ही किया। नीति, न्याय और नेतृत्व का चरमोत्कर्ष हैं भगवान श्री राम। भारत में राम एक ऐसा नाम है जो अभिवादन या नमस्कार का पर्यायवाची हैं।

यह बातें भारतीय मजदूर संघ सतना के श्रमिक नेता विनोद द्विवेदी ने कही। रामनवमीं के अवसर पर हिंदू पर्व समन्वय समिति सतना के तत्वावधान में सनातन धर्म को मानने वाले भारतीय मजदूर संघ सतना के श्रमिक नेता विनोद द्विवेदी परिवार के साथ रामफूल कुटी नई बस्ती में सूर्य कुलभूषण, मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव पिता, गुरु, सूर्य, गौ पूजा, प्रकृति वंदना कर मनाया गया।

श्रीराम जन्मोत्सव पर तपोभूमि में पसरा रहा सन्नाटा

कोरोना कफ्र्यू के कारण इस वर्ष भी चित्रकूट के धाम आम भक्तों के लिए पूरी तरह से बंद रहे। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमीं बुधवार को शांति और कोरोना कर्फ्यू के बीच जिले भर में मनाई गई। भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में जहां प्रतिवर्ष श्रीराम नवमीं के अवसर पर दो से तीन लाख श्रद्धालुओं का जनमानस उमड़ता था और मंदाकिनी में स्नान कर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए जाते थे और कामदगिरी की परिक्रमा कर मनोकामनाएं मांगी जाती थी लेकिन इस वर्ष भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा।

पुजारियों ने की स्तुति

कामदगिरी प्राचीन मुखारविंद मंदिर में पुजारियों ने आधा दर्जन मंदिर प्रबंधन के लोगों के साथ की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर भगवान कामतानाथ को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया और स्तुति कर भगवान रामचंद्र का जन्मोत्सव मनाया गया। पुजारियों द्वारा भगवान कामतानाथ से कोरोना रूपी राक्षस से जनमानस की रक्षा करने की प्रार्थना की। श्रीराम वंदना के साथ विश्व व्यापी महामारी कोरोना से पूरे देश वासियों की रक्षा की कामना भगवान राम से की गई।

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