रीवा

रीवा पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च, शहर के संवेदनशील क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरों की नजर

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:40 AM IST
रीवा पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च, शहर के संवेदनशील क्षेत्रों पर सीसीटीवी कैमरों की नजर
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रीवा। अयोध्या मामले पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर मंदिर बनाने का फैसला सुनाया। साथ ही मुस्लिम पक्ष को कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को दी है। सरकार को तीन माह में ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण का प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दायर निर्मोही अखाड़े की याचिका भी खारिज कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला दिया है। शनिवार की सुबह जैसे ही फैसला आया वैसे ही सुरक्षा के मद्देनजर रीवा पुलिस व प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट नजर आया। सुबह से ही शहर के सभी चौराहों में पुलिस बल तैनात हो गया था। खुद कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, एसपी आबिद खान सहित भारी पुलिस बल ने पूरे शहर में फ्लैग मार्च निकाला।

सायरन बजाते पुलिस की गाड़ियां पूरे शहर में दौड़ती रही। पूरे शहर का भ्रमण कर उपद्रवियों को संदेश देने का प्रयास किया। पुलिस विभाग ने पूरे शहर कीसुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बढ़ा दी है। साइबर टीम सोशल मीडिया पर नजर बनाए रही ताकि कहीं भी भड़काऊ मैसेज ग्रुपों में सेंड न हो सके। वहीं सिविल ड्रेस में करीब एक सैकड़ा पुलिसकर्मियों को उतारा गया है जो लगातार संवेदनशील मोहल्लों में भ्रमण कर स्थिति का जायजा ले रहे है। कलेक्टर व एसपी ने आम लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा कोई भी कृत्य न करें जिससे किसी दूसरे की भावनाएं आहत हो। इस तरह की गतिविधियों से पुलिस सख्ती से निपटेगी।

यह रहा खास... 70 साल तक अयोध्या मसले को लेकर कानूनी लड़ाई चली। 40 दिन तक लगातार सुनवाई के बाद शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

इन्होंने सुनाया ऐतिहासिक फैसला जस्टिस न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, जस्टिस न्यायामूर्ति एस. ए. बोबडे , जस्टिस न्यायामूर्ति अशोक भूषण, जस्टिस न्यायामूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस न्यायामूर्ति एस. अब्दुल नजीर।

फैसले के प्रमुखबिंदु - रामजन्मभूमि न्यास को मिलेगी विवादित जमीन विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को दिया गया है।

- मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा जमीन पर दावा साबित करने में मुस्लिम पक्ष नाकाम रहा। कोर्ट ने माना कि विवादित स्थल पर पहले मंदिर था, लेकिन इस बात के कहीं सबूत नहीं मिले कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। एएसआई की रिपोर्ट से भी इस बात के सबूत नहीं मिले हैं।

- मुस्लिम पक्ष को मिलेगी 5 एकड़ जमीन विवादित जमीन पर रामजन्मभूमि न्यास का हक है, मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन दूसरी जगह दी जाएगी।

- निर्मोही अखाड़े का दावा हुआ खारिज उच्चतम न्यायालय ने निर्मोही अखाड़े का जमीन पर मालिकाना हक को लेकर किया गया दावा खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है।

- 1949 में रखी गईं मूर्तियां मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने फैसले में पढ़ा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं थीं।

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