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रीवा। केंद्र सरकार इन दिनों विंध्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के रहन-सहन के स्तर की पड़ताल करा रही है। इस दौरान ग्रामीणों से घर-घर जाकर 16 बिदुंओं पर जानकारी ली जा रही है। सर्वे के दौरान यह भी पता किया जा रहा है कि गांवों में कौन कितनी बार एक माह में गैस की टंकी भराता है। उसने बीमा कराया है या नहीं? घर में किस बल्ब का प्रयोग किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस सर्वे में भोजन-पानी से जुड़ा कोई सवाल शामिल नहीं किया गया है।
यह सर्वे 14 अप्रैल तक चलेगा। केंद्र सरकार सर्वे के बाद ईज ऑफ लिविंग इंडेस 2020 जारी करेगी। इस सर्वे के आधार पर ही सरकार लोगों का जीवनस्तर सुधारने के लिए योजना तैयार कर उसके लागू करेगी। खाद्य ससिडी में नाम है या, राशन कार्ड का नंबर दर्ज कराएं। इस सर्वे का डाटा मध्यप्रदेश सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। दरअसल, इसमें केंद्र की योजनाओं को ही शामिल किया गया है। इस कारण पिछले 15 सालों में भाजपा शासनकाल के समय इन योजनाओं का निचले स्तर तक पहुंचना या न पहुंच पाने का डाटा भी कांगे्रस सरकार को काम आ सकता है। बीते साल शहरी इलाकों में हुआ था सर्वे पिछले साल मोदी सरकार ने शहरों में ईज ऑफ लिविंग इंडेस के लिए सर्वे किया था, तब सौ स्मार्ट सिटी वाले स्थान सहित अन्य शहरों को चुना गया था। इस बार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र को चुना है। मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास विभाग के अमले को इस कार्य में जुटाया गया है।




