रीवा

TRS कॉलेज रीवा न्यूज़: देश भर के विद्वानों ने बताया- हमारी लोक परंपराएं कैसे बदल रही हैं समाज की तस्वीर

Aaryan Puneet Dwivedi
9 March 2026 5:21 PM IST
Updated: 2026-03-10 08:33:41
TRS कॉलेज रीवा न्यूज़: देश भर के विद्वानों ने बताया- हमारी लोक परंपराएं कैसे बदल रही हैं समाज की तस्वीर
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रीवा के TRS कॉलेज में 'समाज के विकास में लोक साहित्य की भूमिका' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित। देश भर के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

TRS College Rewa: लोक साहित्य की भूमिका पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का सफल आयोजन

रीवा: शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा (मध्य प्रदेश) के हिंदी विभाग द्वारा “समाज के विकास में लोक साहित्य की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन 7 मार्च 2026 को किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के निर्देशन में संपन्न हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

उद्घाटन सत्र में मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद “समाज के विकास में लोक साहित्य की भूमिका” विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मिला वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. विनोद विश्वकर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की।

लोक साहित्य समाज का जीवंत दस्तावेज: डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला

बीज वक्ता के रूप में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा से पधारे डॉ. लक्ष्मीकांत चंदेला ने कहा कि लोक साहित्य जीवंत होता है और मनुष्य के जीवन के हर पड़ाव से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि लोक साहित्य समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

जनता की भावनाओं का साहित्य है लोक साहित्य

विशिष्ट वक्ता के रूप में शासकीय कन्या महाविद्यालय मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़) से आए डॉ. रामकिंकर पांडेय ने कहा कि जनता के चित्तवृत्तियों का साहित्य ही लोक साहित्य कहलाता है। वहीं सारस्वत अतिथि डॉ. दिनेश कुशवाह ने कहा कि लोक साहित्य जनमानस की मौखिक परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाली सहज और स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।

लोक साहित्य समाज को जोड़ने का माध्यम

मुख्य अतिथि के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय आनंद (गुजरात) से आए डॉ. दिलीप मेहरा ने कहा कि लोक साहित्य समाज को एक धागे में बांधने का कार्य करता है। यह समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देशभर के विद्वानों ने रखे विचार

कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए कई विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस दौरान डॉ. कृष्ण बिहारी राय, डॉ. महेंद्र प्रजापति, डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली से आए विद्वानों सहित कई शिक्षाविदों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में डॉ. अखिलेश शुक्ला, डॉ. मनीष शुक्ला, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. बीके सिंह, डॉ. बीके शर्मा, डॉ. वंदना त्रिपाठी, डॉ. राजकुमार कुशवाहा, डॉ. शशि मिश्रा, डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्सना द्विवेदी, डॉ. गुलरेज अहमद, डॉ. सुरेंद्र चौधरी, डॉ. अंकुल पांडेय, डॉ. विनोद मिश्रा, डॉ. कुमुद श्रीवास्तव, डॉ. प्रियंका कमल, डॉ. राजेंद्र वर्मा, डॉ. अश्वनी द्विवेदी, डॉ. सत्येंद्र पटेल, डॉ. आरती सोनी, डॉ. अल्पना मिश्रा, डॉ. ज्योति पांडेय, डॉ. आशुतोष शुक्ला, डॉ. प्रियंका पांडेय, डॉ. प्रवीण विश्वकर्मा और डॉ. राहुल विश्वकर्मा सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

संचालन और आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप विश्वकर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सर्वेश कुमार पाण्डेय ने किया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, शोधार्थी, शिक्षाविद, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.

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