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सामाजिक सौहार्द बिगाड़ रहें इन्फ्लुएंसर: चाहे अविनाश तिवारी हो या मनीष पटेल, समाज में तनाव पैदा करने से बाज नहीं आते; शैलू भी पीछे नहीं

- आपत्तिजनक वीडियो को लेकर कई थानों में शिकायत दर्ज
- धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत होने का आरोप
- वायरल कंटेंट से समाज में तनाव और टकराव
- पुलिस और प्रशासन सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में
रीवा/विंध्य: सोशल मीडिया आज सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह जनमत निर्माण और सामाजिक प्रभाव का एक बड़ा मंच बन चुका है। लेकिन इसी ताकत के साथ एक गंभीर खतरा भी जुड़ा है — बिना जिम्मेदारी के बनाए जा रहे वायरल कंटेंट। विंध्य क्षेत्र में हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के वीडियो ने धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई, जिसके बाद थानों में शिकायतें दर्ज कराई गईं।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर कल्चर: अवसर या खतरा?
बीते कुछ वर्षों में यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स ने आम युवाओं को स्टार बना दिया है। लाखों फॉलोअर्स और करोड़ों व्यूज के साथ इंफ्लुएंसर्स की बात अब सीधे समाज तक पहुंचती है। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है, जब कंटेंट की गुणवत्ता से ज्यादा वायरल होने की चाह प्राथमिकता बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ इंफ्लुएंसर्स संवेदनशील विषयों — जैसे धर्म, जाति, महिलाएं और परंपराएं — को हल्के अंदाज में पेश कर रहे हैं, जिससे समाज में गलत संदेश और तनाव फैल रहा है।
हर वायरल वीडियो मनोरंजन नहीं होता, कुछ कंटेंट समाज को बांटने का काम भी करता है।
हालिया विवाद
केस-1: हाल ही में यूट्यूबर मनीष पटेल के एक वीडियो को लेकर विरोध तेज हो गया। आरोप है कि वीडियो में एक विशेष समुदाय की महिलाओं को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया। वीडियो वायरल होते ही विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
इससे पहले भी मनीष पटेल के वीडियो फौजियों की पत्नियों, पुजारियों और अन्य वर्गों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। कई मामलों में एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है।
पहले भी विवादों में रहे अन्य इंफ्लुएंसर्स
केस-2: अविनाश तिवारी द्वारा भगवान शिव के स्वरूप में आपत्तिजनक गानों पर प्रस्तुति, नाई समाज की महिलाओं पर टिप्पणी और एक फिल्म में क्षत्रिय समाज को नकारात्मक रूप में दिखाने पर विरोध हुआ।
केस-3: गायक और इंफ्लुएंसर सुधीर पांडेय पर टीआरएस कॉलेज की छात्राओं को लेकर आपत्तिजनक शब्दों के आरोप लगे। विरोध के बाद उन्हें सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी।
केस-3: शैलू शर्मा द्वारा संजय गांधी अस्पताल परिसर में रील बनाना और अन्य विवादित कंटेंट के बाद मामला बढ़ा, हालांकि माफी के बाद विवाद शांत हुआ।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे विवाद?
डिजिटल विशेषज्ञों का कहना है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म विवादित और भावनात्मक कंटेंट को तेजी से आगे बढ़ाते हैं। इससे कुछ क्रिएटर्स जानबूझकर सीमाएं लांघते हैं, ताकि ज्यादा लाइक, शेयर और फॉलोअर्स मिल सकें। हालांकि ऐसे कंटेंट क्रिएटर कम ही हैं, लेकिन इनके कंटेंट वाकई इम्पैक्टफुल होते हैं। इनके अलावा भी विंध्य में कई ऐसे इंफ्लुएंसर हैं, जिनके कंटैंट वाकई सराहनीय होते हैं और विंध्य समेत पूरे देश को गौरवान्वित करते हैं।
प्रशासन और समाज की प्रतिक्रिया
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सोशल मीडिया पर अब डिजिटल निगरानी और शिकायतों की गंभीर जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स पर FIR क्यों हो रही है?
क्योंकि कुछ वीडियो धार्मिक, सामाजिक या महिला वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले माने गए हैं।
क्या वीडियो डिलीट करने से मामला खत्म हो जाता है?
नहीं, डिजिटल साक्ष्य मौजूद रहते हैं और पुलिस जांच जारी रख सकती है।
क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी का मामला है?
अभिव्यक्ति की आज़ादी है, लेकिन कानून और सामाजिक मर्यादा के भीतर।
सोशल मीडिया पर कौन निगरानी करता है?
पुलिस, साइबर सेल और प्लेटफॉर्म्स की मॉडरेशन टीमें।
इंफ्लुएंसर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदार भाषा और तथ्यों की जांच जरूरी है।
Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




