रीवा

प्राकृतिक सुन्दरता और इतिहास को समेटे हुए है रीवा का 'क्यूटी फोर्ट', प्रशासनिक उपेक्षा से खो रहा वजूद

प्राकृतिक सुन्दरता और इतिहास को समेटे हुए है रीवा का क्यूटी फोर्ट, प्रशासनिक उपेक्षा से खो रहा वजूद
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Rewa Keoti Fort: रीवा जिले के सिरमौर तहसील में स्थित क्यूटी की गढ़ी जर्जर होने के साथ ही गिरने के कगार पर है

Rewa Keoti Fort: यू तो रीवा जिला पर्यटन के क्षेत्र में काफी धनी रहा है। रियासत काल में भी यहां के प्रकृति सौन्दर्यता को बनाए रखने के लिए राजपरिवार उस स्थान पर शानदार आशियान बना कर उसे संरक्षित करने का काम करते रहे है। उनमें से एक है क्यूटी के वॉटर फॉल से लगी हुई क्यूटी की गढ़ी।

जो कि यह गढ़ी प्रकृति की सुन्दरता और इतिहास को समेटे हुए है, लेकिन शासन-प्रशासन की उपेक्षा के चलते अब यह गढ़ी अपना वजूद खोती जा रही है और यह भव्य इमारत देख रेख के अभाव में लगातर जर्जर होने के साथ ही गिरने की कगार पर पहुच रही है।

पुरातत्व विभाग लगा रखा है अपना बोर्ड

क्यूटी की गढ़ी के प्रवेश द्वार पर ही पुरातत्व विभाग का बड़ा से बोर्ड लगा हुआ है। यू कहे कि यह गढ़ी अब पुरातत्व विभाग के आधीन है, लेकिन जिस तरह से खूबसूरत भव्य भवन अब गिरने की कगार पर है उससे बचाने के लिए कोई कदम शासन-प्रशासन के द्वारा नही उठाया जा रहा है।


लगते रहे है मेले

क्यूटी की गढ़ी का महत्व सदैव रहा और यहां पर प्रति वर्ष मकर सक्राति, बसंत पंचमी आदि पर्वो पर भव्य मेला लगता रहा है। जिसमें दूर-दराज से व्यापारी पहुचते रहे है तो वही विंध्य क्षेत्र के लोग इस गढ़ी की अनुपम छठा को देखने के साथ ही मेले का आनंद उठाते रहे है।

आज भी क्यूटी की गढ़ी और उससे लगे हुए भव्य जल प्रपात की सुन्दरता को देखने के लिए न सिर्फ आसपास के लोग बल्कि विंध्य क्षेत्र सहित यूपी और बिहार के पर्यटक यंहा पहुचते है।

असमाजिक तत्वों का अड्डा बनी गढ़ी

शासन-प्रशासन की उपेक्षा के चलते जंहा यह भव्य भवन अब गिर रहा है वही यह गढ़ी अब असमाजिक तत्वों के हवाले है। यहां हर समय नशेड़ी एवं चोर-उच्चके सक्रिय रहते है। जिससे यहां भय का वातावरण निर्मित रहता है। यही वजह है कि पर्यटकों का मोह भी अब भंग होने लगा है।



ऐसी है इसकी खूबसूरती

क्यूटी की गढ़ी का निर्माण कार्य 1500 ईसवी में राजा परमल देव के द्वारा करवाया गया था। ऐसा कुछ उल्लेख यहाँ मिलता है। इसमें भव्य प्रवेश द्वार है जिसमें खूबसूरत नक्काशी की गई है। यहां पत्थर पर निर्मित कलाकृतियां देखने में मिलती है। इस किलें में एक आयताकार कक्ष है, जिसका उपयोग शायद दीवाने खास के रूप में किया जाता रहा होगा।


क्यूटी की गढ़ी में दोनों तरफ बुर्ज भी बनाए गए थें, जो सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इन बुर्ज से सेना आसपास के किलें की निगरानी किया करती थी। पूरे किले में बहुत सारें कमरें देखने को मिलते है, जो अब खंडहर में तबदील हो गए हैं। इतना ही नही यंहा बहुत सारी प्राचीन चीजें है, जिनका उपयोग प्राचीन समय में होता था।

गढ़ी से दिखता है प्रकृति की सुन्दरता का पूरा नजरा

शासद इस गढ़ी का निर्माण यंहा के प्रकृति सुंदरता के हिसाब से किया गया था, दरअसल इसके पिछले भाग में ऊपर से क्यूटी जलप्रपात की पूरी घाटी देखने में मिल जाती है। यहां से जल प्रपात का अद्रभुद नजारा साफ देखा जा सकता है।


गढ़ी के पिछले भाग से क्यूटी जलप्रपात, भैरव बाबा का मंदिर और राम जानकी का मंदिर भी देख सकते हैं। यह जगह बहुत अच्छी है और प्राकृतिक के साथ-साथ ऐतिहासिक भी है, जो पर्यटन के हिसाब से बेहतर है। यंहा अक्सर लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने पहुचते है। वही पर्यटकों के हिसाब से इसके पिछले भाग में जालिया लगा दी गई है, ताकि कोई भी इस घाटी में गिर न जाए।


फिल्मों में दिखाए जाते है यहाँ के सीन

क्यूटी की गढ़ी को फिल्म जगत ने भी महत्वं दिया हैं। इस गढ़ी में बिदिया-बन्दूक सहित हिन्दी फिल्में फिल्माई गई है तो कुछ वर्ष पूर्व बघेली फिल्म में भी इस गढ़ी के अनुपम दृष्यों को शामिल किया गया है।


बताते है कि इस गढ़ी में अंग्रेजों ने जब हमला बोला तो यहां भंयकर यु़द्ध हुआ था और अंग्रेजों के छक्के छूट गए थें। आजादी के क्रांति की ज्यावाला जलाने वाले क्रांतिकारी ठाकुर रणमत सिंह को पकड़ने के लिए अंग्रेजी सेना लगातार लगी हुई थी और वे क्यूटी गढ़ी में अपने साथियों के साथ ठहरे हुए थें, जहां अग्रेजों को इसकी भनक लग गई और अंग्रेज अफसर अपनी सेना के साथ क्यूटी की गढ़ी में धावा बोल दिए थें। रणमत सिंह और यहां की सेना ने अंग्रेजों को मोहतोड़ जबाब दिया था।

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