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रीवा में नए नोटों की किल्लत! वेडिंग सीजन में 10-20 रुपए की गड्डियों के लिए बढ़ी मारामारी

🔴 शादी सीजन शुरू, शगुन और नेग के लिए बढ़ी मांग
🔴 बैंक शाखाओं में छोटे मूल्य के नोटों का स्टॉक खत्म
🔴 बाजार में 500–800 रुपए ज्यादा लेकर बेची जा रही गड्डियाँ
Rewa New Notes Crisis | शादी सीजन शुरू होते ही 10-20 के नोटों की मारामारी
रीवा में शादी का मौसम शुरू हो गया है और इसी के साथ छोटे मूल्य के 10 और 20 रुपए के नए नोटों की जबरदस्त मांग बढ़ गई है। शहरभर में लोग बैंक शाखाओं के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन छोटे नोटों की उपलब्धता बेहद सीमित है। कई बैंक शाखाओं में 10 और 20 की गड्डियाँ बिल्कुल नहीं मिल रही हैं, जबकि 50, 100 और 500 के नए नोट पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं।
शादी वाले घरों में नेग, न्योछावर और शगुन के लिए ताज़ा नोटों की जरूरत होती है। इसके कारण लोग इस समय छोटे नोटों को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन बैंकों में इनकी कमी से परेशानी और बढ़ गई है।
Wedding Dates Rush | 22 नवंबर से 10 दिसंबर तक शादियों का पीक सीजन
रीवा में 22 नवंबर से शादी का मुख्य दौर शुरू हो रहा है, जो 30 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक दूसरा चरण आएगा। शहर में शादी हॉल, गार्डन, कैटरिंग, टेंट, लाइटिंग और सजावट की एडवांस बुकिंग तेजी से हो रही है।
इसी के साथ शादी वाले परिवार छोटे नोटों की गड्डियाँ जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बैंक ग्राहकों को कह रहे हैं कि छोटे नोटों का स्टॉक सीमित है। वहीं, खाताधारकों द्वारा पासबुक दिखाकर भी मांग की जा रही है, लेकिन बैंक कर्मचारी मजबूरी बता रहे हैं।
Black Market Activity | छोटे नोटों का "प्रीमियम रेट" पर बाजार में व्यापार!
शहर में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कुछ लोग 500 से 800 रुपए अतिरिक्त लेकर 10 और 20 रुपए की गड्डियाँ दे रहे हैं। यानी 1000 रुपए के नोटों की गड्डी 1500–1800 रुपए में बेचने तक की बातें सामने आ रही हैं।
कुछ बैंक अधिकारियों के मुताबिक छोटे नोटों का स्टॉक पहले से ही कम था और शादी सीजन की डिमांड अचानक बढ़ने से सप्लाई टूट गई है। वहीं, जान-पहचान वालों के जरिए “सीक्रेट सर्विस” के रूप में छोटी गड्डियाँ उपलब्ध कराए जाने की चर्चा भी है।
Why Small Notes Demand High? | शगुन और न्योछावर में 5, 10, 20 के नोटों का उपयोग
भारतीय पारंपरिक विवाह में शगुन और नेग के तौर पर छोटे मूल्य के नए नोट देना शुभ माना जाता है। लिफाफे हों, न्योछावर हो या सगाई का शगुन—हर जगह 10 और 20 के ताज़ा नोटों का ही उपयोग होता है। यही वजह है कि छोटे नोटों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है।
Business Side Story | टेंट और कैटरिंग वालों पर दबाव बढ़ा
श्रीराम इवेंट मैनेजमेंट के संचालक नवीन गुप्ता मोदनवाल ने बताया कि वेडिंग इवेंट बुक कराने आने वाले लोग उनसे भी छोटे नोटों की व्यवस्था के बारे में पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा—
“नए नोटों की मांग बहुत ज्यादा है। शादी वाले परिवार चाहते हैं कि बुकिंग के साथ छोटे नोट भी मिल जाएं। ऐसे में प्रशासन को शादी सीजन में अतिरिक्त नोट उपलब्ध कराना चाहिए।”
Expert View | नए नोट ऊंचे दाम पर बेचना अपराध
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र गहरवार ने कहा कि RBI की क्लीन नोट पॉलिसी के तहत बैंक नए नोट बाजार में उतारते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नए नोटों को ऊंची कीमत पर बेच रहा है, तो यह ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि बैंकों को चाहिए कि शादी सीजन को ध्यान में रखते हुए 5, 10 और 20 रुपए के नोटों का स्टॉक बढ़ाएं, क्योंकि देश में लगभग 70% लेनदेन छोटे मूल्य के नोटों से होता है।
Public Demand | रीवा नागरिकों की प्रशासन से अपील
शहरवासियों का कहना है कि हर साल नवंबर-दिसंबर में छोटे नोटों की मांग बढ़ती है, इसलिए इस अवधि में बैंकों को अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध करानी चाहिए।
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FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. रीवा में छोटे नोटों की कमी क्यों हो रही है?
शादी सीजन के कारण 10 और 20 रुपए के नोटों की मांग अचानक बढ़ गई है, जबकि बैंक शाखाओं में स्टॉक कम है।
2. क्या बैंक 10 और 20 रुपए की गड्डियाँ दे रहे हैं?
कई बैंक शाखाओं में छोटे मूल्य के नोट उपलब्ध नहीं हैं। केवल 50, 100 और 500 के नोटों का वितरण हो रहा है।
3. क्या नए नोट महंगे दामों पर बेचने की अनुमति है?
नहीं, यह ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत अपराध है।
4. शगुन के लिए कौन से नोटों की मांग सबसे ज्यादा होती है?
10 और 20 रुपए के ताज़ा नोटों की मांग सबसे अधिक रहती है।
5. क्या शादी सीजन में बैंकों की सप्लाई बढ़ेगी?
बैंक अधिकारियों के अनुसार, जरूरत के आधार पर छोटे नोटों की सप्लाई बढ़ाई जा सकती है।
Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




