रीवा

ब्लैक सूट-बूट में चाय बेचता है रीवा का LLB Chai Wala

ब्लैक सूट-बूट में चाय बेचता है रीवा का LLB Chai Wala
x
Rewa's LLB Chai Wala: रीवा के LLB चायवाला से दो चीज़ें सीखने को मिलती हैं. काम छोटा-बड़ा नहीं होता और दूसरा रोजगार सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं होता

LLB Chai Wala Rewa: चाय ऐसी चीज़ है ब्रो... के नाम सुनकर ही चुस्की लेने की क्रेविंग होने लगती है. वो कहावत भी तो है 'जहां चाय है वहीं राय है''. (ऐश्वर्या राय नहीं भाई सलाह-मशवरा वाली राय). जब चाय के बिज़नेस की बात होती है तो सबसे पहले MBA Chai Wala का नाम सामने आता है. फिर नागपुर की 'Dolly Ki Tapari' जो छपरी बनकर चाय बेचता है और बिहार की ग्रेजुएट चाय वाली, ये सभी लोग चाय बेचकर बमफाड़ कमाई करते हैं. अब रीवा में भी नए चाय वाला की एंट्री हुई है. नाम है LLB Chai Wala जो बाकायदा बैरिस्टर वाले गेटअप में ब्लैक सूट-बूट पहने चाय बेचता है.


एलएलबी चाय वाला रीवा

LLB Chai Wala Rewa: MBA, PSC, PHD चायवाला के बाद पेश है LLB Chai Wala. इन भाईसाब का नाम है उज्ज्वल मिश्रा। उज्ज्वल रोज सुबह उठता है. बढ़िया ब्लैक कोट, ब्लैक शूज, व्हाइट शर्ट डालकर रेडी होता है. लेकिन कोर्ट में वकालत करने नहीं अपनी दुकान में चाय बेचने के लिए निकल जाता है.


उज्ज्वल का सीन भी पढ़े-लिखे बेरोजगार जैसा ही था, लेकिन उज्ज्वल ने रोजगार के लिए सरकार को कोसने से बेहतर खुद का काम शुरू करना जरूरी समझा। और पब्लिक डिमांड में आकर चाय की दुकान का स्टार्टअप डाल दिया। पहले तो नाथ-रिश्तेदारों ने खूब मजे लिए, ज्ञान दिया 'बेटा पढ़े लिखे हो ये सब काहे मचाए हो, इज्जत वाली नौकरी करो लाला'' लेकिन उज्ज्वल लगा रहा. और आज देख लीजिये LLB चाय वाला अख़बार की सुर्ख़ियों में ट्रेंड कर रहा है.

कहां है LLB चाय वाला का चायालय?

बंदे ने अपने स्टार्टअप का नाम LLB चाय वाला रखा है तो उस दुकान को चाय की टपरी नहीं 'चायालय' कहना ठीक होगा। रीवा सिटी के यूनिवर्सिटी रोड में लाइब्रेरी के ठीक बगल में आपको वकील टाइप का आदमी चाय बेचते मिल जाएगा। लोग कहते हैं कि LLB चाय वाला चाय के साथ न्याय करता है. मतलब दूध- मसाला डालने में ग्राहकों की डिमांड की अवमानना नहीं करता।

उज्ज्वल मिश्रा यानी LLB Chai Wala से चाय पियो या न पियों लेकिन दो बात सीख लो

पहली बात - काम छोटा-बड़ा मोटा-पतला नहीं होता, काम काम होता है ब्रो

दूसरी बात - पढ़ा लिखा बेरोजगार का ठप्पा सिर्फ सरकारी नौकरी से नहीं मिटता, आप कोई भी काम करो क्या फर्क पड़ता है?

Next Story