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रीवा में अवैध कॉलोनाइजरों पर कलेक्टर प्रतिभा पाल का बड़ा एक्शन: 'शांति रॉयल स्टेट' के संचालक समेत 3 पर FIR के आदेश, नदी किनारे अतिक्रमण पर कसा शिकंजा

Aaryan Puneet Dwivedi
25 March 2026 9:55 AM IST
रीवा में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: कलेक्टर के निर्देश पर FIR और बुलडोजर
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रीवा: कलेक्टर के निर्देश पर अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

रीवा में अवैध कॉलोनियों और बीहर नदी पर अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई! कलेक्टर ने 'शांति रॉयल स्टेट' संचालक समेत 3 कॉलोनाइजरों पर FIR के निर्देश दिए।

रीवा: जिला प्रशासन ने अवैध कॉलोनी विकसित करने, बिना अनुमति प्लॉट-फ्लैट बेचने और बीहर नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिभा पाल ने दो अलग-अलग मामलों में 'शांति रॉयल स्टेट' के संचालक सहित 3 कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक 4 सदस्यीय टीम का गठन भी किया गया है।


पहला मामला: बीहर नदी किनारे 'शांति रॉयल स्टेट' और संचालक पर FIR

कार्रवाई का पहला मामला मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर और शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसके संचालक उपेंद्र सिंह हैं। प्रशासन की जांच में यह बात सामने आई कि उन्होंने बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस लिए ही बीहर नदी के किनारे "शांति रॉयल स्टेट" नामक कॉलोनी विकसित कर दी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नदी के बाएं तट पर मिट्टी और मलबा डालकर उसके अपवाह क्षेत्र (natural flow path) को बाधित करने की कोशिश की गई, जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के मानकों का सीधा उल्लंघन है। इसके अलावा, मढ़ी और करहिया क्षेत्र के नालों का स्वरूप बदलकर उन्हें संकरा कर दिया गया है, जो पर्यावरण और शहर के ड्रेनेज सिस्टम के लिए खतरनाक है।

दूसरा मामला: करहिया में अवैध प्लॉटिंग, सेटेलाइट इमेज ने खोली पोल

दूसरा मामला करहिया क्षेत्र का है, जहाँ शाहीन बेगम और अमरीन अंसारी द्वारा अवैध रूप से प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण किया जा रहा था। प्रशासन की जांच में पाया गया कि यह पूरा निर्माण कार्य बिना किसी लाइसेंस और विकास अनुज्ञा (development permission) के चल रहा था।

इस मामले में प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। सेटेलाइट इमेज के जरिए यह पुष्टि हुई कि जिन खसरों को सरकारी रिकॉर्ड में कृषि भूमि बताया गया था, वहां वास्तविकता में मकान बने हुए हैं। इन लोगों पर भी बीहर नदी के अपवाह क्षेत्र में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने का गंभीर आरोप है।

कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान

रीवा प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि बिना कलेक्टर की अनुमति के कॉलोनी निर्माण पूरी तरह अवैध है। कॉलोनी विकास नियम 2014 के तहत यह कार्रवाई की गई है। दोनों ही मामलों में मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 2013 की धारा 61-घ के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सजा: मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
  • जुर्माना: सजा के साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

4 सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम करेगी जांच

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इन दोनों गंभीर मामलों की जांच के लिए चार सदस्यीय एक उच्च स्तरीय टीम गठित की है। इस टीम में शामिल हैं:

  • एसडीएम हुजूर
  • नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी
  • लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी
  • विद्युत यांत्रिकी शाखा के अधिकारी
इस टीम को एक माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

तहसीलदार को तीन दिन का अल्टीमेटम

जांच टीम के अलावा, कलेक्टर ने तहसीलदार को भी त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्हें तीन दिन के भीतर भू-अभिलेख अपडेट करके प्रस्तुत करने और एक सप्ताह के भीतर जमीन पर कब्जे की रिपोर्ट देने को कहा गया है। इस कड़ी कार्रवाई से रीवा के अवैध कॉलोनाइजरों और नदी-नालों पर कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है।

भू-माफियाओं के खिलाफ खुली जंग

रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल की यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि शहर के विकास को बाधित करने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की यह जंग जारी रहेगी।

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Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.

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