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रीवा : माफियाओं व अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहे जंगल, कैसे होगी प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 6:44 AM GMT
रीवा : माफियाओं व अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहे जंगल, कैसे होगी प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा
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रीवा : यदि जंगलों को बचाने का प्रयास नहीं किया गया तो मानव जीवन अनेक प्रकार के संकटों से घिरता जाएगा। जंगलों का दायरा घटने के कारण देश

रीवा : माफियाओं व अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहे जंगल, कैसे होगी प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा

रीवा : यदि जंगलों को बचाने का प्रयास नहीं किया गया तो मानव जीवन अनेक प्रकार के संकटों से घिरता जाएगा। जंगलों का दायरा घटने के कारण देश भर में प्रदूषण बढ़ रहा है। कई शहरों में प्रदूषण जनजीवन के लिए घातक होता जा रहा है। देखा जा रहा है कि रीवा जिले के सिरमौर परिक्षेत्र अंतर्गत तराई क्षेत्र जवा, डभौरा अंतर्गत जंगली पेड़ों की कटाई बेरोकटोक चल रही है। जंगल में नजर दौड़ाई जाय तो चारो तरफ पेड़ों ठूठ देखे जा सकते हैं। अगर 10-15 साल पहले का आकलन किया जाय तो जंगल काफी हरे-भरे दिखते थे लेकिन आज बहुत कुछ बदल चुका है। रोजाना जंगलों की कटाई तेजी से की जा रही है। वहीं जंगल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी माफियाओं से मिलीभगत कमाई करने में जुटे हैं।

फर्नीचर के लिए बेशकीमती लकड़ी की कटाई

पेड़ों की कटाई लगातार की जा रही है। बेरोक.टोक कटाई के चलते लकड़ी माफिया जंगलों में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। पेड़ों के अलावा वन क्षेत्र में पत्थर उत्खनन का काम भी किया जा रहा है। जंगल की बेशकीमती लकड़ी की फर्नीचर के लिए मांग के चलते लकड़ी माफिया कटाई की ताक में रहता है। बताया जाता है कि लकड़ी माफिया पनप रहा है। पिछले कई दिन से जंगल में पेड़ों की कटाई चल रही है।

पौधरोपरण के लिए हर साल किए जाते हैं लाखों रुपये खर्च

क्षेत्र के जंगलों में पौधरोपण के लिए वन विभाग अधिकारियों को टारगेट दिया जाता है। वहीं अधिकारी पौधारोपण में लाखों रुपए खर्च कर पौधे रोपे जाते हैंए लेकिन उनकी देखरेख और सुरक्षा को लेकर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा जंगलों में खड़े पेड़ों की देखरेख वन विभाग द्वारा की जाए तो जंगल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

रीवा : माफियाओं व अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहे जंगल, कैसे होगी प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा

वन क्षेत्र में नहीं थम रहा अवैध उत्खनन

वन क्षेत्र से पत्थरए फर्शी व रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। पिछले एक माह से जंगल में बिना परमिशन से चल रही खदानों से पत्थर के बोल्डर अवैध रूप से निकाले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन की शिकायत के बाद भी विभागीय स्तर पर खनन माफिया के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाती है। जिससे माफिया लगातार सक्रिय बने हुए हैं।

हजारो हेक्टेयर में फैला है जंगल

क्षेत्र के लोग जंगल में धड़ल्ले से पेड़ काट रहे हैं। हजारो हेक्टेयर में फैली इस रेंज में लकड़ी काटने वालों को वन विभाग की कार्रवाई का डर नहीं रहता है। ऐसे में जंगल में पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि पेड़ कटने की शिकायतें रेंजर देवेंद्र अहिरवार से कई बार की जा चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी रेंजर साहब इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं। जिससे वन माफिया के साथ रेंज के अधिकारी.कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका वनवासी समुदाय के लोगों ने जताई है।

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