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रीवा में बड़ी प्रशासनिक सख्ती: कलेक्टर प्रतिभा पाल का 5 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

मुख्य बातें
- रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पांच अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय सीमा में आवेदन निपटान न करने पर कार्रवाई।
- प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योजनाओं में अत्यंत कम प्रगति पर जवाब तलब।
- तीन दिवस में संतोषजनक उत्तर न मिलने पर जुर्माना और वैधानिक कार्रवाई संभव।
रीवा जिले में प्रशासनिक सख्ती साफ नजर आ रही है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम और विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पाए जाने पर पांच अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत जुर्माने सहित आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय समय में आवेदन का निराकरण अनिवार्य है। साथ ही केंद्र और राज्य की प्रमुख योजनाओं में लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने जवाब मांगा है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्रवाई
जिला प्रशासन की समीक्षा में यह सामने आया कि कई आवेदन निर्धारित समय सीमा में निराकृत नहीं किए गए। इस पर कलेक्टर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी मनगवां हेमंत शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया। विभिन्न आवेदनों का समय पर निराकरण नहीं होने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है।
इसी प्रकार जनपद पंचायत नईगढ़ी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदन में कार्रवाई न करने पर नोटिस दिया गया है। वृद्धावस्था पेंशन जैसी संवेदनशील योजना में देरी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है, क्योंकि यह सीधे बुजुर्ग हितग्राहियों से जुड़ा विषय है।
योजनाओं में कम प्रगति पर जवाब तलब
जिले में विभिन्न विकास और स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान भी कई विभागों का प्रदर्शन अपेक्षा से काफी कम पाया गया। सहायक संचालक मत्स्य अनिल सिंह को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लक्ष्य के विरुद्ध अत्यंत कम उपलब्धि पर नोटिस जारी किया गया है।
इसी क्रम में जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग केके पाण्डेय को मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना में अत्यंत कम प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इसके अलावा सहायक संचालक उद्यानिकी एनएस प्रजापति को सूक्ष्म लघु खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में कम उपलब्धि पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्रशासन का संदेश: जवाबदेही से समझौता नहीं
जिला स्तर पर यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को तय समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि अधिकारी समय पर कार्य नहीं करते हैं तो अधिनियम में दंडात्मक प्रावधान भी हैं।
सरकारी योजनाओं में कम प्रगति का सीधा असर हितग्राहियों पर पड़ता है। स्वरोजगार, पेंशन, मत्स्य और खाद्य उद्योग जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई हैं। ऐसे में लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम उपलब्धि प्रशासन की चिंता का विषय बनी है।
रीवा प्रशासन अपडेट
- 5 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
- लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सख्त चेतावनी
- प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योजनाओं की समीक्षा में कम प्रगति उजागर
- 3 दिन में जवाब नहीं तो जुर्माना और आगे की कार्रवाई संभव
हितग्राहियों पर संभावित प्रभाव
यदि समय पर आवेदन निराकृत नहीं होते या योजनाओं में प्रगति धीमी रहती है, तो इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। पेंशनधारियों को भुगतान में देरी, स्वरोजगार योजनाओं के आवेदकों को आर्थिक सहायता न मिलना और उद्योग उन्नयन योजनाओं में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
प्रशासन की इस सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि विभागीय अधिकारी लक्ष्य पूर्ति और समयबद्ध सेवाओं को प्राथमिकता देंगे। इससे भविष्य में लंबित आवेदनों की संख्या घटने और योजनाओं की गति बढ़ने की संभावना है।
तीन दिन की समय सीमा क्यों महत्वपूर्ण
कारण बताओ नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह अवधि प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए तय की जाती है। संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में संबंधित अधिनियमों के तहत जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
जिला स्तर पर इस तरह की समीक्षा और कार्रवाई को शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Join WhatsApp Channel Follow on Google Newsअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लोक सेवा गारंटी अधिनियम क्या है?
यह अधिनियम नागरिकों को तय समय सीमा में शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर दंड का प्रावधान है।
किन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है?
मनगवां नगर पालिका, नईगढ़ी जनपद पंचायत और मत्स्य, आदिम जाति कल्याण तथा उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी हुआ है।
यदि अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं देते तो क्या होगा?
तीन दिन में उचित स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर अधिनियम के तहत जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
कौन सी योजनाओं में कम प्रगति पाई गई?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और सूक्ष्म लघु खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में कम उपलब्धि दर्ज की गई।
इस कार्रवाई का आम जनता पर क्या असर होगा?
प्रशासनिक सख्ती से उम्मीद है कि लंबित आवेदन तेजी से निपटेंगे और योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचेगा।
Rewa Riyasat News
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