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रीवा केंद्रीय जेल से 9 आजीवन कारावास के बंदी रिहा: गणतंत्र दिवस पर मिली आज़ादी, एक को जुर्माने के कारण फिर दो साल की जेल

Rewa Riyasat News
26 Jan 2026 5:51 PM IST
रीवा केंद्रीय जेल से 9 आजीवन कारावास के बंदी रिहा: गणतंत्र दिवस पर मिली आज़ादी, एक को जुर्माने के कारण फिर दो साल की जेल
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रीवा केंद्रीय जेल से गणतंत्र दिवस पर 9 आजीवन कारावास के बंदियों को रिहा किया गया। सभी ने 20 साल की सजा पूरी की थी। जुर्माना न भरने पर एक कैदी को 2 साल और जेल में रहना होगा।
  • रीवा केंद्रीय जेल से 9 आजीवन कारावास के बंदी रिहा
  • सभी ने 20 साल की सजा व शासन की छूट पूरी की
  • गणतंत्र दिवस पर मिली आज़ादी
  • जुर्माना न देने पर एक कैदी को 2 साल और जेल

Republic Day Special – जेल से आज़ादी का पल

रीवा में गणतंत्र दिवस के मौके पर एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय जेल रीवा से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया। ये सभी बंदी हत्या और अन्य गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए थे, लेकिन सजा की अवधि और शासन से मिली छूट को मिलाकर उन्होंने 20 साल पूरे कर लिए थे।

राज्य शासन के जेल विभाग के निर्देश पर यह रिहाई की गई। जेल प्रशासन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया कानून के तहत, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप पूरी की गई।

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रीवा केंद्रीय जेल से कौन-कौन हुए रिहा? देखें पूरी लिस्ट

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मध्य प्रदेश की रीवा केंद्रीय जेल से अच्छे आचरण के आधार पर कई बंदियों को रिहा किया गया है। रिहाई के वक्त जेल परिसर में भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले।

रिहा किए गए बंदियों के नाम (जिलेवार):

  • 📍 रीवा: कालू उर्फ शहीद, तरन्नुद्दीन उर्फ बदल द्विवेदी
  • 📍 सिंगरौली: प्रेम सिंह, सुरेंद्र यादव, जियालाल साकेत
  • 📍 अनूपपुर: हरीलाल, लीलाधर उर्फ लीलू, राहुल केवट
  • 📍 शहडोल: विदेशी

परिजनों की आँखों में दिखे ख़ुशी के आँसू

इन सभी बंदियों को 26 जनवरी 2026 को जेल से मुक्त किया गया। रिहाई के समय जेल के बाहर उनके परिजनों का हुजूम उमड़ा था, जहाँ वर्षों बाद अपनों से मिलने की खुशी और चेहरों पर नई उम्मीद साफ नजर आ रही थी।

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नियमों के तहत समीक्षा – कैसे मिली रिहाई

जेल अधीक्षक एस.के. उपाध्याय के अनुसार, शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत पात्र बंदियों की सजा की समीक्षा की जाती है। जिन बंदियों ने निर्धारित अवधि पूरी कर ली और जिनका आचरण संतोषजनक पाया गया, उन्हें रिहाई के लिए योग्य माना गया।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया किसी एक दिन में नहीं होती, बल्कि इसमें कानूनी परीक्षण, रिकॉर्ड जांच और शासन स्तर पर अनुमति शामिल होती है। इसके बाद ही रिहाई का आदेश जारी किया जाता है।

एक कैदी को क्यों मिली 2 साल की अतिरिक्त सजा?

हालांकि इस रिहाई के बीच एक मामला ऐसा भी रहा, जिसने सबका ध्यान खींचा। नंदीलाल बैगा (शहडोल) को आजीवन कारावास से तो मुक्त कर दिया गया, लेकिन उस पर कोर्ट द्वारा लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना जमा नहीं हो सका।

कानून के मुताबिक, जुर्माना अदा न होने की स्थिति में वैकल्पिक सजा भुगतनी होती है। इसी कारण नंदीलाल बैगा को 27 जनवरी 2026 से दो साल की अतिरिक्त सजा और काटनी होगी। यानी उम्रकैद से राहत मिलने के बावजूद वह फिलहाल जेल में ही रहेगा।

साल-श्रीफल के साथ विदाई – भावुक पल

रिहाई के समय जेल प्रशासन ने सभी बंदियों को साल और श्रीफल भेंट कर शुभकामनाओं के साथ विदा किया। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि वर्षों तक सलाखों के पीछे रह चुके लोगों के लिए नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक भी थी।

गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर मिली इस आज़ादी से बंदियों और उनके परिवारों में खुशी और भावुकता का माहौल देखने को मिला। कई परिवारजन जेल गेट पर अपने प्रियजनों को गले लगाते नजर आए—कुछ आंखों में आंसू थे, तो कुछ में भविष्य की उम्मीद।

सजा से सुधार तक – जेल नीति का उद्देश्य

जेल अधीक्षक एस.के. उपाध्याय का कहना है कि शासन की यह नीति केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य बंदियों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना भी है।

उन्होंने बताया कि जिन बंदियों का आचरण अच्छा पाया जाता है, जो जेल के भीतर श्रम, शिक्षा और अनुशासन का पालन करते हैं, उन्हें शासन की छूट योजनाओं के तहत रिहाई का अवसर मिलता है। इससे समाज में दोबारा लौटने वाले व्यक्ति के भीतर नया जीवन शुरू करने की भावना पैदा होती है।

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❓ FAQs – पाठकों के सवाल

किन शर्तों पर उम्रकैद के बंदियों को रिहा किया गया?

जिन बंदियों ने कम से कम 20 वर्ष की सजा पूरी कर ली थी और जिनका आचरण संतोषजनक पाया गया, उन्हें शासन की छूट नीति के तहत रिहा किया गया।

क्या सभी उम्रकैद के कैदी स्वतः रिहा हो जाते हैं?

नहीं। हर कैदी के मामले की व्यक्तिगत समीक्षा होती है। अपराध की प्रकृति, जेल में व्यवहार और कानूनी स्थिति के आधार पर ही रिहाई संभव होती है।

नंदीलाल बैगा को और जेल क्यों काटनी होगी?

उस पर लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना जमा नहीं हो सका। कानून के अनुसार जुर्माना न भरने पर वैकल्पिक सजा दी जाती है, इसलिए उसे दो साल और जेल में रहना होगा।

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