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3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण: चतुर्ग्रही योग से बढ़ेगा वैश्विक तनाव? जानें राशियों पर असर और सूतक काल

मुख्य बिंदु
- 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण, होली उत्सव के बीच खगोलीय घटना
- सूर्य-मंगल-राहु-बुध की युति से बनेगा चतुर्ग्रही योग
- Rewa के ज्योतिषाचार्यों ने कई राशियों के लिए चेतावनी दी
- ग्रहण स्पर्श 3:20 बजे, मध्य 5:05 बजे, मोक्ष 6:47 बजे
Rewa में होली के उल्लास के बीच 3 मार्च को साल का दूसरा और महत्वपूर्ण खग्रास चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण विशेष माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में 17 फरवरी को कुंभ राशि में पंचग्रही संयोग के बीच सूर्य ग्रहण लगा था। ठीक 15 दिन बाद चंद्रग्रहण का लगना ग्रहों की स्थिति को और संवेदनशील बना रहा है। स्थानीय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग वैश्विक और व्यक्तिगत स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।
आध्यात्मिक संकेत
चतुर्ग्रही योग के साथ लगने वाला यह खग्रास चंद्रग्रहण मानसिक ऊर्जा, सामाजिक संतुलन और वैश्विक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है। साधना, जप और दान का विशेष महत्व रहेगा।
चतुर्ग्रही योग से क्यों बढ़ी संवेदनशीलता
ज्योतिषाचार्य प्रभाकर त्रिपाठी के अनुसार ग्रहण के समय सिंह राशि का स्वामी सूर्य, शनि की राशि कुंभ में राहु, मंगल और बुध के साथ स्थित रहेगा। सूर्य-मंगल-राहु-बुध की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। यह योग उग्र प्रभाव देने वाला माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य आशीष गर्गाचार्य के अनुसार सूर्य-मंगल-राहु की युति अग्नि तत्व को प्रबल करती है। पारंपरिक मान्यताओं में इसे हिंसा, अग्निकांड, प्राकृतिक असंतुलन और वैश्विक राजनीति में तनाव की स्थितियों से जोड़ा जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सकारात्मक ऊर्जा के लिए साधना और संयम आवश्यक है।
राशियों पर संभावित प्रभाव
शुभ: वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण सकारात्मक संकेत दे सकता है। आध्यात्मिक उन्नति और पुराने कार्यों में सफलता के योग बन सकते हैं।
लाभकारी: मिथुन और तुला राशि के लिए आर्थिक अवसर और नई योजनाओं की शुरुआत अनुकूल रह सकती है।
कष्टकारी: सिंह, वृष और मकर राशि के जातकों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है। निर्णय सोच-समझकर लें।
हानिकारक: कर्क, कन्या, धनु और कुंभ राशि के लोगों के लिए स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर ध्यान देना जरूरी रहेगा।
चिंताजनक: मेष राशि के लिए यह समय भावनात्मक उतार-चढ़ाव ला सकता है। संयम और सकारात्मक सोच जरूरी है।
सूतक काल और ग्रहण का समय
ग्रहण स्पर्श: दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण मध्य: शाम 5:05 बजे
ग्रहण मोक्ष: शाम 6:47 बजे
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल ग्रहण से पूर्व प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश और शुभ कार्यों से परहेज करने की परंपरा है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।
Rewa में धार्मिक तैयारी और श्रद्धालुओं की आस्था
Rewa और आसपास के क्षेत्रों में मंदिरों में विशेष जप-पाठ और भजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय श्रद्धालु ग्रहण काल में मंत्र जाप, दान और ध्यान करने की योजना बना रहे हैं। होली के उत्सव के बीच यह खगोलीय घटना धार्मिक उत्साह को और बढ़ा रही है।
ग्रहण विशेष सार
- तारीख: 3 मार्च 2026
- प्रकार: खग्रास चंद्रग्रहण
- योग: सूर्य-मंगल-राहु-बुध चतुर्ग्रही योग
- धार्मिक महत्व: जप, दान और साधना का विशेष समय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खग्रास चंद्रग्रहण क्या होता है?
जब पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है, उसे खग्रास चंद्रग्रहण कहा जाता है।
क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
ग्रहण की दृश्यता स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। स्थानीय खगोलीय जानकारी देखना उचित है।
ग्रहण के दौरान क्या सावधानी रखें?
धार्मिक मान्यता अनुसार जप-ध्यान करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
किन राशियों को लाभ होगा?
वृश्चिक और मीन राशि के लिए यह ग्रहण शुभ संकेत दे सकता है।
क्या होली पर इसका असर पड़ेगा?
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव माना जाता है, लेकिन सामाजिक उत्सव पर इसका सीधा प्रतिबंध नहीं होता।
Neelam Dwivedi
Neelam Dwivedi is an experienced digital content editor in the field of journalism. She has been working with the Rewa Riyasat news portal since 2016, managing and editing news content in both Hindi and English. She covers a wide range of topics, including national and international news, politics, sports, technology, health, lifestyle, and social issues. Her work focuses on presenting clear, accurate, and easy-to-understand news for readers while staying updated with the latest trends in digital media.




