रीवा

मरीजों के लिए वरदान बना रीवा का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, हृदय रोग विभाग में OCT तकनीक का इस्तेमाल कर बचाई मरीज की जान

मरीजों के लिए वरदान बना रीवा का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, हृदय रोग विभाग में OCT तकनीक का इस्तेमाल कर बचाई मरीज की जान
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सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय में मध्यप्रदेश के शासकीय चिकित्सालयों में से सबसे पहले OCT एवं कंटिंग बैलून के माध्यम से पूर्ण रूप से बंद स्टेंट को खोलने वाला पहला इंस्टीट्यूट बन गया है।

रीवा शहर में संचालित सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय में मध्यप्रदेश के शासकीय चिकित्सालयों में से सबसे पहले ओ.सी.टी. (Optical Coherence Tomography) एवं कंटिंग बैलून के माध्यम से पूर्ण रूप से बंद स्टेंट को खोलने वाला पहला इंस्टीट्यूट बन गया है। विगत दिवस एक 57 साल के बुजुर्ग डॉ. एस.के. त्रिपाठी सह प्राध्यापक हृदयरोग विभाग के पास सीने में तेज दर्द के लक्षणों के साथ ओ.पी.डी. में पहुंचे थें, जहां डॉ. त्रिपाठी द्वारा मरीज को भर्ती करने मरीज की एजियोंग्नफी की योजना बनायी गई।

एजियोंगाफी में पाया गया कि दिल की नस में पूर्व में लगा स्टेंट 100 प्रतिशत बंद था और उसमे कैल्शियम का बोहोत ज्यादा जमाव था। ऐसे में सामान्य एंजियोप्लास्टी कर पाना असम्भव होता है। इन केसेस को करने के लिए ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी (OCT) जैसे स्पेशल तकनीक का प्रयोग होता है। पूर्ण रूप से बंद स्टेंट में जिस तत्व का जमाव होता है। उसे ओ.सी.टी. (Optical Coherence Tomography) के माध्यम से बेहतर तरीके से देखा जा सकता है।

इस विशेष प्रोसीजर हेतु डॉ. त्रिपाठी द्वारा ओ.सी.टी. का प्रबंध किया गया एवं कटिंग बैलून के माध्यम से प्रोसीजर को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। डॉ. त्रिपाठी द्वारा ओ.सी.टी. तकनीक के बारे में बताया गया कि यह तकनीक Near Infired Light तकनीक से कार्य करती है, जिसमें कैथियेटर के माध्यम से लाईट सोर्स कोरोनरी आर्टरी में इन्सर्ट किया जाता है, जिससे आर्टरी के अन्दर की बीमारी का सही आंकलन हो पाता है एवं स्टेंट की साईज का सही अनुमान लग पाता है, इससे सटीक तरीके से एंजियोप्लास्टी करने में सहायता मिलती है तथा कार्डियोलाजिस्ट जटिल एजियोप्लास्टी भी सरलता से कर पाते हैं।

ऐसा प्रोसीजर प्रदेश में संचालित प्राईवेट संस्थानों में काफी महंगे है तथा सामान्य जन को इन प्रोसीजरों का खर्चा व्यय करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। परन्तु शासन की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत योजना द्वारा प्रोसीजर को चिकित्सालय में निशुल्कः तथा सफलतापूर्व संपन्न किया गया एवं मरीज की दिल की नस पूर्ण रूप से सामान्य हो गई और मरीज बायपास सर्जरी से बच गया। इन प्रोसीजरों को बिना टीम वर्क के कर पाना असम्भव था, इन नामुमकिन से लगने वाले प्रोसीजर को मुमकिन बनाने में हमारे कैथलैब टेक्नीशियन जय नारायण मिश्र, सत्यम, सुमन, मनीष, सुधांशु, फैजल, नर्सिंग स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा के अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय में रोटाब्लेटर एवं आई.वी.यू.एस जैसी मशीन उपलब्ध हो जाने से हृदयरोग से संबधित जटिल सर्जरियों को किया जाना संभव हो सकेगा।

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