रीवा

Nagar Nigam Rewa: वाह रे नगर निगम रीवा! SE, EE और सहायक यंत्री के लिए 50-50 हजार रुपए, डीसीआर सेल में 20 व कंम्प्यूटर ऑपरेटर के लिए 10 हजार की रिश्वत...

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Nagar Nigam Rewa: कहने को तो लोग यहां तक कहते हैं कि नगर निगम रीवा में बिना पैसे दिए छोटे से छोटा काम भी नही हो सकता। साभी काम के लिए अधिकारियों ने दाम सेट कर रखे हैं।

Nagar Nigam Rewa: कहने को तो लोग यहां तक कहते हैं कि नगर निगम रीवा में बिना पैसे दिए हवा भी प्रवेश नहीं कर पाती। अब आप सोच रहे होंगे कि यह तो अतिशयोक्ति की वार्ता है लेकिन यहां हाल के दिनों में वायरल हो रहे एक हिसाब किताब को देखकर आपका यह भ्रम दूर हो जाएगा। यह भ्रम केवल उन लोगों में हैं जिनका अभी तक पाला नगर निगम से नहीं पड़ा है। अगर एक छोटे से काम के लिए भी आप नगर निगम जा रहे हैं तो अपनी जेब देख कर जाइए। जैसे बाजार में बिना पैसे के कुछ नहीं मिलता वैसे ही बिना लेनदेन किए नगर निगम रीवा में कोई भी कार्य नहीं होता।

क्या है वायरल

जानकारी के अनुसार इन दिनों सोशल मीडिया में नगर निगम की डीसीआर सेल के भवन अनुज्ञा के लिए ली जाने वाली रकम का एक व्हाट्सएप ग्रुप चैट वायरल है। इस ग्रुप चैट को देखने के बाद यह तो समझ में आता है कि निश्चित तौर पर यह किसी बड़े लेन-देन का हिसाब किताब है। लेकिन अभी इससे पर्दा उठना बाकी है।

लाखों में दिया जा रहा

वायरल हो रहे इस ग्रुप चैट को देखने के बाद पता चलता है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। इसमें चेन की कड़ी की तरह सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेन-देन का यह पूरा सिस्टम पूरे विधि विधान के साथ चल रहा है।

जानकारी मिल रही है कि वार्ड क्रमांक 8 में किसी व्यावसायिक भवन अनुज्ञा के नाम पर निगम के कंसल्टेंट द्वारा आवेदक को हिसाब किताब दिया जाना बताया जा रहा है। इस हिसाब किताब में निगम अधिकारियों से लेकर डीसीआर सेल, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि कई सीटों में दिया गया पैसा बताया जा रहा है।

होगी जांच तो खुलेगा भेद

अब किस वायरल हिसाब किताब को देखने के बाद अब इसकी सच्चाई जानने का प्रयास किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगर इस मामले की पूरी जांच नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन द्वारा की जाए तो सारा भेद खुल कर सामने आ जाएगा। साथ ही यह जांच नगर निगम मे व्याप्त भ्रष्टाचार और घूसखोरी की परत खोलने में काफी मददगार साबित होगा।

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