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शर्मनाक : कोरोना पीरियड में शादी न रुकवाने का रीवा पुलिस ने शुरू किया नया रिवाज, दोनों पक्षों से ले रहे शगुन, तिलक का 5 हजार, शादी का 10 हजार फिक्स

RewaRiyasat.Com
Shashank Dwivedi
01 May 2021

शर्मनाक : कोरोना पीरियड में शादी न रुकवाने का रीवा पुलिस ने शुरू किया नया रिवाज, दोनों पक्षों से ले रहे शगुन, तिलक का 5 हजार तो शादी का 10 हजार फिक्स 

रीवा (REWA NEWS) : कोरोना पीरियड में बेटा-बेटी की शादी करना है तो पुलिस को शगुन देना पड़ेगा। सुनने में अटपटा भले लगे है लेकिन वर्तमान में चल ऐसा ही रहा है। पुलिस को एक पक्ष से नहीं अपितु दोनो पक्षों को शगुन देना पड़ रहा है। वर पक्ष तिलकोत्सव के लिए तो कन्या पक्ष को बारात आने व शादी कार्यक्रम के लिए।

ऐसा हम नहीं जिन लोगों ने हाल में शादी ब्याह किए हैं वह बता रहे हैं। ज्ञात हो कि वर्तमान का समय शादी ब्याह का समय है। वर व कन्या पक्ष दोनों द्वारा छ माह पूर्व से शादी तारीख फिक्स कर ली थी। शहर में तो कम है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह नई रिवाज काफी प्रचलन में है। शहर में बारात घर तो गांवों में टेंट की बुकिंग एडवांस में कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि लगन शुरू होने से पहले कोरोना की दूसरी लहर के कारण प्रशासन द्वारा शादी ब्याह के आयोजन प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। जिन लोगों की पहले लगन तय है वह अपनी बेटी के हाथ पीले करना चाहते हैं। ढोल ढमाका न सही 4 से 6 लोग जाकर सात फेरे करवा कर जिमेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा शादी रोकने का पूरा जिम्मा पुलिस को दे दिया है। अब पुलिस ऐसे लोग जिनके घर में शादी है उनका पता लगा कर अपना दहेज फिस कर उन्हें शादी ब्याह के आयोजन की हरी झंडी दे रही है। सभी थानों में शादी मुखबिर तैनात किए गए हैं जो थानों के अधिकारियों व शादी ब्याह करने वालों के बीच सेतु का काम कर रहे हैं।

बता दें कि जिले में प्रतिदिन आधा सैकड़ा से अधिक शादियां हो रही हैं लेकिन पुलिस केवल उन्हीं के घर छापा मारती है जिनका दहेज फिस नहीं हो पाया है। जानकारी अनुसार 30 अप्रैल को दर्जनों की शादियां हुई हैं। जिनमें अधिकांश कार्यक्रम करने वालों द्वारा पुलिस को न आने के लिए पहले ही शगुन भेट कर चुके थे।

जानकारों की माने तो ग्रामीण थानों में शादी करवाने को लेकर पुलिस द्वारा शगुन फिक्स कर दिया गया है. तिलक के लिए  5 हजार तो शादी के लिए 10 हजार रूपए तक शगुन लिया जा रहा है. इस तरह के अपराध पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। और ऐसे भ्रस्ट्राचार में लिप्त पुलिसकर्मियो पर कार्रवाई करनी चाहिए। 

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