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रीवा में रोशनी शुक्ला की बेरहम हत्या: सांसद की महिला असिस्टेंट को दो बोलेरो से कुचलकर मारने की साजिश, 7 दिन बाद SIT गठित

News Highlights
- भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला को दो बोलेरो से बार-बार कुचलने का आरोप
- घटना को पहले सड़क हादसा बताया गया, अब मर्डर मिस्ट्री
- प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया – ड्राइवर आगे-पीछे गाड़ी करता रहा
- मौत के 7 दिन बाद SIT गठित, पूरे इलाके में आक्रोश
रीवा जिले की शांत सड़कों पर घटित एक घटना ने पूरे मध्यप्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह की महिला असिस्टेंट और उभरती हुई भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला की मौत अब महज़ एक सड़क दुर्घटना नहीं मानी जा रही। शुरुआती रिपोर्ट में जिसे हिट एंड रन कहा गया, वही मामला अब एक खौफनाक मर्डर मिस्ट्री बन चुका है।
परिवार, प्रत्यक्षदर्शियों और घटनास्थल की तस्वीरें एक ऐसी कहानी बयां करती हैं, जिसे सुनकर रूह कांप जाती है। रोशनी को पहले एक बोलेरो से टक्कर मारी गई, फिर दूसरी बोलेरो ने आगे-पीछे करते हुए उसे बार-बार कुचला। जब तक लोग मौके पर पहुंचे, तब तक उसका शरीर लगभग क्षत-विक्षत हो चुका था। यह महज़ हादसा नहीं था, बल्कि निर्मम हत्या की तरह दिखता है।
सड़क हादसा या साजिश? | Accident or Planned Murder?
दिन एवं घटनास्थल - 14 जनवरी की रात बेलवा मोड़, रीवा।
मकर संक्रांति का दिन खत्म हो रहा था। रोशनी शुक्ला बस से उतरकर घर की ओर बढ़ रही थीं। उन्होंने कुछ देर पहले ही भाई को फोन कर बताया था कि वह पहुंचने वाली हैं। अंधेरा था, सड़क सुनसान थी। तभी दो बोलेरो गाड़ियां वहां पहले से मौजूद थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही रोशनी आगे बढ़ीं, उन गाड़ियों में बैठे युवकों ने उनसे बदतमीजी की। रोशनी ने विरोध किया—यही उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई। गाड़ियां उसके पीछे चल पड़ीं। कुछ दूरी पर एक बोलेरो आगे और दूसरी पीछे आ गई। रोशनी जान बचाकर दौड़ी, लेकिन कुछ ही पलों में वह शिकार बन चुकी थी।
ड्राइवर की बेरहमी | Brutality on the Road
चश्मदीद बताते हैं कि पहले बोलेरो ने उसे टक्कर मारकर गिराया। इसके बाद दूसरी बोलेरो ने उसे कुचलते हुए आगे बढ़ी। रोशनी चीखती रही, मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन ड्राइवर ने गाड़ी रोकने के बजाय आगे-पीछे करते हुए उसे रौंदता रहा। अंततः गाड़ी पलट गई और रोशनी उसके नीचे दब गई।
करीब 15 लोगों ने 45 मिनट की मशक्कत के बाद बांस की बल्लियों से गाड़ी उठाकर उसे बाहर निकाला। उसकी रीढ़ टूट चुकी थी, पैर कई जगह से चूर-चूर थे, सिर और पेट पर गहरे घाव थे। वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। यह दृश्य देखकर लोग रो पड़े। एक महिला प्रत्यक्षदर्शी ने कहा—“मैंने अपनी जिंदगी में इतनी बेरहम मौत नहीं देखी।”
परिवार का दर्द | Family in Shock
रोशनी शुक्ला हत्याकांड: "उठनी थी डोली, उठानी पड़ी अर्थी" - परिजनों का छलका दर्द
मां तारा शुक्ला की पुकार:
"हमने बेटी को पढ़ाया-लिखाया ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके। सोचा था, उसकी डोली उठेगी, लेकिन हमें उसकी अर्थी उठानी पड़ी।"
पिता शिवाकांत शुक्ला का बयान:
"वह देश की सेवा करना चाहती थी, राजनीति में आगे बढ़ रही थी। लेकिन किसी को यह मंजूर नहीं था।"
भाई प्रकाश शुक्ला का बड़ा दावा:
रोशनी को पहले से खतरे का अंदेशा था। वह कहती थी—“कुछ लोग मेरे पीछे पड़े हैं।” आखिरी दिन उसने फोन किया था कि वह पहुंचने वाली है। मैं उसे लेने निकला, लेकिन उससे पहले ही उसे बेरहमी से कुचल दिया गया।
सवालों के घेरे में सिस्टम | Questions on the System
रोशनी शुक्ला केस: हादसा या सुनियोजित साजिश? 4 तीखे सवाल
1. दोहरा प्रहार क्यों?
अगर यह महज़ एक हादसा था, तो दो अलग-अलग गाड़ियां एक ही युवती को बार-बार क्यों कुचलती रहीं?
2. संदिग्ध मूमेंट
घटना से 4 घंटे पहले से उस विशेष इलाके में लगातार घूम रही उन गाड़ियों का असली मकसद क्या था?
3. मानवता की हत्या
टक्कर के बाद ड्राइवर ने घायल रोशनी की मदद करने के बजाय मौके से भागना क्यों चुना?
4. पुलिसिया देरी
सबसे अहम सवाल—इतने गंभीर मामले में मौत के 7 दिन बीत जाने के बाद ही SIT का गठन क्यों किया गया?
पुलिस अब इसे हिट एंड रन और मर्डर—दोनों एंगल से जांच रही है। लेकिन परिवार का कहना है कि अगर यह आम लड़की होती, तो शायद मामला यहीं दबा दिया जाता। रोशनी की पहचान एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में थी, इसलिए यह मामला अब राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया है।
मिनट-दर-मिनट घटनाक्रम | Minute-by-Minute Timeline
रोशनी शुक्ला हत्याकांड: मिनट-दर-मिनट खौफनाक घटनाक्रम
मकर संक्रांति की वो काली रात | पूरी जानकारी
शाम का बुलावा (साजिश की शुरुआत)
मकर संक्रांति के दिन रोशनी को दलिया प्लांट संचालक का कॉल आया। मिठाई और शुभकामनाओं के बहाने उसे दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद प्लांट बुलाया गया।
रात 8:45 बजे - बेलवा मोड़ आगमन
प्लांट से काम निपटाकर रोशनी बस से बेलवा मोड़ उतरीं। उन्होंने भाई को फोन किया—"अंधेरा हो गया है, लेने आ जाना।" भाई घर से निकला, पर होनी को कुछ और मंजूर था।
बदतमीजी और रोशनी का साहस
रास्ते में दो बोलेरो सवार युवकों ने अभद्रता की। रोशनी ने डटकर मुकाबला किया और कहा—"हरकत की तो चप्पल से मारूंगी।" इसी विरोध के बाद हमलावरों ने गाड़ियाँ पीछे लगा दीं।
निर्मम हत्या - बार-बार रौंदा गया
हमलावरों ने दो बोलेरो से रोशनी को घेर लिया। पहली गाड़ी ने कुचला, फिर दूसरी बिना नंबर की गाड़ी ने दोबारा रौंदा। ड्राइवर ने आगे-पीछे कर उसे तब तक कुचला जब तक गाड़ी पलट नहीं गई और रोशनी उसके नीचे दब गई।
14 जनवरी की शाम, मकर संक्रांति के दिन, रोशनी शुक्ला को एक कॉल आया। कॉल उस दलिया प्लांट के संचालक का था, जिसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी हाल ही में रोशनी को दी गई थी। उसे संक्रांति की मिठाई लेने और शुभकामनाएं देने के बहाने प्लांट बुलाया गया। वह एक दिन पहले ही दिल्ली से लौटी थीं, जहां वे सांसद हिमाद्री सिंह के आवास पर कार्यरत थीं।
रोशनी बस से रीवा स्थित प्लांट पहुंचीं, करीब आधे घंटे वहां रहीं और घर पर फोन कर बताया कि काम पूरा हो गया है। रात करीब 8:45 बजे बस ने उन्हें बेलवा मोड़ पर उतारा। उतरते समय उन्होंने भाई को फोन किया—“मैं पहुंच रही हूं, अंधेरा हो गया है, लेने आ जाना।” भाई निकल चुका था, लेकिन वह कुछ मिनट पहले ही बस से उतर चुकी थीं।
बस स्टॉप से आगे बढ़ते ही दो बोलेरो गाड़ियां उन्हें खड़ी दिखीं। पास से गुजरते समय गाड़ी में बैठे युवकों ने बदतमीजी की। रोशनी ने विरोध किया—“हरकत की तो चप्पल से मारूंगी।” यही क्षण टर्निंग पॉइंट बना। दोनों गाड़ियां उसके पीछे चल पड़ीं। कुछ दूर जाकर एक गाड़ी आगे और दूसरी पीछे हो गई।
रोशनी जान बचाकर दौड़ी। कुछ दूरी पर गाड़ियां आगे निकल गईं, जिससे उसे लगा कि खतरा टल गया। वह सुनीता सिंह के घर के पास लगी नेट की जाली तक पहुंची ही थी कि पीछे से तेज रफ्तार बोलेरो आई और उसे कुचलते हुए निकल गई। तुरंत बाद दूसरी बिना नंबर की बोलेरो आई और फिर से उसे रौंद डाला। ड्राइवर आगे-पीछे गाड़ी करता रहा। अंततः गाड़ी पलट गई और रोशनी उसके नीचे दब गई।
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही | Voices from the Spot
रोशनी मर्डर केस: चश्मदीदों के रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे, साजिश की ओर इशारा!
प्रत्यक्षदर्शी रामलखन आदिवासी:
“रात करीब 9 बजे हमने देखा, वह जिंदगी और मौत के बीच थी। 15 लोगों ने मिलकर बांस की बल्लियों से कार उठाई। 45 मिनट की मशक्कत के बाद उसे निकाला गया। उसकी रीढ़ और पैर तीन जगह से टूट चुके थे।”
रामबुटान रावत का दर्द:
“मैंने उसका चेहरा साफ किया, सिर गोद में रखा। वह मेरी बेटी जैसी लगी। पेट से लेकर पैर तक शरीर का हर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। ऐसी दर्दनाक मौत मैंने आज तक नहीं देखी।”
सुनीता सिंह (बड़ा खुलासा):
“दोनों गाड़ियां शाम 5 बजे से 200 मीटर के दायरे में चक्कर काट रही थीं। जैसे किसी का इंतजार हो। जैसे ही रोशनी बस से उतरी, उन्होंने उसका पीछा करना शुरू कर दिया।”
प्रत्यक्षदर्शी रामलखन आदिवासी बताते हैं—“रात करीब नौ बजे हम पहुंचे। लड़की की हालत देखकर मेरे होश उड़ गए। वह जिंदगी और मौत के बीच थी। 15 लोगों ने मिलकर बांस की बल्लियों से कार उठाई। 45 मिनट बाद उसे बाहर निकाला गया। उसकी रीढ़ टूट चुकी थी, पैर तीन जगह से टूटा था, सिर से लगातार खून बह रहा था।”
रामबुटान रावत कहती हैं—“मैंने अपनी जिंदगी में इससे ज्यादा दर्दनाक मौत नहीं देखी। मैंने ही उसका चेहरा साफ किया, सिर गोद में रखा। वह मेरी बेटी जैसी लगी। पेट से लेकर पैर तक शरीर का हर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था।”
सुनीता सिंह ने बताया कि दोनों गाड़ियां घटना से पहले करीब चार घंटे तक इलाके में घूमती रहीं। “शाम पांच बजे से वे 200 मीटर के दायरे में चक्कर काट रही थीं। जैसे किसी का इंतजार हो। जैसे ही रोशनी बस से उतरी, दोनों ने उसका पीछा किया।”
परिवार के सवाल | Family Demands Justice
रोशनी शुक्ला केस: परिवार की चीख - "हमें सिर्फ न्याय चाहिए"
मां तारा शुक्ला का दर्द
"इससे अच्छा तो मुझे मौत आ जाती। बेटी को पाल-पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया। जब वह अपने पैरों पर खड़ी हुई, तब दरिंदों ने उसे छीन लिया। क्या अब बेटियां घर से निकल भी नहीं सकतीं?"
पिता शिवाकांत शुक्ला की व्यथा
पिता बताते हैं कि रोशनी ने अपनी काबिलियत से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद हिमाद्री सिंह की टीम में जगह बनाई थी। "हम बेटी की डोली उठाने वाले थे, लेकिन हमें उसकी अर्थी उठानी पड़ी।"
भाई प्रकाश का खुलासा
प्रकाश ने बताया कि रोशनी को पहले से खतरा महसूस हो रहा था। वह कहती थी कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। जिस रात उसे कुचला गया, प्रकाश उसे लेने जा रहा था, पर उससे पहले ही यह भयावह कांड हो गया।
मां तारा शुक्ला का दर्द छलक उठता है—“इससे अच्छा तो मुझे मौत आ जाती। बेटी को पाल-पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया। जब वह अपने पैरों पर खड़ी हुई, तब दरिंदों ने उसे छीन लिया। क्या अब बेटियां घर से निकल भी नहीं सकतीं?”
पिता शिवाकांत शुक्ला बताते हैं कि रोशनी ने राजनीति में अपने दम पर पहचान बनाई थी। पहले केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के यहां काम किया, फिर सांसद हिमाद्री सिंह की टीम में अहम जिम्मेदारी संभाली। “हम बेटी की डोली उठाने वाले थे, लेकिन हमें उसकी अर्थी उठानी पड़ी।”
भाई प्रकाश कहते हैं—“बहन अक्सर कहती थी कि कुछ लोग उसके पीछे पड़े हैं। वह सब बताना चाहती थी, लेकिन परिवार को परेशान नहीं करना चाहती थी। आखिरी दिन मैं उसे लेने जा रहा था, उससे पहले ही उसे कुचल दिया गया।”
पुलिस और SIT | Investigation Under Scanner
पुलिस के अनुसार, यह मामला हिट एंड रन और हत्या—दोनों एंगल से जांच में है। थाना प्रभारी का कहना है कि अभी वाहन और ड्राइवर की पहचान नहीं हो सकी है। लेकिन घटना के सात दिन बाद रीवा एसपी द्वारा SIT गठित करना इस बात की पुष्टि करता है कि मामला सामान्य नहीं है।
एडिशनल एसपी ने कहा है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ठोस कार्रवाई की जाएगी। इलाके में अब यह सवाल गूंज रहा है—क्या यह एक दुर्घटना थी, या किसी ने सुनियोजित तरीके से एक महिला नेता को रास्ते से हटा दिया?
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रोशनी शुक्ला कौन थीं?
रोशनी शुक्ला शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह की असिस्टेंट और सक्रिय भाजपा नेत्री थीं। वे दिल्ली और मध्यप्रदेश में पार्टी का कार्य संभालती थीं।
क्या यह सड़क हादसा था?
परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला था। दो गाड़ियों द्वारा बार-बार कुचलना इसे हत्या की ओर इशारा करता है।
SIT क्यों बनाई गई?
घटना की गंभीरता, राजनीतिक पहचान और विरोधाभासी तथ्यों के कारण पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच टीम गठित की।
आरोपी कब पकड़े जाएंगे?
पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जल्द गिरफ्तारी होगी। SIT इसी दिशा में काम कर रही है।
Rewa Riyasat News
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