रीवा

60 साल से नसीब नहीं हुई सिलचट ग्रामवासियों को एक अदद सड़क, विकास के नाम पर हल्ला मचाने वालों ने किया छलावा : REWA NEWS

Aaryan Dwivedi
16 Feb 2021 11:43 AM IST
60 साल से नसीब नहीं हुई सिलचट ग्रामवासियों को एक अदद सड़क, विकास के नाम पर हल्ला मचाने वालों ने किया छलावा : REWA NEWS
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रीवा : देश की आजादी के इतने लंबे समय बाद भी कुछ ऐसे गामीण इलाके हैं जहां पर रहने वाले लोगों को आवागमन के लिए एक अदद सड़क का बेसब्री से इंतजार है। रीवा जिले की ग्राम पंचायत बड़ा गांव अंतर्गत सिलचट एक ऐसा बदनसीब गांव है जहां रहने वाले ग्रामीणों को तकरीबन साठ साल से आवागमन के लिए एक व्यवस्थित सड़क का इंतजार है। लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और जनपद जैसे महत्वपूर्ण इलेक्शन में सिलचट में रहने वाले गांव वालों ने प्राथमिकता के साथ मतदान किया है इसके बाद भी गांव में रहने वाले लोगों के लिए एक सड़क की सौगात आज तक नसीब नहीं हुई है ‌ढर्रा वाले ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर जिंदगी गुजारने के लिए यहां रहने वाले लोग मजबूर हैं। चुनाव के दौरान सिलचट गांव पहुंचने वाले नेताओं ने हर बार परेशान गांव वालों को भरोसा जताया कि चुनाव होने के बाद वे प्राथमिकता के साथ आवागमन के लिए एक व्यवस्थित सड़क का निर्माण सबसे पहले करवाएंगे। लेकिन चुनाव होने के बाद जीतने वाले नेताओं ने फिर पांच साल तक इस गांव की तरफ देखना तक जरुरी नहीं समझा।

बरसात में आवागमन ठप्प, घरों में कैद हो जाते हैं ग्रामीण जिले के ग्राम पंचायत बड़ा गांव के सिलचट गांव में विकास का पहिया साठ साल में न पहुंचना समझ से परे है ‌ सैकड़ों की संख्या में गांव में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या सड़क का न होना है। जिला प्रशासन, संभागायुक्त जैसे दिग्गज अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देने और सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाने के बाद भी धरातल में एक सड़क का निर्माण कार्य नहीं हुआ है। पिछले साठ साल से इस गांव में रहने वाले लोगों के लिए बरसात का मौसम सबसे अधिक कष्ट वाला रहता है।

बरसात का सिलसिला शुरू होते ही सिलचट गांव में आवागमन व्यवस्था लगभग ठप्प हो जाती है। कीचड़ की अधिकता के साथ साथ जगह जगह पानी भरने की वजह से गांव वालों को अपने घरों में कैद रहना पड़ता है। हां यह जरूर है कि जब बहुत इमरजेंसी होती है तो गांव वालों को जान हथेली पर लेकर उपेक्षित रास्ते से निकलना पड़ता है। पिछले साठ साल से गांव वालों के लिए बरसात का मौसम सबसे घातकीय साबित होता आ रहा है।

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