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- रीवा: पुलिस विभाग में...

रीवा। मप्र के रीवा जिले में दिसंबर माह पुलिस विभाग के लिए काफी तनावपूर्ण रहता है। इस महीने पुलिसकर्मियों को पेडिंग मामलों की टेंशन रहती है। वर्तमान में पुलिस विभाग पेडिंग मामलों का निराकरण करने में लगा हुआ है। जिले के सभी थानों में लगभग पांच सैकड़ा से अधिक अपराध वर्ष 2019 के पेडिंग है जिनका निराकरण दिसंबर माह में थाना प्रभारियों व विवेचकों को करना है।
उक्त मामलों का निराकरण के लिए पुलिसकर्मी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे है जिस पर चालान न्यायालय में पेश किया जा सके। जिन प्रकरणों में आरोपियों का पता नहीं चल पाया है उसमें खात्मा लगाया जा रहा है। चालू सत्र के सभी प्रकरणों का निराकरण पुलिस विभाग को उसी वर्ष में करना होता है।
यही कारण है कि थानों की पुलिस काफी दबाव में है। खुद अधिकारियों द्वारा पेडिंग मामलों की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है और थाना प्रभारियों से जानकारी ली जा रही है।दो दिन पूर्व एसपी आबिद खान ने कंट्रोल रुम में सभी थाना प्रभारियों की बैठक लेकर 31 दिसंबर के पूर्व पेडिंग मामलों का निराकरण करने के निर्देश दिये है।
पेडिंग मामलों की संंया रोकने के लिए पुलिसकर्मियों ने रोकी कायमी
वर्तमान में पेडिंग मामलों की संख्या को बढऩे से रोकने के लिए थानों में कायमी काफी कम हो गई है। जो भी आवेदन आते है उनको जांच के नाम पर रोका जा रहा है और उनमें जनवरी माह में ही कार्रवाई हो पायेगी।
पुलिसकर्मी पहले पुराने मामलों का निराकरण करने में लगे है। यदि कोई बड़ी घटना न हो तो उसमें कायमी करने से वे बचते रहते है। मारपीट, एक्सीडेंट जैसे छोटे मामलों में अवश्य कायमी की जा रही है।
सिविल लाइन में पेडिंग है सर्वाधिक अपराध
पुलिस थानों में सबसे ज्यादा पेडिंग मामले सिविल लाइन थाने में है। सिविल लाइन में 1299 अपराध दर्ज हुए है जिसमें 132 अपराध पेडिंग है।
वहीं सिटी कोतवाली में 44, विवि में 13, चोरहटा में 37, बिछिया में 14, अजाक में 1, महिला थाना 1, समान 36, रायपुर कर्चुलियान में 8 , गुढ़ में 17, गोविन्दगढ़ 8 , सगरा 4, बैकुंठपुर 77, सिरमौर 10, मनगवां 29, सेमरिया 20, गढ़ 43, लौर 11, मऊगंज 6 9, शाहपुर 20, हनुमना 35, नईगढ़ी 29, सोहागी 9, चाकघाट 2, जनेह 4, डभौरा 4, अतरैला 5, पनवार 17, जवा 9 शामिल है।
बेड हेड टिकट बनी पुलिस की समस्या
मामलों का निराकरण करने में सबसे ज्यादा समस्या बेडहेड टिकट की आ रही है। अस्पताल में भर्ती मारपीट व एक्सीडेंट के घायलों के डिस्चार्ज होने के महीनों बाद भी बेडहेड टिकट नहीं मिलती है जिससे उनके प्रकरणों का चालान पेश नहीं हो पात है।
बेडहेड टिकट में घायल की चोट से संबंधित चिकित्सक का मत होता है जिसके आधार पर धारा बढ़ाकर चालान पेश किया जाता है लेकिन अस्पताल में बेडहेड टिकट पाना पुलिसकर्मियों के लिए आसान नहीं होता है। संजय गांधी अस्पताल में सबसे गंभीर समस्या सर्जरी विभाग में है जहां पुलिसकर्मियों को दो-तीन महीने तक बेडहेड टिकट के लिए वार्ड के चक्कर काटने पड़ते है।
आर्थोपेडिग विभाग की बेडहेट टिकट समय पर सीएमओ कार्यालय में जमा हो जाती है जिसे पुलिसकर्मी आसानी से प्राप्त कर लेते है। दूरदराज के थानों से पुलिसकर्मीप्रतिदिन अस्पताल आते है और दिन भर भटकने के बाद शाम को चिकित्सकों को कोसते हुए निकल जाते है।
पेडिंग मामलों का निराकरण करने के लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। प्रतिदिन काफी मामलों का निराकरण किया जा रहा है। जो भी समस्याएं होगी उनको तत्काल दूर किया जायेगा। आबिद खान, एसपी रीवा




