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- तो क्या विंध्य हो...

सतना. विंध्य प्रदेश का मध्यप्रदेश में विलय के बाद सरकार द्वारा लगातार विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही। इस कारण यहां के किसान, व्यापारी एवं युवाओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा। विगत एक दशक में देश के अंदर कई छोटे-छोटे राज्यों का गठन हुआ है। छोटे राज्य बनने से क्षेत्र का विकास तेजी से हुआ है। छत्तीसगढ़ हो या उत्तराखंड, अलग राज्य बनने से क्षेत्र की जनता को लाभ मिला है। इसलिए विंध्य क्षेत्र को मप्र से अलग कर विंध्य प्रदेश राज्य का गठन होना चाहिए। विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन में विंध्य की औद्योगिक नगरी सतना को प्रदेश की राजधानी तथा रीवा में हाइकोर्ट खोलने का संकल्प लिया गया है। यह बात सोमवार को पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने सर्किट हाउस में कही। अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर पूर्व विधायक तिवारी 1300 किमी की जन अस्मिता यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा के संयोजक व पूर्व विधायक तिवारी ने कहा कि अलग विंध्य प्रदेश जन-जन की मांग है। विंध्य खनिज संपदा से भरपूर है। विंध्य की रेवेन्यू से दिल्ली में मेट्रो चल सकती है तो अलग राज्य क्यों नहीं बन सकता? इस अवसर पर यात्रा के सहसंयोजक राजेश दुबे, प्रवक्ता महेंद्र मिश्रा, रामबहादुर, कैप्टन राज द्विवेदी, कृष्णकुमार बडग़ैया, अखिल त्रिपाठी उपस्थित रहे। 10 चरणों में होगा आंदोलन
सर्किट हाउस में अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर आयोजित बैठक में तिवारी ने बताया कि इसके लिए बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही। आंदोलन दस चरणों में होगा। पहले चरण में अस्मिता यात्रा निकाल कर लोगों को इससे जोड़ा गया। दूसरे चरण में तहसील स्तपर पर सम्मेलन किए जाएंगे। विंध्य प्रदेश की मांग राजनीतिक नहीं है। इसमें सभी वर्ग एवं पार्टियों के लोग शामिल हैं। कैप्टन राज द्विवेदी ने कहा कि अलग विंध्य प्रदेश के गठन से ही विंध्य के विकास के द्वारा खुलेंगे। जरूरत पड़ी तो विंध्य के 50 हजार रिटायर्ड सैनिक सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे।




