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ठग निकला गृहमंत्री व रीवा कलेक्टर का करीबी, रिटायर्ड सैनिक से लाखों रुपये की ठगी, कुछ दिन पूर्व कलेक्टर के साथ डाली थी फोटो

जिले के नटवरलाल आए दिन सीधे सादे लोगों का शिकार बना रहे हैं। इनके झांसे में जहां साधारण और कम पढ़े-लिखे लोग फंस रहे हैं। वहीं, बेरोजगार युवकों और रिटायर्ड फौजियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे ही एक रिटायर्ड सेना के जवान के साथ लाखों की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। मामला उद्योग विभाग द्वारा राइस मिल लगाने के लिए फाइनेंस और सिसडी दिलाने के नाम पर की गई ठगी का है, जिसमें नटवरलाल ने शातिराना अंदाज में कई लोगों के लाखों रुपये हजम कर लिए और जब पीडि़तों ने अपने पैसे और डायूमेंट्स मांगे तो आजकल करते हुए महीनों टरकाता रहा। अंत में सेना के जवान के खिलाफ ही सिविल लाइन थाने में आवेदन देकर उसे फंसाने की धमकी देने लगा। ठगी करने वाला युवक कभी गृहमंत्री बाला बच्चन, कभी जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा तो कभी कलेटर बसंत कुर्रे के साथ फोटो पोस्ट कर नजदीकियां दर्शाकर लोगों पर धौंस जमाता रहा। लाखों रुपए गवां चुके रिटायर्ड सेना के जवान ने सोमवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर ठग द्वारा व्हाट्सएप चैटिंग के 5 पन्नों का दस्तावेज और शिकायती पत्र देते हुए कार्रवाई करने और रकम वापस दिलाने की मांग की है। एसपी ने जवान को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। जानकारी के अनुसार पुष्पराज सिंह पिता राजप्रताप सिंह निवासी ग्राम हटवा थाना बैकुंठपुर हाल निवास अनंतपुर थाना विश्वविद्यालय सेना का रिटायर्ड जवान है। वह किसी काम से यूनियन बैंक लालगांव गया था, जहां कमल सिंह पिता नारायण सिंह निवासी कोटरा कला थाना त्योंथर से उसकी मुलाकात हुई। कमल को जैसे ही पता चला कि वह सेना से हाल ही में रिटायर हुआ है, उसने अपने संपर्क गृह मंत्री से लेकर प्रदेश और उद्योग विभाग के कर्मचारियों तक होने की बात बताई और साथ ही कुछ ऐसे फोटोग्राफ दिखाए जिससे जवान झांसे में आ गया और कमल पर विश्वास कर बैठा। कमल सिंह ने उसे 1 करोड़ रुपए फाइनेंस कराकर 40 प्रतिशत की सिसडी दिलाने की बात कही और कहा कि सिसडी दिलाने में चार लाख रुपये का खर्च आएगा। सेना के जवान ने शासन की योजना जानते हुए भी यह भूल कर बैठा और झांसे में आकर कमल सिंह को 3 मार्च 2019 को नकद 3.10 लाख रुपये दे दिया। पैसा पाते ही कमल सिंह ने कहा कि वह लोन तत्काल उद्योग विभाग से स्वीकृत कराकर उसे सिसडी दिला देगा। उसने रिटायर जवान को भरोसा दिलाया और कुछ लोगों को और लोन दिलाए जाने एवं लोन में छूट दिलाए जाने के केस लाने को कहा। रिटायर्ड सेना के जवान ने अपने कुछ परिचितों से भी कमल की मुलाकात कराई तो कमल ने उन से भी पचास-पचास हजार रुपये ले लिए। लाखों रुपये ऐंठने के बाद धीरे-धीरे कमल पीडि़तों से बचने लगा और उनके फोन उठाने बंद कर दिये तथा उल्टा उन्हें ही फंसाने की धमकी देने लगा। परेशान होकर रिटायर्ड जवान और अन्य लोगों ने पैसों की मांग की तो वह व्हाट्सएप में चैट करने लगा। उसने कई बार धमकी भी दी।
व्हाट्सएप चैटिंग से खुल गई पोल: कमल सिंह और पुष्पराज सिंह के बीच मित्रता हो गई थी, जिसके बीच फोन से बातचीत भी होती थी। लेकिन कमल सिंह ने पैसा पाते ही अपना रूप बदल दिया और फोन उठाना बंद कर दिया। वह सिर्फ व्हाट्सएप से चैट करता था। पीडि़त ने एसपी को सौंपे गए दस्तावेजों में 28 अगस्त से 22 दिसबर 2019 तक हुई चैटिंग का दस्तावेज भी सौंपा है, जिसमें कई बार कमल सिंह ने पैसा शीघ्र वापस करने और दस्तावेज देने के साथ धमकी भरे मैसेज भी पोस्ट किये हैं। चैटिंग से स्पष्ट प्रतीत होता है कि कमल शातिर किस्म का युवक है।




