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प्रयागराज माघ मेले में हंगामा: मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य की पालकी रोकी, पुलिस से टकराव; स्नान नहीं कर पाएं अविमुक्तेश्वरानंद

- मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य की पालकी को पुलिस ने रोका
- पैदल जाने के निर्देश पर शिष्यों और पुलिस में धक्का-मुक्की
- कई शिष्य हिरासत में, साधु से मारपीट का आरोप
- करीब 2 घंटे तक चला तनाव, शंकराचार्य स्नान नहीं कर पाए
Prayagraj Magh Mela | मौनी अमावस्या पर बिगड़ा माहौल
प्रयागराज माघ मेले में रविवार को उस समय भारी तनाव पैदा हो गया, जब मौनी अमावस्या के पावन स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन ने भीड़ का हवाला देते हुए उनसे पैदल संगम जाने का आग्रह किया, लेकिन शिष्य इस बात पर सहमत नहीं हुए।
पालकी को आगे बढ़ाने की कोशिश के दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि एक साधु को चौकी में ले जाकर पीटा भी गया।
Sequence of Events | कैसे शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब पुलिस ने संगम की ओर जाने वाले मार्ग पर भीड़ प्रबंधन के तहत बैरियर लगाए थे। प्रशासन का कहना था कि संगम तट पर उस समय तिल रखने की भी जगह नहीं थी और सुरक्षा कारणों से सभी वीआईपी मूवमेंट पर रोक थी।
पुलिस ने शंकराचार्य से आग्रह किया कि वे रथ और पालकी से उतरकर पैदल संगम जाएं, ताकि भीड़ में अव्यवस्था न फैले। लेकिन शिष्यों ने इसे अस्वीकार कर दिया और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इसी बिंदु पर विवाद गहराता चला गया।
Rising Tension | 2 घंटे तक चली गहमा-गहमी
धक्का-मुक्की और हिरासत की खबर मिलते ही शंकराचार्य नाराज हो गए। उन्होंने शिष्यों को छुड़ाने की मांग की और मौके से हटने से इनकार कर दिया। अफसरों ने हाथ जोड़कर समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।
करीब दो घंटे तक मौके पर तनाव बना रहा। इसी दौरान पुलिस ने शंकराचार्य के कुछ और समर्थकों को हिरासत में ले लिया और उनकी पालकी को खींचते हुए संगम से लगभग 1 किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का एक हिस्सा भी टूट गया। अंततः शंकराचार्य स्नान नहीं कर पाए।
Shankaracharya Statement | “यह सरकार के इशारे पर हो रहा है”
शंकराचार्य का बड़ा बयान
“यह सरकार के इशारे पर हो रहा है”
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बेहद आक्रोशित दिखाई दिए। उन्होंने मौके पर कड़े शब्दों में प्रशासन की आलोचना की।
बड़े-बड़े अधिकारी हमारे संतों को मार रहे थे। पहले तो हम लौट रहे थे, लेकिन अब स्नान करेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। वे हमें रोक नहीं पाएंगे। इनको ऊपर से आदेश होगा कि इन्हें परेशान करो। यह सरकार के इशारे पर हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जब महाकुंभ में भगदड़ मची थी, तब उन्होंने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था। उसी का बदला अब उनसे लिया जा रहा है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि संतों के साथ इस तरह का व्यवहार आस्था का अपमान है और इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
Police Version | “संगम नोज पर तिल रखने की जगह नहीं थी”
प्रशासन का पक्ष: पुलिस कमिश्नर का बयान
पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कुछ पाबंदियां लागू की थीं।
"शंकराचार्य रथ और पालकी के साथ करीब 200 समर्थकों के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने पांटून पुल-2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की।"
सुरक्षा का हवाला:
कमिश्नर के अनुसार, उस समय संगम नोज पर स्थिति बेहद संवेदनशील थी। करोड़ों श्रद्धालु, बच्चे और महिलाएं मौजूद थे। सभी VIP मूवमेंट पर पाबंदी के बावजूद बार-बार पैदल स्नान का निवेदन किया गया था।
पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि शंकराचार्य रथ और पालकी के साथ करीब 200 समर्थकों के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने पांटून पुल-2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की।
कमिश्नर के अनुसार, उस समय संगम नोज पर स्थिति बेहद संवेदनशील थी। करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घाटों पर मौजूद थे। बार-बार निवेदन किया गया कि वे पालकी और रथ के बिना पैदल स्नान के लिए जाएं, क्योंकि उस दिन सभी वीआईपी मूवमेंट पर पाबंदी थी।
उन्होंने कहा कि बैरियर तोड़ने और थाने पर हुई धक्का-मुक्की की घटनाओं को लेकर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि संतों के प्रति प्रशासन की पूरी श्रद्धा है, लेकिन जन-सुरक्षा सर्वोपरि है।
Mass Gathering | मौनी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब
मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज माघ मेले में आस्था का सैलाब उमड़ा। प्रशासन के अनुसार, दोपहर तक ही 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके थे। अनुमान था कि दिन के अंत तक यह संख्या 4 करोड़ तक पहुंच सकती है।
मेले का क्षेत्र लगभग 800 हेक्टेयर में फैला है, जिसे 7 सेक्टरों में बांटा गया है। करीब 8 किलोमीटर लंबे अस्थायी घाट बनाए गए हैं। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए AI सिस्टम, CCTV कैमरे और ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है।
शंकराचार्य को क्यों रोका गया?
भीड़ अत्यधिक होने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पालकी और रथ के साथ संगम जाने से मना किया और पैदल जाने का आग्रह किया।
क्या किसी को हिरासत में लिया गया?
पुलिस ने धक्का-मुक्की और अव्यवस्था के दौरान कई शिष्यों और समर्थकों को हिरासत में लिया।
शंकराचार्य स्नान क्यों नहीं कर पाए?
करीब दो घंटे चले तनाव, पालकी हटाए जाने और समर्थकों की हिरासत के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी, जिससे वे संगम तक नहीं पहुंच पाए।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन का कहना है कि संतों के प्रति सम्मान बना हुआ है, लेकिन उस समय संगम क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोपरि थी और सभी वीआईपी मूवमेंट पर रोक लागू थी।
Rewa Riyasat News
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