
बड़ी खबर : मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब सवर्णो को भी मिलेगा आरक्षण

भोपाल। मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भाजपा को मिली हार के बाद केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ा फैसला लिया है। जिसके अनुसार अब आर्थिक रूप से कमज़ोर सवर्णों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, इसके लिए संविधान संशोधन बिल लाया जाएगा।
सामने आ रही जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैसला किया है कि अब सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।
इस फैसले की जानकारी सामने आते ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में सवर्णों के चेहरे खिल गए।
यह सही व्यवस्था है जो गरीब हो उन्हें उपर उठाया जाए। सरकार यदि ये कार्य पहले कर लेती तो शायद मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ जैसे राज्य उसे नहीं गंवाने पड़ते। - आरके शर्मा, निवासी भोपाल
हमारा शुरू से यही कहना था कि आरक्षण आर्थिक आधार पर हो न कि जातिगत आधार पर, सरकार यदि संविधान संशोधन यह बिल लाती है तो सचमुच काफी अच्छा निर्णय रहेगा। साथ ही वे जो भाजपा के विपक्ष में आ गए थे, वे भी इस निर्णय से वापस आ सकते हैं। - विजय दंडोतिया, निवासी ग्वालियर
ये आरक्षण का मामला ही सरकार को ले डूबा, अब यदि सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात कर रही है। तो यह सबसे अच्छा फॉर्मूला होगा। जिससे कमजोर तबके को उपर उठाया जा सकेगा।
- आरके सिंह, निवासी भोपाल
आरक्षण पर अब गरीब और जरूरतमंद का ही अधिकार होना चाहिए। सरकार का ये एकदम सटिक फैसला है। जो आम जनता को खुश करने वाला है। - आर के आर्या, निवासी भोपाल
दरअसल सूत्रों के मुताबिक इस साल अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं। जानकारों के अनुसार इन चुनावों से पहले मोदी सरकार ने सवर्णों को अपनी ओर दुबारा आकर्षित करने के लिए बड़ा दांव खेला है।
सामने आ रही जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैसला किया है कि अब सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। ये आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दिया जाएगा। बता दें कि पिछले साल मोदी सरकार द्वारा पास किए हुए SC/ST कानून के बाद बीजेपी के कोर वोटर मने जाने वाले स्वर्ण नाराज हो गए थे।
सियासी जानकारों की मानें तो दिसम्बर 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को सवर्णों की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा था। पार्टी के भीतर भी SC/ST कानून को लेकर सवाल खड़े किए गए थे, केंद्र और राज्यों में पहले ही अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी और अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 22 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।




