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महिला की गुहार / 'मेरे पति के पास वक़्त बहुत कम है, मुझे उनका स्पर्म चाहिए', हाईकोर्ट ने मंजूरी दी...

RewaRiyasat.Com
रीवा रियासत डिजिटल
21 Jul 2021

अहमदाबाद. एक कनाडियन महिला ने गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाई है कि उसके पति की जिंदगी का आखिरी वक़्त चल रहा है. इसलिए वह अपने प्यार के आखिरी निशानी के तौर पर पति के अंश के रूप में मातृत्व धारण करना चाहती है, इसलिए लिए महिला को पति का स्पर्म (Sperm) चाहिए.

पत्नी की ऐसी गुजारिश सुनकर पहले तो कोर्ट हैरान हो गया हो, लेकिन पत्नी का पति के प्रति प्रेम और कानून के सम्मान को देखते हुए कोर्ट ने महिला को को पति के स्पर्म लेने की मंजूरी दे दी.

ऐसी गुजारिश कनाडा की रहने वाली महिला ने गुजरात हाईकोर्ट से की थी. महिला का अहमदाबाद में ससुराल है. उसका पति जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. डॉक्टरों ने भी जबाव दे दिया है. इसलिए महिला अपने पति का अंश पाने की ख्वाहिश लिए सोमवार शाम को गुजरात हाईकोर्ट पहुँच गई. 

अर्जेन्ट सुनवाई की मांग मानते हुए कोर्ट ने महिला की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की. इस दौरान महिला ने कोर्ट में कहा कि 'मेरे पति मृत्यु शैया पर हैं. मैं उनके स्पर्म से मातृत्व सुख हासिल करना चाहती हूं, लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं देता. हमारे प्यार की अंतिम निशानी के रूप में मुझे पति के अंश के रूप में उनका स्पर्म दिलवाने की कृपा करें. डॉक्टरों का कहना है कि मेरे पति के पास बहुत ही कम वक्त है. वे वेंटिलेटर पर हैं.'

महिला की गुजारिश पर कोर्ट ने उसे स्पर्म प्राप्त करने की मंजूरी तो दे दी. लेकिन स्टर्लिग अस्पताल (जहां महिला का पति भर्ती है) तुरंत तैयार नहीं हुआ और कहा कि कोर्ट के फैसले को समझ रहे हैं. हांलाकि अस्पताल ने स्पर्म ले लिए है और आईवीएफ ट्रीटमेंट की प्रोसेस शुरू करने जा रहे हैं.

हाईकोर्ट के आदेश को लेकर स्टर्लिंग हॉस्पिटल के जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार नांबियार का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद ही हमने तैयारी शुरू कर दी थी. मरीज मरणासन्न स्थिति में है. ऐसे में ब्लीडिंग रोकने और दूसरी बातों पर भी ध्यान देना पड़ता है.

जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है पति 

महिला के मुताबिक़, वह अपने पति से 4 साल से संपर्क में थी, तब दोनों कनाडा में थें. अक्टूबर 2020 में दोनों ने शादी कर ली. लेकिन शादी के चार माह बाद मेरे ससुर के हार्ट अटैक की खबर मिलने के बाद हम दोनों भारत आ गए थें. यहां रहकर उनकी देखभाल और इलाज करवा रहें थे कि इस दौरान मेरे पति कोरोना से संक्रमित हो गए. 

इलाज करवाया लेकिन 10 मई से तबीयत नाजुक होने के चलते वडोदरा के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया. उनकी सेहत लगातार गिरने लगी. फेफड़े भी संक्रमित होकर काम न करने की हालत में पहुंच गए. मेरे पति दो महीने से वेंटिलेटर पर जीवन का संघर्ष कर रहे हैं.

तीन दिन पहले डॉक्टरों ने मुझे और सास-ससुर को बुला कर बताया कि मेरे पति की तबीयत में सुधार की गुंजाइश नहीं के बराबर है. हालत ऐसी है कि उनके पास ज्यादा से ज्यादा तीन दिन का ही जीवन है. यह सुन कर हम सब सन्न रह गए. मैंने खुद को संभाला और डॉक्टर से कहा कि मैं अपने पति के अंश से मातृत्व धारण करना चाहती हूं. इसके लिए उनके स्पर्म की जरूरत है.

हालांकि डॉक्टरों ने हमारे प्रेम के प्रति सम्मान जताया और कहा कि मेडिको लीगल एक्ट के मुताबिक पति की मंजूरी के बिना स्पर्म सैंपल नहीं लिया जा सकता. मैंने बहुत गुजारिश की, लेकिन डॉक्टरों ने कानून का हवाला देकर स्पर्म देने से इनकार कर दिया. लेकिन मैंने हार नहीं मानी.

मुझे मेरे सास-ससुर का भी साथ मिला. हम तीनों ने गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाने का फैसला किया. जब हम हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे थे, तब डॉक्टरों ने कहा कि आपके पति के पास सिर्फ 24 घंटे का समय है.

हमने सोमवार शाम हाईकोर्ट में याचिका लगा कर दूसरे दिन अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाई. हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के सामने मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो जज भी कुछ पल के लिए हैरान रह गए. फिर 15 मिनट बाद मेरे हक में फैसला दे दिया. लेकिन यहां अस्पताल में अभी भी कह रहे हैं कि हम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रहे हैं.'

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