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What Is One Nation One Election: क्या है एक राष्ट्र एक चुनाव? जिसे विपक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा

What Is One Nation One Election: क्या है एक राष्ट्र एक चुनाव? जिसे विपक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा
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What Is One Nation One Election: केंद्र सरकार भारत में वन नेशन वन इलेक्शन का प्रस्ताव लेकर आने वाली है, जिसे लेकर अभी से विरोध शुरू हो गया है

What Is One National One Election: भारत में चुनाव कार्यक्रम कभी रुकते नहीं। हर साल किसी न किसी राज्य में आम चुनाव, विधानसभा चुनाव, महापौर चुनाव होते ही रहते हैं. ऐसे में केंद्र सरकार एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में है जिसे पीएम मोदी ने नाम दिया है 'वन नेशन वन इलेक्शन' (One Nation One Election) हिंदी में कहें तो एक राष्ट्र एक चुनाव। लेकिन इस प्रस्ताव के पेश होने से पहले ही विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया है. आम आदमी पार्टी इस प्रस्ताव के विरोध में अगुवाई कर रहा है. AAP का कहना है कि एक राष्ट्र एक चुनाव का प्रस्ताव गैर संवैधानिक और लोकतंत्र के लिए खतरा है.

आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी जोशी ने केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उन्होंने 12 पन्नों में One Nation One Election के खिलाफ अपनी राय रखी है. आतिशी का कहना है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को इसी लिए लाना चाहती है क्योंकि इससे भारतीय जनता पार्टी के ऑपरेशन लॉट्स को फायदा मिलेगा।

  • अगर वन नेशन वन इलेक्शन लागू हुआ तो लोगों का मैंडेट देने का अधिकार खत्म होने का खतरा है.
  • AAP का कहना है कि इस प्रस्ताव के पास होने के बाद देश के लोगों से वोट देने का अधिकार खत्म कर दिया जाएगा।
  • बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों को दबा देंगी
  • जो लोग केंद्र में अलग और राज्य में अलग पार्टी को वोट देतें हैं उनके लिए भी मुश्किल होगा कि वो किसे वोट दें

क्या है वन नेशन वन इलेक्शन पॉलिसी

What Is One Nation One Election Policy: जैसा की नाम से पता चलता है. वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब यही है कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों. यानी सभी राज्यों के चुनाव और लोकसभा चुनाव एक ही समय पर आयोजित हों. एक राष्ट्र एक चुनाव पॉलिसी भारत के लिए नई नहीं है. आज़ादी के बाद 1952, से लेकर 1967 तक देश में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे. मगर 1968-69 में कई विधानसभाएं समय से पहले भंग कर दी गईं और 1970 में लोकसभा भंग हुई. जिसके बाद एक राष्ट्र एक चुनाव की परंपरा टूट गई. और इसी पॉलिसी को बीजेपी वापस अमल में लाना चाहती है.

वन नेशन वन इलेक्शन से देश को फायदा होगा

वर्तमान में देश में ऐसा कोई साल नहीं बीतता है जब किसी न किसी राज्य में विधानसभा चुनाव आयोजित न हों. अगर वन नेशन वन इलेक्शन लागू होता है तो सभी राज्यों के चुनाव और लोकसभा चुनाव एक वक़्त पर होंगे और इसमें खर्चा कम आएगा साथ ही विकास के प्रोजेक्ट रुकेंगे नहीं।

भाजपा ने पहली बार 2017 में वन नेशन, वन इलेक्शन का प्रस्ताव देश के सामने रखा था। इस प्रस्ताव को लॉ कमीशन के सामने रखा गया और 2018 में लॉ कमीशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। दिसंबर 2022 में लॉ कमीशन ने सभी राजनीतिक दलों को अपनी रिपोर्ट भेजकर इस पर उनकी राय मांगी थी।

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