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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदला तो खत्म होगा SC का दर्जा, ईसाई बनने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

Aaryan Puneet Dwivedi
24 March 2026 4:36 PM IST
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन पर अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खत्म होने की जानकारी
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के लोग ही SC दर्जे के पात्र हैं।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धर्म परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और आरक्षण खत्म हो जाएगा। जानें ईसाई बने दलितों पर क्या है कोर्ट का नया आदेश।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो देश के आरक्षण नियमों और अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर देता है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलकर ईसाई या किसी अन्य धर्म (जो हिंदू, सिख या बौद्ध नहीं है) को अपनाता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) को मिलने वाले विशेष लाभ और सुरक्षा का हकदार नहीं रह जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म परिवर्तन और आरक्षण का गणित

मंगलवार को जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के नियमों के मुताबिक, अनुसूचित जाति का दर्जा केवल उन लोगों के लिए है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म का पालन करते हैं।

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अगर कोई दलित व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, तो वह 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (SC-ST Act) के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता। सरल शब्दों में कहें तो, धर्म बदलते ही उस व्यक्ति की पुरानी जाति पहचान कानूनी रूप से समाप्त मानी जाएगी।


क्या था पूरा मामला? (चिंथदा बनाम अक्काला रामी रेड्डी केस)

यह मामला आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले का है। यहाँ चिंथदा आनंद नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अक्काला रामी रेड्डी और कुछ अन्य लोगों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया और उन्हें जातिसूचक गालियां दीं। चिंथदा ने उनके खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था।

जांच के दौरान एक बड़ी बात सामने आई। चिंथदा मूल रूप से 'माला' समुदाय (SC) से थे, लेकिन उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था और पिछले 10 वर्षों से एक चर्च में पादरी (Pastor) के रूप में काम कर रहे थे। जब यह मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने आरोपियों पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

अदालत की दो टूक: पादरी बनने के बाद SC एक्ट लागू नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि जब पीड़ित खुद यह स्वीकार कर चुका है कि वह 10 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो उस पर SC-ST एक्ट लागू ही नहीं होता। कोर्ट ने कहा:

"SC-ST एक्ट का मकसद उन समुदायों की रक्षा करना है जो ऐतिहासिक रूप से पिछड़े रहे हैं और हिंदू समाज का हिस्सा रहे हैं। जो लोग दूसरे धर्म में चले गए हैं, वे इस कानून की आड़ नहीं ले सकते।"

संविधान क्या कहता है? (Constitution Scheduled Castes Order, 1950)

भारत के संविधान में 1950 में एक आदेश पारित किया गया था। इस नियम के अनुसार, केवल उन्हीं लोगों को अनुसूचित जाति (SC) का माना जाएगा जो हिंदू धर्म के अनुयायी हों। बाद में इसमें संशोधन करके सिख (1956) और बौद्ध (1990) धर्म को भी जोड़ा गया।

लेकिन, इस सूची में ईसाई और इस्लाम धर्म को शामिल नहीं किया गया है। इसलिए, यदि कोई दलित व्यक्ति ईसाई या मुस्लिम बनता है, तो वह तकनीकी और कानूनी रूप से अनुसूचित जाति की श्रेणी से बाहर हो जाता है।

आरक्षण के लिए धर्म बदलना 'संविधान से धोखा'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पुराने मामलों का भी जिक्र किया। 1985 के एक प्रसिद्ध केस (सूसाई बनाम भारत सरकार) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल लाभ या आरक्षण पाने के लिए धर्म बदलना या फिर से हिंदू धर्म में लौटने का नाटक करना 'संविधान के साथ धोखा' है। अगर कोई व्यक्ति वापस हिंदू धर्म में आता है और SC दर्जा चाहता है, तो उसे पुख्ता सबूत देने होंगे कि उसके समाज ने उसे स्वीकार कर लिया है।

SC-ST एक्ट क्या है?

जानिए दलित और आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा करने वाला कड़ा कानून

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों पर होने वाले भेदभाव और हिंसा को जड़ से खत्म करना है।


किन कार्यों को माना गया है अपराध?

  • जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करना या अपमानित करना।
  • शारीरिक मारपीट, संपत्ति पर अवैध कब्जा या तोड़फोड़।
  • सामाजिक बहिष्कार करना या सार्वजनिक सुविधाओं से रोकना।
  • महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार या किसी भी प्रकार का शोषण।

कानून की सख्ती और पुलिस की भूमिका

त्वरित कार्रवाई: पुलिस को शिकायत मिलते ही बिना किसी देरी के FIR दर्ज करना अनिवार्य है। जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।

🚫 अग्रिम जमानत नहीं: इस कानून के तहत आरोपी को एंटीसिपेटरी बेल (अग्रिम जमानत) नहीं मिलती, ताकि गिरफ्तारी से बचा न जा सके।

स्पेशल कोर्ट

मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष 'फास्ट ट्रैक' अदालतों का गठन किया जाता है।

सरकारी सहायता

सरकार पीड़ितों को आर्थिक मुआवजा, सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी सुविधा प्रदान करती है।

*नोट: 2015 और 2018 के संशोधनों के बाद इस कानून को और भी अधिक प्रभावी और सख्त बना दिया गया है।


इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर होगा?

इस फैसले के कई दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:

  • कानूनी स्पष्टता: अब पुलिस और निचली अदालतें धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की शिकायतों पर SC-ST एक्ट लगाने से पहले उनके वर्तमान धर्म की जांच करेंगी।
  • दस्तावेजों की जांच: केवल जाति प्रमाण पत्र होना काफी नहीं है; व्यक्ति का वास्तविक धार्मिक आचरण भी मायने रखेगा।
  • राजनीतिक बहस: आंध्र प्रदेश जैसी राज्य सरकारों ने पहले भी प्रस्ताव पारित कर ईसाइयों को SC दर्जा देने की मांग की है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से उस मांग को झटका लगा है।
Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi

Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.

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