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सुप्रीम कोर्ट ने एक और बलात्कारी को मरने से बचा लिया! 8 साल की भांजी का रेप और मर्डर करने वाले पर कोर्ट की नरमी

सुप्रीम कोर्ट ने एक और बलात्कारी को मरने से बचा लिया! 8 साल की भांजी का रेप और मर्डर करने वाले पर कोर्ट की नरमी
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने एक बार बलात्कारी और हत्यारे की मौत की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया है

Supreme Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ने एक और रेपिस्ट व मर्डरर को मरने से बचा लिया है. कोर्ट ने 8 साल की भांजी का रेप और हत्या वाले आरोपी की सज़ा-ए-मौत को उम्र कैद में बदल दिया है। मामला मध्य प्रदेश का है जहां साल 2014 में आरोपी ने अपनी चचेरी बहन की 8 साल की बच्ची को हवस का शिकार बनाने के बाद उसकी हत्या कर दी थी. हाईकोर्ट मध्य प्रदेश ने POCSO के तहत उस राक्षस को मौत की सज़ा सुनाई थी. लेकिन रहम दिल सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 8 साल की भांजी का रेप और हत्या करने वाले आरोपी की जान बक्श दी.

सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा वो आपको जानना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से अपराध किया गया वह शैतानी और भीषण था. लेकिन दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं आता है. मतलब कोर्ट का कहना है कि 8 साल की बच्ची का रेप करना इतना बड़ा अपराध नहीं है कि आरोपी को मौत की सज़ा हो.

दोषी की ज़िन्दगी बचाने वाली जजों की बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सिटी कुमार थे. इन तीनों जजों की बेंच ने दोषी की मौत की सज़ा को कम करते हुए 30 साल तक की उम्र कैद की सजा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को आईपीसी की धारा 302 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. शीर्ष अदालत ने दोषी को 30 साल की अवधि के लिए वास्तविक कारावास की सजा दी और कहा कि इससे पहले रिहाई/छूट के प्रावधान नहीं होंगे. अदालत ने कहा कि सच यह है कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, और वह एक खराब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से था. जेल के अंदर उसका बेदाग आचरण भी सजा सुनाते समय ध्यान में रखा गया.

दोषी 25 साल का सुधर सकता है

उच्चतम न्यायालय की बेंच ने कहा, 'यह भी एक तथ्य है कि अपराध करने के समय दोषी की आयु 25 वर्ष थी. इसलिए, उपरोक्त पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हमें अपीलकर्ता के सुधार और पुनर्वास की संभावना से इनकार करने का कोई कारण नहीं मिलता है. चर्चा की लंबी और छोटी बात यह है कि वर्तमान मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है, जिसमें मौत की सजा देने के अलावा कोई विकल्प न हो. आपको बता दें कि स्थानीय कोर्ट ने दोषी को इस मामले में मौत की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी

4 साल की बच्ची का रेप करने वाले की भी जान बक्श दी थी

यह पहला मामला नहीं है जब जज्ज साहेब लोगों ने किसी छोटी बच्ची का रेप और हत्या करने वाले अपराधियों पर दया दिखाई हो, कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश के एक और इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची से रेप करने और उसकी हत्या करने वाले दोषी की मौत की सज़ा यह कहकर उम्रकैद में बदल दी थी के 'हर पापी का भविष्य होता है' ये वाला मामला जानने के लिए यहां क्लिक करें

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