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₹80 करोड़ में मिल रहा बिच्छू का जहर, यहां के लोग कर रहे इस्तेमाल

Scorpion poison
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Scorpion poison

Scorpion Poison Price: नशे के बारे में तो आपने बहुत सुना और देखा होगा। कुछ नहीं तो शराब का नशा करने वाले लोग तो आज गली-गली में दिखाई जाते हैं।

Scorpion Poison Price: नशे के बारे में तो आपने बहुत सुना और देखा होगा। कुछ नहीं तो शराब का नशा करने वाले लोग तो आज गली-गली में दिखाई जाते हैं। आपने कोरेक्स गांजा अफीम चरस तरह-तरह के नसों के बारे में सुना होगा। लेकिन आज लोग इससे भी घातक नशा करने लगे हैं। आज हम बात कर रहे हैं बिच्छू के डंक में पाए जाने वाले उस जहर की जिसका लोग आज नशे के रूप में उपयोग कर रहे हैं। आज विश्व स्तर पर इसका बाजार बढ़ा हुआ है। कुछ लोग खुद के लिए नशा तो कुछ के लिए पैसे कमाने के लिए बिच्छू के जहर का कारोबार कर रहे है।

क्या है बिच्छू के जहर की कीमत

बिच्छू का जहर कितना महंगा है इस बात का अंदाजा आप सहज ही नहीं लगा सकते। या यूं कहें कि आपको इसका अंदाजा ही नहीं है। लेकिन पता चलता है कि बिच्छू के 1 ग्राम जहर की कीमत पूरे 700000 रुपए है।

कहां और क्यों होता है यह नशा

यह तो आपको भी पता होगा कि शराब, गांजा, चरस का नशा दुनिया के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर हो रहा है। लेकिन वॉइस एशिया की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान इस मामले में काफी आगे चल रहा है। भारत का पड़ोसी देश होने के नाते पाकिस्तान में चल चल रहे इस नशे का कारोबार भारत को भी प्रभावित करता है। बताया जाता है कि पाकिस्तान में बिच्छू के नशे का बड़ा कारोबार है। यहां 1 लीटर बिच्छू का जहर 80 करोड़ रुपए में बेचा जाता है। लोगों को मौत बांटकर लोग पैसे कमा रहे हैं।

घातक है बिच्छू का नशा

बिच्छू का नशा बहुत घातक बताया गया है। कहते हैं बिच्छू का नशा करने वालों का पूरा चेहरा लाल हो जाता है। बिच्छू का नशा करने वालों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। यह दिमाग को सुन्न भी कर देता है। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में इस घातक नशे के लोग आदि हो चुके हैं। वही बताया गया है कि बिच्छू के इस शहर के नशे से नींद और भूख संबंधी विकार उत्पन्न हो जाते हैं।

दवा में भी है इसका उपयोग

बिच्छू के जहर का उपयोग दवाई बनाने में किया जाता है। लेकिन खासतौर पर घातक बीमारियों के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है। जानकारों का कहना है कि इसका उपयोग एंटीबायोटिक और पेन किलर बनाने में होता है। कैंसर जैसे रोगों के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है।

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