
UGC-NET: 3 बहनों ने UGC-NET पास कर रचा इतिहास: दिहाड़ी मजदूर की बेटियां बनीं मिसाल

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जब जेब खाली हो और सपने बड़े हों: जब जीवन कठिन मोड़ पर हो, जेब खाली हो और चारों तरफ जिम्मेदारियों का बोझ हो, तब अक्सर सपने पीछे छूट जाते हैं. खासकर ग्रामीण भारत में, जहाँ शिक्षा को आज भी कई बार एक सुविधा समझा जाता है, न कि अधिकार. ऐसे में, अगर कोई सभी मुश्किलों को दरकिनार करते हुए खुद को साबित कर दे, तो उसकी सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं होती, बल्कि वह समाज के उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की लौ बन जाती है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.
पंजाब के मनसा जिले के बुधलाडा कस्बे की तीन बहनों - रिंपी कौर, बींत कौर और हरदीप कौर की कहानी कुछ ऐसी ही है. यह जिला पंजाब का सबसे कम साक्षरता दर वाला क्षेत्र है, लेकिन इन तीन बहनों ने शिक्षा के क्षेत्र में वह कर दिखाया है, जो आज देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.
तीन बहनों ने UGC-NET परीक्षा पास कर रचा इतिहास: पिता को गर्व
UGC-NET क्या है और इसे किसने पास किया? पंजाब के मनसा जिले के बुधलाडा कस्बे की रहने वाली रिंपी कौर (28), बींत कौर (26), और हरदीप कौर (23) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित UGC-NET परीक्षा को अलग-अलग विषयों में पास कर एक मिसाल पेश की है. यह तीनों बहनें एक दिहाड़ी मजदूर माँ और गुरुद्वारे में ग्रंथि सेवा देने वाले पिता की बेटियां हैं.
- रिंपी कौर (28): सबसे बड़ी बहन रिंपी कंप्यूटर साइंस में प्रोफेसर बनने का सपना देख रही हैं.
- बींत कौर (26): मंझली बहन बींत कौर JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं.
- हरदीप कौर (23): सबसे छोटी हरदीप कौर ने तो लगातार दूसरी बार UGC-NET परीक्षा पास की है और अब पंजाबी विषय में JRF प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.
उनकी सफलता पर पिता बिक्कर सिंह ने गर्व से कहा, "मेरी बेटियों की इस उपलब्धि का सारा श्रेय उनकी मेहनत और आत्मविश्वास को जाता है. इन्होंने मुझे और पूरे गांव को गौरवान्वित किया है."
पढ़ाई के साथ परिवार की आर्थिक मदद भी की
इन बहनों की सफलता इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि इन्होंने न सिर्फ पढ़ाई को प्राथमिकता दी, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए भी काम किया. उन्होंने कुछ समय एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर अपना खर्च उठाया. यह दिखाता है कि कैसे उन्होंने जिम्मेदारियों और सपनों के बीच संतुलन साधा. उनकी यह उपलब्धि सिर्फ शिक्षा में उत्कृष्टता की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मबल और संघर्ष की जीत की कहानी है. यह उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो मानते हैं कि बड़े सपने देखने का अधिकार केवल संपन्न तबके को है.
समाज के लिए बनीं मिसाल: गरीबी नहीं रोक सकती सपने
रिंपी, बींत और हरदीप की यह कहानी समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है. उन्होंने न केवल आर्थिक अभावों को झेला, बल्कि ग्रामीण परिवेश में अक्सर आने वाली सामाजिक दबावों और सीमित अवसरों को भी मात दी. उनकी मेहनत और लगन बताती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो न तो हालात रास्ता रोक सकते हैं, न ही गरीबी. क्योंकि असली ताकत किताबों में नहीं, जज्बे में होती है - और इन तीनों बहनों ने वह जज्बा जी कर दिखाया है. उनकी यह सफलता उन लाखों युवाओं को प्रेरित करेगी जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.
UGC-NET क्या है? जानें इसका महत्व
UGC-NET परीक्षा क्या होती है? UGC-NET (University Grants Commission - National Eligibility Test) एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा आयोजित की जाती है. इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी उच्च शिक्षण संस्थानों (जैसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) बनने के लिए पात्र हो जाते हैं. इसके अलावा, यह परीक्षा JRF (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) के लिए भी पात्रता प्रदान करती है. JRF उन छात्रों को मिलती है जो शोध (PhD) करना चाहते हैं, और इसके तहत उन्हें शोध के दौरान वित्तीय सहायता (फेलोशिप) मिलती है. यह परीक्षा उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है.
Neelam Dwivedi
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