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बहुत खतरनाक है ध्वनि प्रदूषण, यह दिल ही नहीं दिमाग की नसों को करता है प्रभावित, विश्व का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर

बहुत खतरनाक है ध्वनि प्रदूषण, यह दिल ही नहीं दिमाग की नसों को करता है प्रभावित, विश्व का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर
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प्रदूषण का नाम लेते ही हमारे दिमाग में कूड़, गंदगी के साथ-साथ धूल और धुआं का दृष्य आने लगता है।

प्रदूषण का नाम लेते ही हमारे दिमाग में कूड़, गंदगी के साथ-साथ धूल और धुआं का दृष्य आने लगता है। यह दृष्य गलत नहीं है। लेकिन आज यूनाइटेड नेशंस एनवायरोमेंट प्रोग्राम द्वारा जारी की गई हाल की ध्वनि प्रदूषण की रिपोर्ट की बात कर रह है। इस रिर्पोट में कहा गया है कि भारत विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषित देश है। क्योंकि भारत का एक शहर ऐसा है जहां पर ध्वनि प्रदूषण सबसे ज्यादा है। यह ध्वनि प्रदूषित शहर मुरादाबाद है।

विश्व के 61 शहरों में हुआ सर्वे

विश्व के 61 शहरों में यूनाइटेड नेशंस एनवायरोमेंट प्रोग्राम यूएनईपी के द्वारा जांच की गई। यह जांच कई स्तरों में किया गया। जिसमें ध्वनि प्रदूषण मापक यंत्रों को लगाया गया तो वहीं यह भी देखा गया कि ध्वनि प्रदूषण के सम्बंध में कितने मामले दर्ज किये गये। इन सभी आंकडों को एकत्र कर परिणाम निकाला गया कि भारत विश्व का दुसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है।

सबसे अधिक प्रदूषित है यह शहर

जब बात विश्व स्तर की हे रही है तो यह जानना आवश्यक है कि विश्व का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर कौन सा है। अगर आप यह जानना चाह रहे हैं तो आपको बाता दें कि वह शहर बांग्लादेश की राजधानी ढाका है। यहां प्रदूषण के मामले भी ज्यादा है। जहा ध्वनि प्रदूषण का स्तर 119 डेसिबल है।

वहीं भारत के उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद विश्व के आंकडे में दूसरे नम्बर पर है। जहां प्रदूषण का स्तर 114 डेसिबल है। यहा वर्ष 2021 में ध्वनि प्रदूषण के 14000 से ज्यादा मामले दर्ज किये गये। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब इतने मामले दर्ज किये गये तो कितने ऐसे मामले हेगों जिन्हे दर्ज ही नहीं किया गया। ऐसी कारण से प्रदूषण का मामला दिनों दिन बढता जा रहा है।

क्या कहता है डब्लूएचओ

ध्वनि प्रदूषण के बढते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य सगठन का कहना है कि आम रिहायसी इलाकों में ध्वनि का स्तर 55 डीबी होनी चाहिए। डब्लूएचओ की माने तो पता चलता है कि 70 डीबी से ज्यादा साउंउ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ट्रैफिक तथा बिजनेस एरिया या वर्कशाप में ध्वनि का स्तर 70 डीबी निर्धारित किया गया है।

स्वास्थ्य के लिए है ऐसे है हानिकारक

ध्वनि प्रदूषण के मामलो को देखा जाय तो पता चलता है कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। यह हमारे दिल ही नहीं दिमग की नसों को प्रभावित करता है। एक ओर जहां इसका सीधा असर हमारे कानो पर पडता है। जिससे सुनने की शक्ति काफी कम हो जाती है। वहीं दूसरी ओर ध्वनि प्रदूषण की वजह से हार्ट डिसीज, माइग्रेन, अनिद्रा जैसी बीमारी उत्पन्न हो जाती है।

वहीं कहा गया कि 70 डीबी से ज्यादा प्रदूषण हमारे दिमाग पर भी बहुत बुरा असर डालता है। इससे बचना चाहिए। वहीं अगर प्रदूषण का स्तर 114 या फिर 119 तक हो तो वहां से हट जाना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण का एक खतरनाक असर हमारे शरीर के एक पूरे सिरीज में रिएक्सन करता है। जिसे एरासल रिस्पांन्स कहा जाता है। यह शरीर के भीतरी अंगों को छति पहुंचाता है। जिसमें दिमाग, हार्ट, शरीर की नसें बुरी प्रभावित होती है।

शायद इसी कारण से आज नस से जुडी बीमारी ज्यादा होने लगी हैं। कहा गया है कि ध्वनि प्रदूषण का असर हमारे में नसों में पडने से रक्त वाहिकाओे में तनाव उत्पन्न होता है।

Sandeep Tiwari | रीवा रियासत

Sandeep Tiwari | रीवा रियासत

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