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NCERT की ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर रोक: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद बिक्री बंद

Rewa Riyasat News
25 Feb 2026 4:35 PM IST
Updated: 2026-02-25 11:22:24
NCERT की ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर रोक: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद बिक्री बंद
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NCERT की नई सोशल साइंस किताब में ‘Judicial Corruption’ चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद बिक्री रोकी गई। जानिए CJI सूर्यकांत की टिप्पणी और पूरा विवाद।

विवाद की मुख्य बातें

  • NCERT की नई किताब में ‘Judicial Corruption’ चैप्टर जोड़ा गया
  • सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई
  • किताब की ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री रोकी गई
  • सरकार ने कहा – बच्चों की किताबों में प्रेरणादायक विषय होने चाहिए

NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy ने देशभर में शिक्षा और न्यायपालिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कड़ी आपत्ति के बाद NCERT की उस नई सोशल साइंस किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है, जिसमें ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ पर एक विस्तृत सेक्शन शामिल था। यह किताब 2026-27 शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी, लेकिन अब इसे वेबसाइट से भी हटा दिया गया है।

मामला क्यों बढ़ा?

CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। इस टिप्पणी के किताब की बिक्री पर रोंक लग गई है और बुक को वेबसाइट से हटा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठाया। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह एक सोचा-समझा फैसला लगता है और वे इस केस को खुद देखेंगे। बेंच में जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे।

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Supreme Court objects to NCERT’s Judicial Corruption chapter. Sale halted amid national debate on education and judiciary.

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जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि किताब का यह हिस्सा संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ प्रतीत होता है। अदालत में यह भी कहा गया कि सिस्टम के विभिन्न हिस्सों से लगातार कॉल और संदेश मिल रहे हैं और न्यायपालिका के भीतर भी इस विषय को लेकर चिंता है।

NCERT की नई किताब में क्या लिखा था?

23 फरवरी को जारी ‘Exploring Society: India and Beyond Part 2’ नामक टेक्स्टबुक में ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ अध्याय के भीतर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और जवाबदेही तंत्र पर चर्चा की गई थी।

किताब में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या का उल्लेख किया गया था। साथ ही ‘Justice delayed is justice denied’ जैसे सिद्धांत का हवाला देते हुए न्यायिक देरी के प्रभावों पर चर्चा की गई थी।

एनसीईआरटी की बुक का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र किया गया है।

चैप्टर में जजों के आचार संहिता, आंतरिक जवाबदेही तंत्र, CPGRAMS के जरिए शिकायत प्रणाली और गंभीर मामलों में संसद द्वारा महाभियोग प्रक्रिया के जरिए जज हटाने के संवैधानिक प्रावधान का भी उल्लेख किया गया था।

वरिष्ठ वकीलों की आपत्ति

कपिल सिब्बल और अभिषेक एम सिंघवी ने अदालत में कहा कि बच्चों को केवल न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पढ़ाना संतुलित दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि किताब में नौकरशाही या राजनीति में संभावित भ्रष्टाचार पर चर्चा नहीं की गई, जिससे एकतरफा संदेश जा सकता है।

उनका कहना था कि शिक्षा सामग्री में संस्थागत संतुलन जरूरी है, ताकि किसी एक संस्था को अलग करके प्रस्तुत न किया जाए।

सरकार का रुख

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बच्चों की किताबों में प्रेरक और सकारात्मक विषय होने चाहिए। उनका कहना था कि ऐसे संवेदनशील पहलुओं को इस रूप में शामिल करना उचित नहीं है।

हालांकि NCERT की ओर से औपचारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक किताब की बिक्री 24 फरवरी से रोक दी गई और इसे वेबसाइट से भी हटा लिया गया है।

पूर्व CJI का उल्लेख और जवाबदेही की बहस

किताब में पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई के उस बयान का भी जिक्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोप सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करते हैं, लेकिन पारदर्शिता और निर्णायक कार्रवाई से विश्वास बहाल किया जा सकता है।

यह संदर्भ जवाबदेही और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करने के लिए शामिल किया गया था।

शिक्षा नीति और व्यापक संदर्भ

NCERT ने नई किताबें नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए गए हैं और 1 से 8वीं तक की नई किताबें 2025 में प्रकाशित की जा चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद शिक्षा में आलोचनात्मक सोच और संस्थागत सम्मान के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।

आगे क्या हो सकता है?

अब नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और NCERT की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर रहेगी। संभव है कि पाठ्यक्रम की समीक्षा कर कुछ बदलाव किए जाएं या संबंधित सेक्शन हटाया जाए।

यह मामला केवल एक किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस व्यापक प्रश्न को भी सामने लाता है कि स्कूली शिक्षा में संवैधानिक संस्थाओं पर चर्चा किस सीमा और किस तरीके से होनी चाहिए।

विवाद एक नजर में

  • नई NCERT किताब में ‘Judicial Corruption’ सेक्शन शामिल
  • सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बिक्री रोकी गई
  • वरिष्ठ वकीलों ने संतुलित दृष्टिकोण की मांग की
  • शिक्षा और न्यायपालिका पर नई बहस शुरू
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

NCERT की किस किताब पर विवाद हुआ है?

‘Exploring Society: India and Beyond Part 2’ नामक सोशल साइंस किताब में ‘Judicial Corruption’ सेक्शन शामिल होने पर विवाद हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति न देने की बात कही और मामले को खुद देखने की बात कही।

क्या किताब की बिक्री बंद कर दी गई है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, किताब की ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री फिलहाल रोक दी गई है।

सरकार का क्या रुख है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि बच्चों की किताबों में प्रेरणादायक और संतुलित विषय होने चाहिए।

क्या पाठ्यक्रम में बदलाव संभव है?

आगे की सुनवाई और समीक्षा के बाद NCERT पाठ्यक्रम में संशोधन कर सकता है।

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