
MP में किसान कर्ज माफी योजना के फार्म भरना शुरू, सीएम ने नाम दिया 'जय किसान ऋण मुक्ति योजना', भाजपा नेताओं को दी नसीहत

भोपाल। प्रदेश भर में मंगलवार से मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना के फार्म भरवाए जाने की शुरुआत हो गई। भोपाल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने कर्ज माफी को जय किसान ऋण मुक्ति योजना नाम दिया है। इसकी शुरुआत की। इस मौके पर 15 किसानों से कर्जमाफी के फार्म भरवाए गए। मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को चेताते हुए कहा कि हमारे घर की चिंता करने की बजाय खुद के घर की चिंता करें। उन्होंने कहा कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं ये भाजपा नेता समझ गए होंगे।
इस अवसर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि इस योजना से प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा किसनों को फायदा और 50 लाख करोड़ रुपए का कर्जा माफ होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना को मैंने मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना नाम नहीं दिया इसलिए मैंने इसे जय किसान ऋण मुक्ति योजना नाम दिया है। ये ऋण मुक्ति किसानों के लिए कोई उपहार नहीं है बल्कि एक मील का पत्थर हैस एक इन्वेस्टमेंट है भविष्य के लिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले महीने प्रदेश सरकार को एक सरप्राइज मिलेगा जिसमें मैं बताऊंगा कि प्रदेश में कितना इन्वेस्टमेंट आएगा।
भाजपा को चेताया: भारतीय जनता पार्टी द्वारा किसानों की कर्जमाफी पर उठाए जा रहे सवालों पर कमलनाथ ने कहा कि वे मुझे नहीं समझाए की क्या करना है। भाजपा सरकार के बारे में कहती है कि जल्द ही गिर जाएगी। लेकिन मैदान में दम दिखाने से डरती है। इसका उदाहरण बीते दिनों दिख जाएगा। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा कांग्रेस के घर के बारे में चिंता छोड़ अपने घर की चिंता करें। और मैं क्या कहने चाह रहा हूं ये वे समझ जाएंगे।
सुबह बदला नाम: इससे पहले आज सुबह प्रदेश सरकार की और से जो फार्म ट्वीट किया गया था उसपर मुख्यमंत्री कृषि ऋण माफी योजना का नाम लिखा था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी जानकारी में ये आया तो उन्होंने नाम बदल दिया।
22 फरवरी से किसानों के खाते में आएगा रुपया: सरकार ने कर्जमाफी के 80 लाख आवेदन छपवाए गए हैं। किसानों से आवेदन भरवाए जाने की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के सीईओ की होगे। इसे मद्देनजर रखते हुए 22 फरवरी से किसानों के खाते में कर्जमाफी की राशि डलवाने की रणनीति बनाई गई है। पंचायतों में 18 जनवरी तक हरी और सफेद सूचियां चस्पा की जाएंगी। कर्जमाफी योजना के तहत 22 फरवरी से किसानों को भुगतान होना है।
17 बैंकों की 7 हजार 500 शाखाओं: इस मौके पर कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डा. राजेश राजौरा ने बताया कि प्रदेश में 17 बैंकों की 7 हजार 500 शाखाओं के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। आवेदन आन-लाइन भरे जाएंगे। प्रतिदिन ग्रामवार तथा शाखावार प्राप्त होने वाले आवेदनों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी, उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदर्शित की जाने वाली सूचियों में कृषकों के नाम हिन्दी में ही दर्ज हों। प्रमुख सचिव सहकारिता केसी गुप्ता ने कहा कि आवेदन प्राप्त होने के साथ-साथ उनको कम्प्यूटर में दर्ज करने का कार्य सुनिश्चित किया जाए।




