
JNU में 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी' के नारे लगे: उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज पर विरोध, दिल्ली दंगा केस में कल जमानत नामंजूर हुई थी

- JNU कैंपस में मोदी-शाह के खिलाफ नारेबाजी का वीडियो सामने आया
- उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज पर विरोध
- JNUSU अध्यक्ष — नारे वैचारिक थे, किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं
- दिल्ली पुलिस — अब तक कोई शिकायत नहीं मिली
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैंपस से नारेबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। करीब 35 सेकंड के इस वीडियो में कुछ छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह विरोध उस फैसले के बाद हुआ, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
वीडियो के बाद शुरू हुई चर्चा — What Triggered the Protest?
सूत्रों के अनुसार, कैंपस में कुछ छात्रों ने अदालत के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' के नारे लगाए गए। वीडियो के वायरल होने के बाद इस घटना पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। हालांकि, घटनास्थल से कोई हिंसक गतिविधि सामने नहीं आई।
JNUSU अध्यक्ष — विरोध 2020 हिंसा की निंदा के लिए था
JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि हर साल 5 जनवरी को कैंपस में 2020 में हुई हिंसा की निंदा के लिए प्रदर्शन किया जाता है। उनके अनुसार, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं थे।
दिल्ली पुलिस — शिकायत नहीं मिली
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नारेबाजी को लेकर अभी तक पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
कांग्रेस नेता उदित राज की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह विरोध “गुस्से को व्यक्त करने का तरीका” है। उनका कहना है कि 2020 के दंगों से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर छात्रों में नाराजगी है और उनका मानना है कि दोनों के साथ नाइंसाफी हुई है।
5 जनवरी 2020 — JNU में क्या हुआ था?
5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में हिंसा हुई थी, जिसमें नकाबपोश लोगों ने हॉस्टलों में घुसकर छात्रों पर हमला किया था। इस घटना में छात्र नेताओं सहित कई लोग घायल हुए। उस समय पुलिस पर भी कार्रवाई को लेकर पक्षपात के आरोप लगे थे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला — Bail Rejected
शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से और उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी और एक साल तक नई याचिका दायर करने से भी रोक दिया। दोनों पर UAPA के तहत केस दर्ज है।
दिल्ली दंगों का बैकग्राउंड
फरवरी 2020 में दिल्ली में भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक घायल हुए थे। इस दौरान 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं, जिनमें कई मामलों में जांच अब भी जारी है।
FAQs — इस खबर से जुड़े सवाल
क्या JNU में हिंसा हुई?
नहीं — मौजूदा घटना में केवल विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की बात सामने आई है।
क्या पुलिस ने केस दर्ज किया?
अब तक इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
उमर और शरजील को जमानत क्यों नहीं मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत दर्ज केस में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और एक साल तक नई याचिका पर रोक लगा दी।
Aaryan Puneet Dwivedi
Aaryan Puneet Dwivedi is a senior editor and an experienced journalist who has been active in the news industry since 2013. He has extensive experience covering and editing news across multiple fields, including politics, national and international affairs, sports, technology, business, and social issues. He is a state-level accredited journalist recognized by the Madhya Pradesh government. Known for his in-depth understanding of news and current affairs, he focuses on delivering accurate, reliable, and reader-friendly information across all major news categories.




