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जमीयत उलेमा अध्यक्ष ने कहा इस बकरीद में गाय मत काटना, क्या मुस्लिम मानेंगे मौलाना बरूद्दीन का कहना?

Abhijeet Mishra | रीवा रियासत
4 July 2022 7:45 PM IST
Updated: 2022-07-04 14:15:59
जमीयत उलेमा अध्यक्ष ने कहा इस बकरीद में गाय मत काटना, क्या मुस्लिम मानेंगे मौलाना बरूद्दीन का कहना?
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Maulana Baruddin Ajmal ने हिंदुस्तानी मुसलमानों ने अपील की है कि कोई भी जानवर काटो लेकिन गाय की कुर्बानी मत देना

Maulana Baruddin Ajmal On Cow Sacrifice: असम के जमीयत उलेमा अध्यक्ष मौलाना बरूद्दीन अजमल ने हिंदुस्तान के मुसलमानों ने अपील की है कि अब इस बार बकरीद में कोई भी मुस्लमान गाय की क़ुरबानी ना दे, कोई भी जानवर चलेगा लेकिन गाय मत काटना, क्योंकि गौ को हिन्दू समुदाय के लोग पूजते हैं और हमें भी उनकी भावनाओं की कद्र होनी चाहिए।

जमीयत उलेमा अध्यक्ष मौलाना बरूद्दीन अजमल ने ने कहा कि गाय को हिंदू समूदाय के लोग पूजते हैं और मां के समान मानते हैं। मैं मुस्लिमों से अपील करता हूं कि, 'भारत अलग-अलग आस्था रखने वाले लोगों का देश है। इस देश में बहुसंख्यक लोग सनातनी हैं, हिंदू समुदाय के लोग गायों की पूजा करते हैं, ज्यादातर लोग गाय को मां मानते हैं, गाय के साथ हिंदू समाज के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए उसकी कुर्बानी देने से बचें।'

कोई भी जानवर चुनों लेकिन गाय को मत काटो

जमीयत उलेमा अध्यक्ष मौलाना बरूद्दीन अजमल ने कहा कि सामर्थ्य रखने वाले मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वो बकरीद में कुर्बानी दें, ऊंट, बकरा, भेड़ जिस जानवर की कुर्बानी देना है दो, लेकिन हिन्दू भाइयों की आस्था की इज्जत करते हुए गाय मत काटो। बता दें कि 2008 में देवबंद ने भी ऐसी ही अपील मुसलमानों ने की थी, और इसका हवाला देते हुए जमीयत उलेमा अध्यक्ष ने कहा कि , 'हम आप लोगों से अपील करते हैं कि वे गाय की कुर्बानी देने से बचें ताकि हिंदू समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत न हों।' बता दें कि असम ने गोहत्या, गोतस्करी के खिलाफ कानून भी बनाया है। ऐसे में बदरुद्दीन अजमल की अपील किसी भी विवाद से बचने के लिए अहम हो जाती है।

कौन है मौलाना बरूद्दीन अजमल

मौलाना बरूद्दीन अजमल असम के नेता है, उनकी अपनी पार्टी है. और 13 विधायक हैं. उन्हें असम में बीजेपी सरकार का प्रमुख विपक्षी दल का नेता माना जाता है. अजमल पर असम में बांग्लादेशी मुसलमानों को बसाने का भी आरोप है जो उनके लिए वोट बैंक का काम करते हैं.

क्या मुस्लिम मानेंगे मौलाना अजमल की अपील

मौलाना अजमल ने जो मुसलमानों से अपील की, वो अपील 2008 में देव बंद ने भी की थी. जिसका कोई भी असर हिंदुस्तान में देखने को नहीं मिला था. भारत के कुछ राज्यों में बकरीद के दिन जानबूझकर गाय की ही कुर्बानी दी जाती है और उसका वीडियो शेयर किया जाता है. प्रश्न यही है कि हिंदुस्तान का मुसलमान अब से बकरीद में मौलाना बरूद्दीन अजमल की बात सुनता है या 2008 में देवबंद से हुई अपील की तरह नजरअंदाज कर देता है।

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