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कोरोना वैक्सीन के शॉट लेने के बाद भी हो रहें हैं पॉजिटिव, जानिए क्यों है यह सामान्य बात...

RewaRiyasat.Com
रीवा रियासत डिजिटल
01 Apr 2021

2019 के अंत में आए COVID-19 ने आज तक पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है. इससे बचाव के लिए तमाम देशों ने वैक्सीन भी तैयार कर ली है. पर कई जगहों से ऐसी खबर भी आ रही है कि कोरोना वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) के दोनों शॉट लेने के बावजूद भी लोग संक्रमित हो रहें हैं. उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है. यह एक सामान्य बात है. ऐसा होता है... पर क्या आप जानते हैं कि ऐसा सामान्य क्यों है?

कोरोना वैक्सीनेशन के बाद जो कोरोना इन्फेक्शन का मामला सामने आता है उसे 'ब्रेकथ्रू केस' कहते हैं. लेकिन इसके लिए भी एक शर्त है- इसमें इन्फेक्शन दोनों वैक्सीनेशन लेने के कम से कम 14 दिन के बाद होना चाहिए. वैक्सीन एक ट्रेनर की तरह होती है. रोगाणु से लड़ने के लिए आपके इम्यून सिस्टम को ट्रेंड करने के लिए कई हफ्तों की जरूरत होती है. 

कोई भी वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 100 परसेंट इम्यूनिटी की गारंटी नहीं देती. वैक्सीन लेने के बाद बीमार होने वाले लोगों की संख्या बेहद कम आ रही है, लक्षण भी बहुत हल्के होते हैं. साइंटिस्ट का मानना है कि वैक्सीनेशन के बाद ब्रेकथ्रू केसों की संख्या बढ़ सकती है.

टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि वैक्सीन फेल रही है

कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि शॉट लेने के हफ्ते भर के भीतर कोई पॉजिटिव आ रहा हो. यह बेहद सामान्य बात है. दरअसल, डोज लेने के पहले से ही कई व्यक्तियों के शरीर में वायरस होता है. कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि वैक्सीन फेल रही है. लेकिन क्या ऐसे अन्य मामले हैं जहां एक कोरोनोवायरस वैक्सीन ने अपना काम करने में 'असफल' हो गया है? ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आपको कोरोना वैक्सीन के बाद कोरोना होना संभव है?

इसका मतलब वैक्सीन का फेल होना नहीं इसका जवाब है- हां, ठीक से वैक्सीनेशन के बाद भी लोगों के एक छोटे हिस्से के कोरोनावायरस से बीमार होने की आशंका है. अब जब दुनिया भर में कई लाखों लोगों को वैक्सीन लगाई गई है तो ऐसे मामले आने नॉर्मल हैं. ऐसा क्यों होता है, और क्या इसे वैक्सीन के फेल होने के रूप में दर्शाना ठीक है.

जानें क्या होते हैं ब्रेक थ्रू केस

कोरोना वैक्सीनेशन के बाद जो कोरोना इन्फेक्शन का मामला सामने आता है उसे 'ब्रेकथ्रू केस' कहते हैं. लेकिन इसके लिए भी एक शर्त है- इसमें इन्फेक्शन दोनों वैक्सीनेशन लेने के कम से कम 14 दिन के बाद होना चाहिए.

एंटीबॉडी बनने के लिए समय की जरूरत

जॉन्स हॉपकिंस सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी के अमेश ए अदलजा ने बताया कि वैक्सीन के लिए एक समय सीमा जरूरी है क्योंकि आपके शरीर को SARS-CoV-2 (कोरोनावायरस) से रोकथाम के लिए एंटीबॉडी डेवलप करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए." फोर्ब्स में लिखे कॉलम में साइंटिस्ट विलियम ए. हैसेल्टाइन ने इजरायल के रिसर्च का उल्लेख किया है.

उनका कहना है कि नॉर्मल और वैक्सीन की पहली डोज ले चुके लोगों के पहले 12 दिनों में संक्रमित होने की सामान्य संभावना थी. यहां तक की 17 दिन बाद भी वैक्सीन लेने वाले 60 से 80 परसेंट लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है.

कोई भी वैक्सीन 100 परसेंट परफेक्ट नहीं

वास्तव में, ब्लूमबर्ग के फार्मा इंडस्ट्री एनालिस्ट सैम फाजली ने कहा कि एक वैक्सीन थी जो वायरस के खिलाफ 100% इम्युनिटी मुहैया कराती थी. यह इतना अच्छा था कि इसने चेचक के वायरस को पूरी तरह से मिटा दिया. लेकिन ऐसी स्टरलाइज़िंग इम्युनिटी जो न केवल बीमारी बल्कि संक्रमण को भी पूरी तरह से रोक दे, मिलना दुर्लभ है.

उम्मीद से बेहतर नतीजे

कोरोनावायरस के लिए को लेकर साइंटिस्टों को 50 फीसदी प्रभावी होने की उम्मीद थी. सौभाग्य से, सभी स्वीकृत वैक्सीन की प्रभाविकता दर 95% निकली. फिर भी, सबसे अच्छी वैक्सीन आपको गारंटी नहीं दे सकता है कि आप बीमार नहीं पड़ेंगे.

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